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IMAAN NEWS 16th March 2026 IRAN's Stability and Beginning of the Third Week of War ईरान की इस्तेक़ामत और जंग के तीसरे हफ्ते की शुरुआत #sayedasifjah #imaannews #BaatImaanKi_BaatInsaanKi #news #muslimnews #insaniyat #peace #GlobalImpact #IranModernWarfare #ImamKhamenei#HaqOBatil #UmmahUnity #VictoryOfIslam #ImamKamenei #MiddleEast #IslamicWorld #AxisOfResistance #WarNPeace #DronesOfJustice #TruthfulPromise4 #ResistanceAgainstZionism #Iran “बात ईमान की… बात इंसान की।” मिडिल ईस्ट की मौजूदा जंग ने पूरी दुनिया ही की सियासत को हिला दिया है। अमरीका और इसराइल ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले और सैकड़ों हवाई वार कर रह रहे हैं और ईरान में अबतक 1300 से ज्यादा लोगों की जान इस जंग की वजह से जा चुकी है, जिनमें बड़ी तदाद में बच्चे, बुजुर्ग और औरतें भी शामिल हैं। जानी और माली नुक्सान अमेरिका और इजराइल का भी बहुत हो रहा है लेकिन ये मुल्क अपने नुक्सान को मीडिया मोमेंट्स को ब्लॉक करके और सेंसरशिप की वजह से छुपा रहे हैं। कल इजराइली मीडिया ने नेतन्याहू की मौत की खबर को झूठलाते हुए उनकी एक वीडियो जारी की मगर इस वीडियो ने नई बहस छेड़ दी और लोगों ने नेतन्याहू के मारे जाने की नई नई कहानियां गढ़नी शुरू कर दी। ये याद रखना ज़रूरी है कि कॉफ़ी के कप के साथ कैमरे पर मुस्कुराने से तारीख़ नहीं बदलती। अमरीकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक़ अभी तक उनकी तरफ़ से बड़े पैमाने पर फ़ौजी नुक़सान की तस्दीक़ नहीं हुई, लेकिन ईरान-पसंद ज़राए का दावा है कि कम से कम 14 अमरीकी बेस किसी न किसी दर्जे के हमले की ज़द में आए हैं। इतना साफ़ है कि यह जंग सिर्फ़ “pressure” नहीं, बल्कि रेजीम-चेंज और ईरान की फ़ौजी क़ुव्वत को काम करने की कोशिश है। इस जंग का सबसे बड़ा असर दुनिया की इकोनॉमी और energy security पर पड़ा है। स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मुज़ – जहाँ से दुनिया का तक़रीबन 20% कच्चा तेल गुज़रता है – ईरान की स्ट्रेटेजिक पकड़ में है। IRGC का ऐलान है, कि हॉर्मुज़ “दुश्मन जहाज़ों” के लिए effectively बंद है, और किसी भी अमरीकी या उनके करीबी मुल्कों के जहाज़ को यहाँ से गुज़रने पर निशाना बनाया जा सकता है। तेल की क़ीमतें अचानक ऊपर चली गई हैं, यूरोप और एशिया की मार्केट्स में घबराहट है, और खाड़ी के कई शहर – जो अब तक ख़ुद को “सिक्योर हेवन” समझते थे – मिसाइलों के डर से एयर डिफ़ेंस अपडेट कर रहे हैं। दुबई, अबू धाबी और दूसरी जगहों पर एयर ट्रैफ़िक में भारी गिरावट की ख़बरें आ रही हैं, जो बताती हैं कि माली नुक़सान सिर्फ़ ईरान तक महदूद नहीं रहेगा। ईरान ने जिस “असीमेट्रिक वॉरफेयर” मॉडल को तराशा, आज वही उसकी सबसे बड़ी ताक़त बन कर सामने आया है। एक तरफ़ अमरीका और इसराइल अरबों डॉलर के जंगी जहाज़, इंटरसेप्टर मिसाइल और हाई–एंड रडार सिस्टम पर dependent हैं, वही