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🙏 "क्या आपने कभी शून्य की गूँज सुनी है? जहाँ अंत ही आरंभ है... और मौन ही शिव है।" Welcome to a journey into the heart of Shambhu. This is not just a bhajan; it is a sonic bridge between the physical world and the eternal void (Shunya). The Experience: We begin with an invocation, inviting you into the 136.1 Hz 'Earth Om' frequency. As the Bansuri and Deep Cello ground your nervous system, the bhajan unfolds—moving from the sacred ash (Bhasma) of the physical realm to the soaring, ecstatic heights of Kailash. LYRICS भस्म विलेपित, शुभ्र शरी-रम्, शम-शान के वासी, ग-हन ग-म्भीरम्। चन्द्र सुशोभित, जटा वि-शा-लम्, मुण्डमाल धर, व्या-घ्र-म्बा-रम्॥ शम्भू! शम्भू! अन्तरयामी, त्रैलोक्य के, तुम ही स्वामी। शम्भू! शम्भू! नील-कण्ठ धा-री, हर लो विपदा, सं-कट-हा-री॥ गंगा की धारा, शीश विराजे, डमरू की ध्वनि, नभ में गाजे। सर्प गले में, सोहे काला, त्रयम्बक विश्व, ज्योति का जाला॥ अगम अगोचर, रक्षक दाता, तुम ही विधाता, तुम ही पिता-ता। काम-देव जला, भस्म बनाया, शू-न्य से सबकुछ, तुमने रचाया॥ अघोर रूपी, भक्त परिपाल, महादेव तुम, काल के भी काल। शून्य में शिव है, शिव में है शून्य, पावन करे जो, हमारे पुण्य॥ शम्भू! शम्भू! अन्तरयामी, त्रैलोक्य के, तुम ही स्वामी। शम्भू! शम्भू! नील-कण्ठ धा-री, हर लो विपदा, संकटहारी॥ पञ्च-तत्व के, तुम ही ज्ञाता, मुक्ति मार्ग के, तुम ही विधाता। हृदय में बसकर, दीप जलाओ, शिवमय हमको, प्रभु बनाओ॥ जय-जय त्रिलोकी! जय-जय कैलाशा! तुम ही अनादि, तुम ही प्रकाशा! त्रिशूल धारी! त्र्यम्बक रूपा! महादेव! महादेव! मंगल भूपा! [Climax] महादेव! महादेव! महादेव! [Outro] ॐ नमः शिवाय... ॐ नमः शिवाय... Production Highlights by @namahstutistudio: Innocent, pure, and soaring devotional vocals. 432 Hz Tuning: Harmonic alignment for DNA and Cellular repair. Dual Frequency: Layered with 136.1 Hz (Om Resonance). Type "NAMAH" to activate your inner light. 👇 #Shambhu #Mahadev #432Hz #VedicFuturism #Namahstuti #ShivaBhajan #mahadev MeditationFrequency #zeropoint