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नर्मदा किनारे भट्याण बुजुर्ग आश्रम के संतश्री सियाराम बाबा है। 105 साल की उम्र में भी वे सारे कामकाज खुद ही कर रहे हैं। वे आश्रम में पहुंचने वाले भक्तों की प्रसादी व चाय की व्यवस्था खुद कर रहे हैं। तबीयत बिगड़ने पर उन्होंने इलाज लेने से भी इनकार कर दिया। भक्तों के आग्रह पर उन्होंने स्थानीय डॉक्टरों से ही इलाज लिया। वे श्रीरामचरितमानस पढ़ रहे हैं। भट्याण बुजुर्ग में गुरु पूर्णिमा पर संत सियाराम बाबा का पूजन करने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे। भंडारे के साथ महाआरती होगी। श्री सियाराम बाबा ने 12 साल का मौन व्रत धारण किया था। कोई नहीं जानता था बाबा कहां से आए हैं। बाबा ने मौन व्रत तोड़ा और पहला शब्द सियाराम बोले तब से गांव वाले उनको सियाराम बाबा कहते हैं। मुकुंद केवट, राजेश छलोत्रा, पूनमचंद बिरले, हरीश बिरले के अनुसार बुजुर्ग बताते है बाबा 50-60 साल पहले यहां आए थे। कुटिया बनाई आैर रहने लगे। हनुमानजी की मूर्ति स्थापित कर सुबह-शाम राम नाम का जप व रामचरितमानस पाठ करते थे। उनकीी उम्र के बारे कोई नहीं जानता। कोई उनकी उम्र 80, तो कोई 130 साल बताता है। बाबा का जन्म मुंबई में हुआ। वहीं कक्षा 7-8 तक पढ़ाई हुई। कम उम्र में एक गुजराती साहूकार के यहां मुनीम का काम शुरू किया। उसी दौरान कोई साधु के दर्शन हुए। मन में वैराग्य व श्रीराम भक्ति जागी। घर-संसार त्यागा और तप करने हिमालय चले गए। कितने साल कहां तप किया, उनक गुरु कौन थे कोई नहीं जानता। बाबा ने यह किसी को नहीं बताया। आज भी पूछने पर एक ही बात कहते हैं मेरा क्या है, मैं तो सिर्फ मजा देखता हूं’। ग्राम के रामेश्वर बिरले व संतोष पटेल ने बताया बाबा रोज नर्मदा स्नान करते हैं। नर्मदा परिक्रमा करने वालों की सेवा खुद करते हैं। सदाव्रत में दाल, चावल, तेल, नमक, मिर्च, कपूर, अगरबत्ती व बत्ती भी देते हैं। जो भी भक्त आश्रम आता है बाबा अपने हाथों से चाय बनाकर पिलाते हैं। कई बार नर्मदा की बाढ़ की वजह से गांव के घर डूब जाते हैं। ग्रामीण ऊंची सुरक्षित जगह चले जाते है। लेकिन बाबा अपना आश्रम व मंदिर छोड़कर कहीं नहीं जाते। बाढ़ के दौरान मंदिर में बैठकर रामचरितमानस पाठ करते हैं। बाढ़ उतरने पर ग्रामीण उन्हें देखने आते हैं तो कहते हैं मां नर्मदा आई थी। दर्शन व आशीर्वाद देकर चली गई। मां से क्या डरना, वो तो मैय्या है। पीपलगोन में तैयार हो रहा आश्रम- भट्याण बुजुर्ग स्थित आश्रम महेश्वर हायडल परियोजना के डूब क्षेत्र में है। इसे देखते हुए पीपलगोन में लौंदी रोड पर बाबा का नया आश्रम तैयार हो रहा है। भट्याण आश्रम के डूब में जाने के बाद बाबा यहां आएंगे। ज्ञात हो भट्याण बुजुर्ग के साथ नागलवाड़ी शिखरधाम से भी लगाव होने से वे भीलट देव दर्शन को जाते रहते है। हर साल 25 हजार रुपए भेंट करते हैं। इस वर्ष उन्होंने नर्मदा किनारे स्थित आश्रम की डूब के मुआवजे के रूप में मिले 2 करोड़ 57 लाख रुपए घाट पर सीमेंटीकरण, मार्ग में बारिश से बचाव के लिए सेड बनवाने आदि के लिए दिए।