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हिंदी अर्थ - यहाँ राजा दुष्यंत उदास है , उसने वसंतोत्सव स्थगित कर दिया है और इन फूल पत्तियों ने भी उनकी आज्ञा का पालन किया है ये देखो, कुरबक का फूल खिलना ही चाहता था, पर अभी भी उसकी कली उमली नहीं है ठंड गुजरने के बाद भी कोयल का स्वर कंठ तक आकर रुक सा गया है ऐसा लग रहा है, मानो कामदेव भी अपने तूणीर से आधा बाण निकालते है और फिर डर के मारे उसी में रख देते है अब राजा के मन को न तो कोई सुंदर वस्तू भाती है और न वे पहले के समान मंत्रियो से चर्चा करते दिखते है शय्या पे करवट बदलते हुए वे जागते हुए ही रात बिता देते है रनिवास की रानियाँ जब उनसे उदासी का कारण पूछती है, तब भूल से उनके मुँह से शकुंतला का नाम निकल जाता है और वे बड़ी देर तक लाज के मारे चुप रह जाते है राजा ने केवल बाये हाथ के सोने के एक भुजबन्द के सिवाय सब अलंकार उतार दिये है, उनकी उसाँसो से नीचे का ओठ लाल हो गया है, चिंता और जागरण के कारण उनकी आँखे अलसायी हुई है किन्तु इतना दुखी होने पर भी वे उसी प्रकार दुर्बल नहीं लगते जैसे खराद पर चढ़ाकर काटा हुआ महामणि छोटा हो जाने पर भी अपनी चमक के कारण छोटा नहीं लगता This video is inspired from the indian culture and historical learnings in sanskrit literature as part specific literature playlist. Subscribe to our channel if you also love the flavors of indian culture. Stay tuned !