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#baatbebat #thepoonambhatiashow #youtubelive The Poonam Bhatia Show Live |चर्चित कवयित्री शालू शुक्ला की चंद कविताएं | ***** बात-बेबात के The Poonam Bhatia Show के YouTube Live में शनिवार 24 जनवरी को लखनऊ की रहने वाली कवयित्री साहित्यकार शालू शुक्ला जुड़ने वाली थीं, लेकिन अपरिहार्य कारणों से वे जुड़ नहीं पाईं. ऐसे में इस पूर्व नियोजित लाइव में शो की होस्ट पूनम भाटिया ने उनकी कुछ कविताओं का पाठ किया. पूनम भाटिया ढाई दशक से ज्यादा समय से राजस्थान की सेवा में बतौर शिक्षक कार्यरत हैं. फिलहाल वे जयपुर के एक स्कूल में हेडमास्टर के पद पर आसीन हैं. दो कविता संग्रह के अलावा विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में इनके आलेख और कविताएं प्रकाशित हो चुकी हैं, जबकि कुछ और किताबें जल्दी ही आने वाली हैं. पूनम भाटिया रांची से निकलने वाले अखबार 'श्रमिक बिंदु' की साहित्य संपादक तो दिल्ली से प्रकाशित होने वाली साहित्य की प्रतिष्ठित पत्रिका 'परिंदे' की सहायक संपादक भी हैं. ***** शालू शुक्ला की तीन कविताएं *** 1- गाजा के एक बच्चे का संदेश इजराइल के लिए तुम्हारे सब कुछ खत्म करने के बाद भी बचा रह जायेगा बहुत कुछ जैसे-वे सारे दृश्य जिन्हें देखने से पहले जंग का निवाला बन गए मासूम बच्चे वही बच्चे रंग-बिरंगे फूल बनकर उग आयेंगे कब्र पर जिन पर मंडरायेंगी तितलियां,गायेंगे भौंरे इस तरह बचा रहेगा जीवन वे स्त्रियाँ जिनकी देह पर लड़े गये युद्ध चिड़िया बनकर अपनी हौसलामन्द उड़ानों से दाखिल होंगी तुम्हारे शहर में उनके शोकगीत पर व्याकुल हो रो उठेगा तुम्हारा शहर इस तरह बची रहेगी करुणा वही चिड़िया अपने नाज़ुक किन्तु विश्वास भरे कदमों से कुचल देंगी तुम्हारी क्रूरता इस तरह बचेगी मनुष्यता मारे गए तमाम बुज़ुर्गों के सपनों पर लहलहायेंगे संभावनाओं के पौधे फिर से शुरु होगा जीवन बचा रहेगा प्रेम। ***** 2-हाउस वाइफ औरतें हम हाऊस वाइफ औरतें हैं हम कोई काम नहीं करतीं हमारा नाम आधार कार्ड के सिवा कहीं दर्ज नहीं है हम सबसे बाद में सोने और सबसे पहले जागने वाली औरतें हैं चूल्हे पर रींधते भात के साथ अपने सपनों को पकानेवालीं आटे की लोई में दुखों को छुपानेवालीं औरतें हैं पहली पंक्ति हमारी किस्मत में नहीं सबको खाना खिलाने के बाद अपने खाने के बीच से उठकर हम फिर से खाना बनानेवालीं औरतें हैं आधी रात को बड़े बुजुर्गों को वाशरूम ले जानेलीं अल्लसुबह बच्चों को दूध पिलाने वाली औरतें हैं हम गानें के बीच रोने और रोने के बीच गाने वाली औरतें हैं हम हर एक के लिए हर समय उपस्थित रहनेवालीं खैरात में आई हुई औरतें हैं हमारे हिस्से में कोई इतवार ई एल,सी एल, कोई मेडिकल नहीं हमारी किस्मतें जूतों की पालिश से चमकती हैं हम जेठ की दुपहरी में खसखस माघ की सर्द रात में अलाव - सी जलनेवालीं औरतें हैं हम गृहस्थी का वह नमक थीं जिसके बिना हर स्वाद फीका रहा फिर भी ख़ास मौकों पर एक कोने में गलनेवालीं औरतें हैं हम कविता लिखने के योग्य नहीं हमें पुरस्कार लेने का कोई हक़ नहीं हमारा परिचय देते हुए शर्म आती है हमारे पतियों और बच्चों को हम हाऊस वाइफ औरतें हैं हम कुछ नहीं करतीं हमसे कुछ नहीं होता क्योंकि हम नकारा हैं हाउस वाइफ औरतें.... ***** 3- बैरंग चिट्ठियां पीड़ाओं में डूबी हर दोपहरी ईश्वर का डाकिया डाल जाता है कुछ बैरंग चिट्ठियां होते है उनमें स्वर्ग नर्क के ब्योरे ज़ख्मों से भरी शामें भीगती हैं वे नमक में विरह भरी रातों में तकिये में सिमट आता समंदर हर सुबह झाड़ू से बुहारती हूं पिछले दिनों के दुःख घाव पर सरपट दौड़ते हैं सूर्य के घोड़े रोज लौट आता है दुःख रोज लौट आती है रात रोज लौट आती है सुबह रोज ही लौट आता है सूर्य फिर कभी नहीं लौटे तुम एक बार जाने के बाद तुम्हारे प्रेम से वंचित मैं रह जाऊंगी मनुष्यता से एक कदम पीछे हमेशा के लिए। ***** Subscribe and Support Baat-Bebat 🎙️ New to streaming or looking to level up? Check out StreamYard and get $10 discount! 😍 https://streamyard.com/pal/d/55807359...