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Vakataka Dynasty (250 CE – 500 CE) प्राचीन भारत का एक शक्तिशाली राजवंश था, जिसने दक्षिण और मध्य भारत, विशेषकर विदर्भ (महाराष्ट्र) क्षेत्र पर शासन किया। इस वंश की स्थापना विन्ध्यशक्ति ने की और इसे सबसे अधिक शक्ति प्रवरसेन प्रथम के समय मिली। वाकाटक शासकों का गुप्त वंश से गहरा संबंध था। रुद्रसेन द्वितीय का विवाह प्रभावती गुप्ता (चन्द्रगुप्त द्वितीय की पुत्री) से हुआ, जिससे उत्तर और दक्षिण भारत के बीच राजनीतिक संबंध मजबूत हुए। इस वंश का सबसे बड़ा सांस्कृतिक योगदान अजंता गुफाओं की अद्भुत चित्रकला है, जो भारतीय कला का स्वर्णिम उदाहरण मानी जाती है। वाकाटक शासकों ने ब्राह्मण धर्म को संरक्षण दिया और प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया। 📌 मुख्य बिंदु: काल: 250 CE – 500 CE क्षेत्र: विदर्भ और मध्य भारत प्रमुख शासक: प्रवरसेन I, रुद्रसेन II उपलब्धि: अजंता गुफाओं का संरक्षण Chalukya Dynasty (6th – 12th Century CE) दक्षिण भारत का एक शक्तिशाली और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राजवंश था। इस वंश ने मुख्य रूप से कर्नाटक क्षेत्र में शासन किया और भारतीय मंदिर स्थापत्य कला को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। चालुक्य वंश की स्थापना पुलकेशिन I ने की, लेकिन इसे सबसे अधिक प्रसिद्धि पुलकेशिन II के समय मिली। पुलकेशिन II ने उत्तर भारत के सम्राट हर्षवर्धन को भी पराजित किया, जो उस समय की एक बड़ी ऐतिहासिक घटना मानी जाती है। इस वंश के शासन में बादामी गुफा मंदिर, पट्टडकल मंदिर समूह और ऐहोल के मंदिरों का निर्माण हुआ, जो आज UNESCO World Heritage Site के रूप में प्रसिद्ध हैं। 📌 मुख्य बिंदु: काल: 6वीं से 12वीं शताब्दी राजधानी: बादामी महान शासक: पुलकेशिन II उपलब्धि: अद्भुत मंदिर स्थापत्य (नागर और द्रविड़ शैली का संगम) 📚 इस टॉपिक की पूरी PDF Notes चाहिए? तो अभी हमारे TELEGRAM channel से जुड़ें 👇- 🔗Link:https://t.me/thePcsPathshala0810