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गाथा श्री प्राचीन तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर - कनखल (हरिद्वार) For All Pujas Contact or Whatsapp +91-7465839601 or visit https://himalayavedicworld.com भारत की परम पावन तीर्थनगरी मायापुरी अंतर्गत प्रजापति दक्ष की यज्ञस्थली कनखलनगरी हरिद्वार के मध्यभाग में भागीरथी नदी के पश्चिम तट पर स्थित है अतिप्राचीन सतयुगीन सिद्धपीठ तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर। जब दक्षप्रजापति के यज्ञ विध्वंस, भगवान शिव व सती के अपमान, वीरभद्र द्वारा दक्ष का वध,तथा सती का देहत्याग आदि का समाचार समस्त लोकों में आग की भांति फैल गया, सभी देवगण में भय व्याप्त हो गया । यज्ञ के विध्वंस, यजमान तथा याज्ञीकों की हानिसूचक अमंगल से भविष्य में यज्ञादि शुभ कार्यों के प्रति अनास्था की भावना से क्षुभित होकर देवगण ब्रम्हाजी की शरण में गये । तब भगवान विष्णु के साथ ब्रह्माजी व् इन्द्रादि देवताओं ने कैलाश पहुंचकर भगवान की स्तुति की । भगवान विष्णु व् ब्रह्माजी के अनुरोध पर भगवान शिव सभी देवताओं के साथ दक्षप्रजापति की निवासस्थली कनखल में पधारे, उस समय कनखल में सभी ओर भय, आतंक क कारण सन्नाटा छाया हुआ था । यह घटना सृस्टि के आदिकाल की है । कैलाश गमन का वर्णन करते समय महर्षि वेदव्यास ने अलकापुरी, सौगन्धिक वन तथा नन्दा, अलकनन्दा, नामक नदियों का उल्लेख भी किया है भगवान शिव अलकनन्दा, नन्दा के पश्चिम तट पर कनखल के मध्य भाग में एक टीले पर सूक्ष्मरूप में अवतरित होकर शनैः - शनैः सामान्य शरीर को प्राप्त हुए, उस समय वहां पर चारों ओर दूर - दूर तक यज्ञ के पात्र, भोजन के भाण्ड, तिल, यव,घृत, मिष्ठान, मेवा आदि बिखरे पड़े थे । तिल, जौ आदि के समूह में सूक्ष्म रूप से अवतरित भगवान शिव का प्रथम दर्शन तिल समान अवभासित होकर शनैः - शनैः वर्धमान होने के कारण वे ' तिलवर्धनेस्वर ' नाम से प्रसिद्ध हुए तथा वही पर सभी देवगन, यज्ञ - पुरोहित आदि उद्गाता ऋषिगण ने भगवान शिव की स्तुति कर उनसे दक्ष प्रजापति को जीवनदान, भृगु आदि ऋषियों को क्षमादान कर दक्ष यज्ञ का पारायण कराने हेतु प्रार्थना की । इसी स्थान पर भगवान शंकर को प्राप्त करने के लिए सती द्वारा पूजा भी की गयी थी । तत्पश्चात भगवान शिव, ब्रह्मा, विष्णु तथा इन्द्रादि देवताओं ने दक्ष प्रजापति के शरीर पर बकरे का सिर जोड़कर 'अजशीर्ष' नाम देकर भृगु आदि ऋषियों के शरीर के क्षति को पूर्णता प्रदान यज्ञ संपन्न कराया । उसी स्थान पर दक्ष प्रजापति मंदिर आज भी विधमान है तथा मध्य भाग पर गंगा तट के समीप तिलभाण्डेश्वर महादेव का विशाल लिंग विग्रह से सुशोभित वर्तमान मंदिर जन सामान्य की आस्था का प्रतीक बन गया है । तिलभाण्डेश्वर भगवान शिव के लिंग्डविग्रह के विषय में जनसामान्य में अनेक चर्चायें प्रचलित हैं । सर्वमान्य बात यह है कि यह शिव लिंग्ड प्रत्येक मास के शुक्ल पक्ष में एक तिल बढ़ता है तथा कृष्ण पक्ष में एक तिल घट जाता है, अनेक भक्त इस विषय में स्वानुभूत प्रमाण भी देते हैं कि मैंने शुक्ल प्रतिपदा को भगवान तिलभाण्डेश्वर का अभिषेक कर यज्ञोपवीत अर्पित किया । उस समय यज्ञोपवीत लिंग पूरी तरह सामान्य रूप से कसकर व्याप्त था किन्तु पूर्णिमा को प्रातः काल दर्शन करने पर पाया कि यज्ञोपवीत स्वतः टूट गया था, अर्थात शिव लिंग की वृद्धि के कारण ही यज्ञोपवीत क्षय हो गया । सन १९७० के लगभग यह मंदिर एक वृद्ध साधु की देख-रेख में था । मंदिर पूर्णतया उपेक्षित था। इसकी दशा को सुदृढ़ करने हेतु प्रबुद्ध भक्तजनो ने श्री त्रिवेणीदास जी महाराज से मंदिर की देख - रेख, पूजा - अर्चना का दायित्व संभालने की प्रार्थना की तथा उन्होंने स्वदीक्षा गुरु पूज्यपाद तपोमूर्ति श्रीमहंत हंसदास जी महाराज, ( पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन, हरिद्धार ) से आज्ञा ग्रहण कर यहां का दायित्व सम्भाला, सन १९७२ से ही जनसामान्य के सहयोग से सर्वप्रथम मंदिर के गर्भगृह का जीर्णोद्धार, मंदिर परिक्रमा का निर्माण किया गया व् विशाल सभागार, मंदिर परिसर में यज्ञशाला, शिवशक्ति परिवार, भगवान लक्ष्मीनारायण मंदिर की स्थापना की गयी थी । सन १९९८ मंदिर ट्रस्ट की स्थापना की गई । वर्तमान समय में वैदिक सनातन धर्म के प्रचारार्थ तथा वैदिक संस्कारादि, पूजा अर्चना, यज्ञानुष्ठान आदि के सुव्यवस्थित स्वरूप की रक्षा एंव शिक्षा हेतु श्री हंस कर्मकाण्ड प्रशिक्षण केंद्र का संचालन तीथयात्रियों के निशुल्क भजन, आवास, भोजन व्यवस्था तथा धार्मिक यज्ञानुष्ठान के द्वारा सनातन धर्म का प्रचार कर निर्धन विद्याथियों की निशुल्क शिक्षा, आवास, भोजन, चिकित्सा आदि की सेवा प्रदान करना, साथ ही धर्म प्रचार के माध्यम से निःसहाय विकलांग आदि को अन्नक्षेत्र के माध्यम से सेवा की जाती है । Subscribe Now - More Videos • Sacred Himalayan Institute of Vedic Allian... #TilBhandeshwarTemple #तिलभांडेश्वरमहादेवमंदिर About us:- SHIVA (Sacred Himalayan Institute of Vedic Alliance) Trust, which came into existence on May 7, 2012 under the Indian Trust Act 1882. The trust circumambulates to enhance social upliftment, spiritual enlightenment, as well as, societal and charitable elevation. Our intention is to enlighten the universe with the unseen and unexperienced passages of spirituality. Through our Vedic services, we intend to offer the devotees like us with all-absolute & divine experiences. Our Websites :- https://www.himalayavedicworld.com https://www.shiva.org.in https://www.vedicpuja.org Contact :- +91-7465839601 , +91-9760678037 Whatsapp :- +91-7465839601