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कार्बोनिल समूह(C=O)की प्रकृति और क्रियाशीलता Nature of carbonyl group (C=O) by AnilSir semes2 Paper2 कार्बोनिल समूह (C=O) एक प्रमुख कार्यात्मक समूह है जो कार्बनिक रसायन में व्यापक रूप से पाया जाता है। इसमें कार्बन और ऑक्सीजन के बीच एक डबल बॉन्ड होता है। इसकी विशेषताएँ और क्रियाशीलता कई कारकों पर निर्भर करती हैं, जैसे कि संरचनात्मक विशेषताएँ, इलेक्ट्रॉनिक प्रभाव, और संयोगित संरचनाएँ। यहाँ कार्बोनिल समूह की प्रकृति और क्रियाशीलता का विस्तृत विवरण प्रस्तुत है: 1. कार्बोनिल समूह की संरचना: **डबल बॉन्ड (C=O)**: कार्बन और ऑक्सीजन के बीच एक डबल बॉन्ड होता है, जिसमें एक सिग्मा बॉन्ड और एक पाइ बॉन्ड शामिल होता है। **हाइब्रिडाइजेशन**: कार्बन sp2 हाइब्रिडाइजेशन में होता है, जबकि ऑक्सीजन में भी sp2 हाइब्रिडाइजेशन होता है। **बॉन्ड एंगल**: कार्बनिल कार्बन का बॉन्ड एंगल लगभग 120° होता है। 2. इलेक्ट्रॉनिक गुण: **ध्रुवीयता (Polarity)**: कार्बोनिल समूह एक ध्रुवीय समूह है क्योंकि ऑक्सीजन अधिक इलेक्ट्रोनगेटिव है और कार्बन से इलेक्ट्रॉनों को अपनी ओर आकर्षित करता है। इससे कार्बन पर आंशिक धनात्मक आवेश (δ+) और ऑक्सीजन पर आंशिक ऋणात्मक आवेश (δ-) उत्पन्न होता है। **रेज़ोनेंस (Resonance)**: कार्बोनिल समूह रेज़ोनेंस संरचनाएँ दिखा सकता है, जो इसकी स्थिरता और क्रियाशीलता को प्रभावित करती हैं। 3. क्रियाशीलता (Reactivity): **न्यूक्लियोफिलिक अभिक्रियाएँ**: कार्बोनिल समूह न्यूक्लियोफिलिक हमलों के लिए संवेदनशील होता है। न्यूक्लियोफिल कार्बन पर हमला करता है, जिससे कार्बोनिल का रिंग ओपनिंग होता है। उदाहरण: न्यूक्लियोफिलिक एडिशन रिएक्शन, जैसे एल्डोल रिएक्शन। **इलेक्ट्रोफिलिक अभिक्रियाएँ**: यद्यपि कार्बोनिल समूह न्यूक्लियोफिलिक हमलों के प्रति अधिक संवेदनशील होता है, कुछ परिस्थितियों में यह इलेक्ट्रोफिलिक हमलों के प्रति भी प्रतिक्रिया कर सकता है। **ऑक्सीकरण और अपचयन**: कार्बोनिल समूह आसानी से ऑक्सीकरण और अपचयन प्रतिक्रियाओं में भाग ले सकता है। एल्डिहाइड्स का ऑक्सीकरण करके कार्बोक्सिलिक एसिड बनाया जा सकता है। कीटोन्स को अधिक मजबूत एजेंट्स के द्वारा ऑक्सीकरण किया जा सकता है। कार्बोनिल यौगिकों का अपचयन हाइड्रोजन और उपयुक्त कैटेलिस्ट के द्वारा अल्कोहल में किया जा सकता है। 4. भौतिक गुण: **उबलनांक**: कार्बोनिल यौगिकों का उबलनांक अल्केन्स की तुलना में अधिक होता है क्योंकि कार्बोनिल समूह ध्रुवीय होता है और डिपोल-डिपोल इंटरैक्शन दिखाता है। **घुलनशीलता**: छोटे कार्बोनिल यौगिक पानी में घुलनशील होते हैं, लेकिन बड़े कार्बोनिल यौगिक जल में कम घुलनशील होते हैं। 5. विशिष्ट अभिक्रियाएँ: **क्लेसन रिएक्शन**: एस्टर्स के बीच न्यूक्लियोफिलिक संयोजन। **कैनिज़ारो रिएक्शन**: गैर-एन्फ्रोटिक एल्डिहाइड्स का रेडॉक्स रिएक्शन। **बायर्स-विलिगर ऑक्सीकरण**: कीटोन्स का कार्बोक्सिलिक एसिड में रूपांतरण। सारांश: कार्बोनिल समूह की रासायनिक क्रियाशीलता और भौतिक गुण इसकी संरचना, इलेक्ट्रॉनिक वितरण और रेज़ोनेंस प्रभावों पर निर्भर करते हैं। इसकी ध्रुवीयता और इलेक्ट्रोफिलिक प्रकृति इसे न्यूक्लियोफिलिक अभिक्रियाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बनाती है, जो कार्बोनिल यौगिकों की विविध रासायनिक प्रतिक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह जानकारी सेमेस्टर 2 के पेपर 2 के लिए एक ठोस आधार प्रदान करती है, और छात्रों को कार्बोनिल यौगिकों की गहरी समझ हासिल करने में मदद करती है।