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मैं तो होरी खेलन जाऊँ मेरी बीर नांय माने मेरो मनुवा। होरी को अलबेलो छैला, मैं तो वाते नेह लगाऊँ मेरी बीर। भर पिचकारी रंग की मारूँ, मैं तो अबीर गुलाल उड़ाऊँ मेरी बीर। ऐसो रंग डारूँ कारे पै, मैं तो गोरो आज बनाऊँ मेरी बीर। दै गुलचा सीधो कर डारूँ, मैं तो सबरी टेढ़ निकालूँ मेरी बीर। चीर हरन को बदलो लूँगी, मैं तो पीताम्बर छुड़ाऊँ मेरी बीर। हरि को नंगो कर होरी में, मैं तो नैनन नैन लड़ाऊँ मेरी बीर। 1. मैं तो होरी खेलन जाऊँ मेरी बीर नांय माने मेरो मनुवा। अर्थ: हे सखी (बीर)! मैं तो होली खेलने ज़रूर जाऊँगी, क्योंकि मेरा मन (मनुवा) अब मेरी बात नहीं मान रहा है। वह कृष्ण के साथ होली खेलने के लिए व्याकुल है। 2. होरी को अलबेलो छैला, मैं तो वाते नेह लगाऊँ मेरी बीर। अर्थ: होली का वह छैला (कृष्ण) बहुत ही अनोखा और सुंदर है। हे सखी! मैंने तो उसी से प्रेम (नेह) लगा लिया है। 3. भर पिचकारी रंग की मारूँ, मैं तो अबीर गुलाल उड़ाऊँ मेरी बीर। अर्थ: मैं पिचकारी में रंग भरकर उन पर छोडूूँगी और चारों तरफ अबीर-गुलाल उड़ाकर पूरे माहौल को रंगीन कर दूँगी। 4. ऐसो रंग डारूँ कारे पै, मैं तो गोरो आज बनाऊँ मेरी बीर। अर्थ: कृष्ण का रंग सांवला (काला) है। गोपी कहती है कि आज मैं उस काले (कृष्ण) पर ऐसा रंग डालूँगी कि उन्हें भी गोरा बना दूँगी (यानी उन्हें पूरी तरह सफेद गुलाल से ढंक दूँगी)। 5. दै गुलचा सीधो कर डारूँ, मैं तो सबरी टेढ़ निकालूँ मेरी बीर। अर्थ: (यहाँ 'गुलचा' का अर्थ गाल पर प्यार भरी थपकी या हल्का मुक्का है)। गोपी कहती है कि मैं उन्हें हल्का सा गुलचा (चपत) मारकर सीधा कर दूँगी और उनकी सारी अकड़ (टेढ़/चतुराई) निकाल दूँगी। 6. चीर हरन को बदलो लूँगी, मैं तो पीताम्बर छुड़ाऊँ मेरी बीर। अर्थ: जब कृष्ण ने गोपियों के वस्त्र (चीर) चुराए थे, आज मैं उस बात का बदला लूँगी। मैं आज उनका पीला वस्त्र (पीताम्बर) उनसे छीन लूँगी। 7. हरि को नंगो कर होरी में, मैं तो नैनन नैन लड़ाऊँ मेरी बीर। अर्थ: होली के इस हुड़दंग में, उनका पीताम्बर (ऊपरी वस्त्र) हटाकर, मैं उनसे आँखें मिलाऊँगी (प्रेम भरा संवाद करूँगी)। यह कृष्ण और भक्त के बीच के उस निश्छल प्रेम को दर्शाता है जहाँ कोई पर्दा नहीं रहता। meto hori khelan javungi naaymane mero manuva hori rasia-03-20-201#vrindavanrassiddhan#babamaharaj