У нас вы можете посмотреть бесплатно कबीर के दोहे-11 или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
Если кнопки скачивания не
загрузились
НАЖМИТЕ ЗДЕСЬ или обновите страницу
Если возникают проблемы со скачиванием видео, пожалуйста напишите в поддержку по адресу внизу
страницы.
Спасибо за использование сервиса ClipSaver.ru
कबीर के दोहे-11 #kabirkedohe #kabirdohawali #kabirbhajan #kabir #dohe #bhajan #bhaktisong #bhakti create: suno ai suno ai pro plan suno ai comercial use plan lyrics: मूल ध्यान गुरू रूप है, मूल पूजा गुरू पाव मूल नाम गुरू वचन हाई, मूल सत्य सतभाव साधु शब्द समुद्र है, जामे रत्न भराय | मंद भाग मुट्ठी भरे, कंकर हाथ लगाये || पूत पियारौ पिता कू, गोहनी लागो धाई | लोभ मिथाई हाथि दे, अपन गयो भुलाई || जा कारनी मे ढूँढती, सन्मुख मिलिया आई धन मैली पीव ऊजला, लागी ना सकौ पाई भारी कहौ तो बहु दरौ, हलका कहु टू झूत माई का जानू राम कू, नैनू कभू ना दीथ || दीथा है तो कस कहू, कह्य ना को पतियाय हरी जैसा है तैसा रहो, तू हर्शी-हर्शी गुन गाई पहुंचेंगे तब कहेंगे, उमड़ेंगे उस ट्ठाई | अझू बेरा समंड मे, बोली बिगूचे काई || मेरा मुझमे कुछ नही, जो कुछ है सो तोर तेरा तुझको सउपता, क्या लागई है मोर || जबलग भागती सकामता, तबलग निर्फल सेव | कहई कबीर वई क्यो मिलई, निहकामी निज देव || कबीर कलिजुग आई करी, कीये बहुत जो मीत | जिन दिलबंध्या एक सू, ते सुखु सोवै निचींत कबीर कूता राम का, मुटिया मेरा नाऊ | गले राम की जेवड़ी, जित खींचे तित जाऊं || कामी अमि नॅ ब्वेयी, विष ही कौ लई सोढी कुबुद्धि ना जाई जीव की, भावै स्वमभ रहौ प्रमोधि || कामी लज्या ना करई, मन माहे अहीलाड़ नींद ना मगई संतरा, भूख ना मगई स्वाद || ग्यानी मूल गवैया, आपन भये करता | ताते संसारी भला, मन मे रहै डरता || इहि उदर कई करने, जग जाच्यो निस् जाम स्वामी-पानो जो सीरी चढयो, सर्यो ना एको काम || स्वामी हुआ सीतका, पैकाकार पचास | रामनाम कथई रह्या, करै सीशा की आस || आग जो लगी समंद में, धुंआ न परगट होए सो जाने जो जरमुआ जाकी लगी होए ॥ आहार करे मन भावता, इंदी किए स्वाद नाक तलक पूरन भरे, तो का कहिए प्रसाद आज कहे हरि कल भजुंगा, काल कहे फिर काल । आज कालके करत ही, अवसर जासी चाल आसन मार गुफा में बैठे, मनवा चहु दिश जाये । भवसागर घट बिच बिराजे, खोजन तीरथ जाये ॥ आसन मारे क्या भया, मरी न मन की आस तैली केरा बैल ज्यों, घर ही कोस पचास ॥ आए हैं सो जाएँगे, राजा रंक फकीर । एक सिंहासन चढ़ि चले, एक बाँधि जंजीर ॥ अकथ कहानी प्रेम की, कुछ कही न जाए गूंगे केरी सरकारा, बैठे मुस्काए ॥ अन्मंगा उत्तम कहा, मद्यम मांगी जो लेय कहे कबीर निकृष्ट, सो पर धरना देय ॥ अनराते सुख सोवना, राते नींद न आय । यों जल छूटी माछरी, तलफत रैन बिहाय ॥ discription:कबीर दास के 50 लोकप्रिय दोहे- Kabir Das ...कबीर के दोहे संत कबीर द्वारा रचित छोटे पद्य हैं, जो सरल भाषा में गहरे दार्शनिक और नैतिक शिक्षाएँ देते हैं, जिनमें भक्ति, निस्वार्थता, समय का महत्व और जीवन की क्षणभंगुरता जैसे विषयों पर जीवन-मूल्य सिखाए जाते हैं, जैसे "पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय" (किताबें पढ़कर कोई ज्ञानी नहीं बनता, प्रेम के ढाई अक्षर ही सच्चा ज्ञान है). मुख्य विषय और शिक्षाएँ (Main Themes & Teachings): भक्ति और आध्यात्मिकता (Devotion & Spirituality): ईश्वर की एकता, सच्चे गुरु की महिमा, और मन की शुद्धि पर जोर देते हैं. नैतिक मूल्य (Moral Values): मीठी वाणी, क्रोध त्याग, और निंदक को पास रखने जैसी बातें सिखाते हैं (जैसे "कुटिल वचन सबतें बुरा, जारि करै सब छार"). समय का महत्व (Importance of Time): "काल करे सो आज कर, आज करे सो अब" जैसे दोहों से कर्म को टालने से मना करते हैं. सत्संगति (Good Company): अच्छे लोगों की संगति और असार (व्यर्थ) बातों को त्यागने की सलाह देते हैं. जीवन की क्षणभंगुरता (Transience of Life): शरीर और संसार की नश्वरता को दर्शाते हैं, जैसे "जो उग्या सो अन्तबै, फूल्या सो कुमलाही". संरचना (Structure): कबीर के दोहे मात्रिक छंद होते हैं, जिसमें दो पंक्तियों (चरणों) में 13 और 11 मात्राएँ होती हैं, जो उन्हें लयबद्ध और यादगार बनाती हैं.