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हिंदी अनुवाद - ऐसा सुना है की उर्वशी मंत्रीगण पे राज्य का कारोबार छोड़के राजा के साथ घुमने के लिए गंधमादन पर्वत पर गई है इसे ही तो सुख भोग कहते है, जो ऐसी सुंदर जगहों पर किया जाए तब वहां मंदाकिनी नदी के तट पर वालू के टीले बनाते हुई उर्वशी देखती है कि राजा उदयवती की ओर आकर्षित हो गए है, जो विद्याधर की कन्या है और इस कारण उर्वशी रुठ गई है हो ही सकता है, क्योंकि जब किसी व्यक्ति से विशेष लगाव हो, तो ऐसी बाते सहन नहीं होती और ये जो सुवर्ण के भांति चमकने वाली बिजली है, मेरी प्रिय उर्वशी तो नहीं ही नहीं तब वो (उर्वशी) राजा के प्रति अनुराग भूलकर भरत मुनि के शाप से प्रभावित उस कुमार वन में चली गई जहां स्त्रियों का जाना निषिद्ध है और वहां जाते ही वो बेल में परिवर्तित हो गई सच में, भाग्य का लिखा अटल होता है, नहीं तो कहा पर वो अटूट प्रेम और कहा उसके विपरीत परिणाम अब उन राजर्षी की क्या अवस्था है? (कैसे है वो अभी?) वो अहो रात्रि वन में अपने प्रियतमा को ढूंढ रहे हैं और उसमें ये काले घने मेघ उनकी उत्कंठा और बढ़ा रहे है अपनी सखी के विरह में सरोवर में दो हंसिनी सिसक रही है अच्छे दिखने वाले लोग ज्यादा समय तक दुःख नहीं सहते है, अवश्य ही कोई निमित्त से उनका समागम हो जाएगा, चलो सूर्य को अर्घ्य देते है अपनी सखी की याद में घूमती हुई ये हंसिनिया सरोवर में घूम रही है जहां सुंदर कमल पुष्प खिले हुए हैं वैसे ही ये गजेंद्र हाथी देखो, जो अपनी प्यारी के विरह में विदुर अपने अंगों पे फूलों कलियों को सजाकर अपनी मानसिक पीड़ा जाहिर कर रहा है तब वहां आकाश की ओर देखते हुए बेचैन (अस्वस्थ) मन से ढूंढते हुए राजा प्रवेश करते है अपनी प्रियतमा के विरह के दुःख में चूर हंस अपने पंखों को फड़ फड़ाकर अपनी अवस्था बता रहा है तब आकाश की तरफ पत्थर फेंकने और पुनः वास्तविकता से दयावश होता हुआ राजा दिखाता है अच्छा तो ये दुष्ट राक्षस नहीं हैं जो मेरी प्रिया को अपहरण करके ले जा रहे है, ये तो काले घने मेघ हैं और ये इंद्रधनु जो मुझे धनुष लगा जिसमें पानी की वर्षा हो रही है ना की बाणों की और ये सुवर्ण जैसी चमकने वाली बिजली है मेरी उर्वशी नहीं This video is inspired from the indian culture and historical learnings in sanskrit literature as part specific literature playlist. Subscribe to our channel if you also love the flavors of indian culture. Stay tuned !