У нас вы можете посмотреть бесплатно साधक पुरुष, सिद्ध पुरुष और परमात्मा के निमित्त सारी क्रिया लोक संग्रह - स्वामी यादवेन्द्राचार्य जी или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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क्या आप इनमें से किसी एक बिंदु पर विस्तार से जानकारी चाहते हैं? लोकसंग्रह की भावना और उसके उद्देश्यों को तीन विशेष प्रकार १.साधक पिरुष इसका अर्थ है समाज के अलग-अलग वर्गों और विचारों के लोगों को एक साथ लाना। लोकसंग्रह का प्राथमिक कार्य ही बिखराव को रोककर एक सुदृढ़ संगठन बनाना है। २.सिद्ध पुरुष समाज में नैतिक मूल्यों, आदर्शों और अनुशासन को स्थापित करना। जब श्रेष्ठ पुरुष मर्यादा का पालन करते हैं, तो समाज उनका अनुसरण करता है और व्यवस्था बनी रहती है। ३.परमात्मा बिना किसी स्वार्थ के केवल समाज की भलाई के लिए कार्य करना। इसमें "आत्मनः मोक्षार्थं जगद्धिताय च" (अपनी मुक्ति और जगत के कल्याण) का भाव निहित होता है। मुख्य सूत्र: संगठन से शक्ति आती है। मर्यादा से शांति आती है। लोककल्याण से समृद्धि आती है। #LokSangrah #LokKalyan #SocialWelfare #CommunityService #SocialHarmony #SevaBhava #BhagavadGitaQuotes #KarmaYoga #Dharma #SelflessService #SpiritualWisdom #AncientWisdom #लोकसंग्रह #जनकल्याण #समाजसेवा #धर्म #कर्मयोग #निस्वार्थ_सेवा #UnityInDiversity #SocialUnity #BetterSociety #SocialImpact #NationBuilding #HumanityFirst