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रात के ठीक ग्यारह बज रहे थे। कमरे में पंखा चल रहा था, लेकिन हवा नहीं थी— जैसे रिश्ते में अब सांस बची ही न हो। टेबल पर पड़े थे तलाक़ के काग़ज़ और पास में बैठा था रवि। तीस साल का रवि— आँखों में थकान, चेहरे पर चुप्पी, और दिल में एक ऐसा बोझ जिसे कोई देख नहीं सकता था। सामने खड़ी थी रीना। सजे हुए कपड़े, कड़े शब्द, और आवाज़ में कोई भावना नहीं। रीना ने काग़ज़ आगे बढ़ाते हुए कहा— “साइन कर दो रवि, ये शादी एक गलती थी।” रवि ने काग़ज़ नहीं देखा। उसने रीना को देखा— जिसके लिए उसने अपना शहर छोड़ा, अपना सपना छोड़ा, और अपनी तैयारी तक छोड़ दी थी। धीमी आवाज़ में रवि बोला— “एक बार और सोच लो रीना…” रीना हँसी। वह हँसी किसी चाकू से कम नहीं थी। “सोच लिया। और एक बात सुन लो— तुम ज़िंदगी में कुछ नहीं कर पाओगे।” ये शब्द नहीं थे। ये फ़ैसला थे।तीन साल पहले सब कुछ अलग था। रवि तब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। दिन में लाइब्रेरी, रात में किताबें, और सपनों में— IAS बनने की वर्दी। रीना उस समय एक प्राइवेट कंपनी में काम करती थी। उसे बड़ा घर चाहिए था, गाड़ी चाहिए थी, और एक “सेटल” पति। रवि ने कहा था— “थोड़ा वक्त दो, मैं कर लूँगा।” रीना ने मुस्कुरा कर कहा था— “मैं साथ हूँ।” लेकिन शादी के छह महीने बाद “साथ” शब्द बदल गया। अब बातें ताने बन गईं— “अब तक सिलेक्शन क्यों नहीं हुआ?” “मेरी सहेलियों के पति देखो…” “किताबों से घर नहीं चलता।” #emotionalstory #inspirationalstory #hearttouchingstory #moralstories #moralstory #motivationalstory #bedtimestories #hindistories #kahani #kahaniya #lovestory #sachikahani #truestory #crimestory