У нас вы можете посмотреть бесплатно Hindi Grammar KRIYA | सकर्मक और अकर्मक क्रियाओं की पहचान | [रचना के आधार पर क्रिया के भेद] или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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शब्द भेद हिंदी व्याकरण : • शब्द भेद हिंदी व्याकरण | तत्सम और तद्भव | ... शब्द , पद और पदबंध : • Shabd pad aur padbandh class 10 - [शब्द , ... संज्ञा के भेद : • Sangya in Hindi Grammar | संज्ञा के भेद | ... क्रिया जिस शब्द से किसी काम का करना या होना समझा जाए , उसे ‘क्रिया’ कहते हैं | जैसे - पढ़ना , खाना , पीना , जाना आदि | क्रिया विकारी शब्द है , जिसके रूप लिंग , वचन और पुरुष के अनुसार बदलते हैं | धातु - क्रिया के मूल रूप को धातु कहते हैं | तात्पर्य यह है कि जिन मूल अक्षरों से क्रियाएँ बनती है , उन्हें ‘धातु’ कहते हैं ; जैसे – पढ़ ( मूल धातु ) + ना (प्रत्यय ) चल ( मूल धातु ) + ना (प्रत्यय ) धातु के भेद 1 मूल धातु – मूल धातु स्वतंत्र होती है | यह किसी प्रत्यय या दूसरे शब्द पर आश्रित नहीं होती ; जैसे – खा , पी , देख आदि | 2 यौगिक धातु – सामान्य भाषा में इसे क्रिया कहते हैं | यह स्वतंत्र नहीं है | मूल धातु में मूल धातु या प्रत्यय को जोड़ने से यौगिक धातु बनती है | यौगिक धातु तीन प्रकार से बनती है - (क) मूल धातु + मूल धातु = यौगिक धातु जैसे – हँस + दे = हँस देना बैठ + जा = बैठ जाना (ख) मूल धातु + प्रत्यय = यौगिक धातु जैसे - जग + ना = जगना ( अकर्मक क्रिया ) जग + आना = जगाना ( सकर्मक क्रिया ) जग + वाना = जगवाना ( प्रेरणार्थक क्रिया ) (ग) संज्ञा / सर्वनाम / विशेषण + प्रत्यय = यौगिक धातु कर्म के आधार पर क्रिया के भेद क्रिया सकर्मक क्रिया अकर्मक क्रिया एककर्मक द्विकर्मक सकर्मक क्रिया (Transitive Verb ) – ‘सकर्मक क्रिया’ उसे कहते हैं , जिसका कर्म हो या जिसके साथ कर्म की संभावना हो , अर्थात जिस क्रिया के व्यापार का संचालन तो कर्ता से हो , पर जिसका फल या प्रभाव किसी दूसरे व्यक्ति या वस्तु अर्थात कर्म पर पड़े | जैसे – सीता आम खाती है | यहाँ ‘सीता’ कर्ता है और सीता के खाने का फल ‘आम’ पर पड़ता है | आम कर्मकारक है , अत: ‘खाना’ क्रिया सकर्मक है | कभी – कभी सकर्मक क्रिया का कर्म छिपा रहता है ; जैसे – राम पढ़ता है , राम गाता है | यहाँ ‘पुस्तक’ और ‘गीत’ कर्म छिपे हैं | अकर्मक क्रिया ( Intransitive Verb ) – जिन क्रियाओं का व्यापार और फल कर्ता पर हो , वे ‘अकर्मक क्रिया’ कहलाती हैं | जैसे – राम सोता है | ‘राम’ कर्ता है , ‘सोने’ की क्रिया उसी के द्वारा पूरी होती है | अत: सोने का फल भी उसी पर पड़ता है | इसलिए , ‘सोना’ क्रिया अकर्मक है | Web Search: #HindiGrammarB2A #hindigrammerb2a