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पौधों में लैंगिक जनन (Sexual Reproduction in Plants) पौधों में लैंगिक जनन वह प्रक्रिया है जिसमें नर और मादा युग्मकों (gametes) का मिलन होता है, जिससे नया पौधा उत्पन्न होता है। अधिकांश फूल वाले पौधों (आवृतबीजी पौधे / Flowering plants) में यह प्रक्रिया पुष्प (फूल) के माध्यम से होती है। संतति में आनुवंशिक विविधता आती है, इसलिए यह पर्यावरण के बदलाव के लिए फायदेमंद होता है। मुख्य विशेषताएँ दो माता-पिता (नर और मादा भाग) की आवश्यकता होती है। नर युग्मक → परागकण (pollen grain) से बनता है। मादा युग्मक → अंडकोशिका (egg cell) से बनता है। निषेचन (fertilization) के बाद बीज बनता है, जो नया पौधा उगाता है। संतति जनक से पूरी तरह समान नहीं होती (आनुवंशिक भिन्नता होती है)। पुष्प के मुख्य भाग (लैंगिक जनन के लिए महत्वपूर्ण) पुंकेसर (Androecium) → नर जनन अंग परागकोश (anther) में परागकण बनते हैं। परागकण में नर युग्मक (शुक्राणु कोशिकाएँ) होते हैं। स्त्रीकेसर (Gynoecium) → मादा जनन अंग तीन भाग: वर्तिकाग्र (stigma), वर्तिका (style), अंडाशय (ovary) अंडाशय में बीजाण्ड (ovule) होते हैं। बीजाण्ड में अंडकोशिका (egg cell) बनती है। लैंगिक जनन की मुख्य प्रक्रियाएँ (चरणबद्ध तरीके से) परागकण का निर्माण (Microsporogenesis) परागकोश में परागकण मातृ कोशिका से अर्धसूत्रण (meiosis) द्वारा परागकण बनते हैं। परागण (Pollination) परागकण वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं। स्व-परागण (Self-pollination): उसी पुष्प या उसी पौधे के दूसरे पुष्प में। पर-परागण (Cross-pollination): अलग पौधे पर (ज्यादा विविधता के लिए बेहतर)। माध्यम: हवा, कीड़े, पानी, पक्षी आदि। पराग नलिका का निर्माण परागकण वर्तिकाग्र पर अंकुरित होता है → पराग नलिका (pollen tube) बनती है → वर्तिका से होकर अंडाशय तक जाती है। निषेचन (Fertilization) आवृतबीजी पौधों में द्वि-निषेचन (Double fertilization) होता है (विशेषता!)। एक शुक्राणु कोशिका → अंडकोशिका से मिलकर युग्मज (zygote) बनाती है → भ्रूण बनेगा। दूसरी शुक्राणु कोशिका → केंद्रीय कोशिका से मिलकर त्रिगुणक अंतःबीजपोष (endosperm) बनाती है, जो भ्रूण को पोषण देता है। बीज और फल का निर्माण युग्मज → भ्रूण → बीज बनता है। अंडाशय → फल में बदल जाता है। बीज अंकुरित होकर नया पौधा बनाता है। लाभ आनुवंशिक विविधता → नए गुणों का विकास → रोग/पर्यावरण प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। बीज लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं और दूर तक फैल सकते हैं। उदाहरण आम, गुलाब, टमाटर, धान, गेहूं आदि सभी फूल वाले पौधों में यही प्रक्रिया होती है।