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भारत में केंद्रीय बजट (वार्षिक वित्तीय विवरण) बनाने की प्रक्रिया एक विस्तृत और गोपनीय प्रक्रिया है जो आम तौर पर वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल - 31 मार्च) शुरू होने से छह महीने पहले अगस्त-सितंबर में शुरू हो जाती है। यह वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के बजट प्रभाग द्वारा तैयार किया जाता है, जिसे बाद में संसद में पारित किया जाता है। बजट निर्माण प्रक्रिया के मुख्य चरण: बजट परिपत्र (Budget Circular) जारी करना: वित्त मंत्रालय सभी केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आगामी वित्तीय वर्ष के लिए खर्च और राजस्व का अनुमान भेजने के लिए एक परिपत्र जारी करता है। अनुमान तैयार करना: सभी विभाग अपनी आवश्यकताओं और योजनाओं के अनुसार व्यय का आकलन करते हैं और इसे वित्त मंत्रालय को सौंपते हैं। परामर्श और समीक्षा: वित्त मंत्रालय के अधिकारी विभागों के साथ बैठकें (Budget-pre-meetings) करते हैं। वित्त मंत्री उद्योग जगत के दिग्गजों, अर्थशास्त्रियों और ट्रेड यूनियनों से भी परामर्श लेते हैं। घाटे का आकलन: प्राप्तियों और व्यय की समीक्षा के बाद, कुल राजस्व घाटे को कम करने और बजटीय संतुलन बनाने का प्रयास किया जाता है। बजट को अंतिम रूप देना: अंतिम बजट दस्तावेज को कैबिनेट की मंजूरी मिलती है। बजट की छपाई की शुरुआत 'हलवा समारोह' से होती है, जिसके बाद बजट टीम के सदस्य बजट पेश होने तक मंत्रालय में ही रहते हैं (गोपनीयता के लिए)। संसद में प्रस्तुति: वित्त मंत्री राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद, आमतौर पर 1 फरवरी को लोकसभा में बजट पेश करते हैं। संसद में पारित होने की प्रक्रिया: बजट पर आम बहस: बजट पेश होने के बाद दोनों सदनों में सामान्य चर्चा होती है। विभागीय समितियों द्वारा जांच: सदन की कार्यवाही स्थगित होने के दौरान, विभागीय समितियां अनुदान मांगों की जांच करती हैं। अनुदान मांगों पर मतदान: लोकसभा में मंत्रालयों की अनुदान मांगों पर मतदान होता है। विनियोग विधेयक (Appropriation Bill) पारित करना: भारत की संचित निधि से पैसा निकालने के लिए यह विधेयक अनिवार्य है। वित्त विधेयक (Finance Bill) पारित करना: कर प्रस्तावों (टैक्स) को लागू करने के लिए वित्त विधेयक पारित किया जाता है। राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद, यह बजट 1 अप्रैल से लागू हो जाता है।