ईरान ने comparatively सस्ते और बेहद कारगर ड्रोन और मिसाइल टेक्नोलॉजी से मैदान पलटने की कोशिश की है, जिसका असर साफ दिख रहा है। इराक़ में “Resistance ग्रुप्स” ने अमरीकी बेस पर रॉकेट और ड्रोन हमलों से वॉशिंगटन को यह सोचने पर मजबूर किया है कि ख़लीज में इतने फैले हुए फ़ौजी ढाँचे को कितने दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है। मशहद, क़ुम, तेहरान और दूसरे शहरों में जो लाखों की तादाद में लोग सड़कों पर निकले, उनके हाथ में कोई हथियार नहीं, बस तसबीह और लबों पर “अल्लाहु अकबर” था। यह जज़्बा बताता है कि जंग सिर्फ़ फ़ील्ड में नहीं, दिलों में भी लड़ी जा रही है। यूट्यूब या किसी भी प्लेटफ़ॉर्म के लिए कंटेंट बनाते वक़्त यह एहतेयात ज़रूरी है कि लहजा इंसानी जानों के लिए इज़्ज़त, सब्र और अम्न की बात करे, किसी भी मुल्क या क़ौम के ख़िलाफ़ नफ़रती तहरीक न लगे, और तज़िया facts पर हो, न कि अफ़वाहों या भड़काऊ दावों पर। इस जंग का फ़ौरी अंजाम क्या होगा, यह कहना अभी मुश्किल है। अमरीका और इसराइल ने 15,000 से ज़्यादा targets पर वार करने का दावा किया है, जबकि ईरान “49वीं वेव” तक अपने जवाबी ऑपरेशन की बात कर रहा है। तारीख़ हमें बस यह सिखाती है कि ताक़त का असली पैमाना बमों की आवाज़ नहीं, बल्कि वह सब्र और इस्तेक़ामत है जिससे कोई क़ौम ज़ुल्म के सामने खड़ी रहती है। मिसाइलें और धमकियाँ किसी कौम के जज़्बे को शायद देर के लिए दबा दें, मगर तोड़ नहीं पातीं। ज़ुल्म की रात चाहे कितनी लंबी हो, सुबह आख़िरकार इंसाफ़ और इंसानियत की ही होती है। ईरान आज भी खड़ा है, और बहुत से मज़लूमों की नज़र में वो सिर्फ़ एक मुल्क नहीं, बल्कि उम्मीद का नाम है। अमरीका और इसराइल के लिए यह तकरार शायद “सिक्योरिटी ऑपरेशन” हो, लेकिन उन Families के लिए, जिनकी ज़िंदगी इस आग में झुलस रही है, यह एक ऐसी Tragedy है जिसका दाग़ कई दशकों तक मिट नहीं पाएगा। हम सबके लिए सबसे अहम बात यह है कि हम किसी भी जंग को “गेम” या “स्पेक्टेकल” की तरह न देखें, बल्कि हर ख़बर के पीछे छुपी इंसानी कहानी को महसूस करें। तारीख़ देर से फ़ैसला करती है, लेकिन जब भी करती है, साफ़ लिख देती है – ज़ुल्म हमेशा हारता है, और इंसानियत आख़िरकार जीतती है। …………++++………… Sayed Asif Jah, a Bold Voice in Journalism: A new YouTube channel has been launched on 1st August 2025, with a distinct mission, to present current news with a Muslim perspective. At the helm of this initiative is veteran journalist Sayed Asif Jah, a respected name in Indian media, who has served for decades in leading newspapers, magazines, and TV news channels across Hindi, English, and Urdu. He has served 'TVI', India's first news channel as Mumbai head to name a few. This is not just a news channel, it’s a movement of media inclusivity, led by a journalist who understands the responsibility that comes with the camera and the mic.