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अपने बल को जागृत करो ! //09-02-26 // Shri Hit Premanan#premanandjimaharaj #motivation #parmanandji बहुत बढ़िया लाइन है—पूरी आध्यात्मिक + मोटिवेशनल vibe दे रही है 🔥 अगर आप इसे viral video caption के तौर पर और दमदार बनाना चाहते हैं, तो ये कुछ polished विकल्प देखिए: Option 1 (Powerful & Short): अपने भीतर सोई शक्ति को जगाओ। जब आत्मबल जागता है, तो कोई बाधा बड़ी नहीं रहती। #अपने_बल_को_जागृत_करो #PremanandJiMaharaj #SpiritualMotivation Option 2 (Bhavuk + प्रेरणादायक): अपने बल को जागृत करो! सच्ची शक्ति बाहर नहीं, भीतर से प्रकट होती है। जय श्री राधे 🙏 #PremanandJiMaharaj #Premanand #SanatanVichar #MotivationHindi Option 3 (Viral-style, reels friendly): कमज़ोरी एक भ्रम है। अपने बल को जागृत करो! ⚡ #premanandjimaharaj #spiritualreels #motivationreels #viralvideo अपने बल को जागृत करो मनुष्य का जीवन संघर्षों, चुनौतियों और उतार-चढ़ावों से भरा होता है। हर व्यक्ति अपने जीवन में कभी न कभी कमजोर पड़ता है, निराश होता है, टूटता है। लेकिन यही जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई नहीं है। जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई यह है कि हर मनुष्य के भीतर अपार शक्ति छिपी हुई है। उस शक्ति को ही संतवाणी में “बल” कहा गया है। “अपने बल को जागृत करो” — यह केवल एक प्रेरक वाक्य नहीं, बल्कि जीवन जीने का सूत्र है। Shri Hit Premanand Ji Maharaj बार-बार यह समझाते हैं कि मनुष्य स्वयं को कमजोर मान लेता है, जबकि ईश्वर ने उसे असाधारण सामर्थ्य के साथ भेजा है। हम बाहर सहारा ढूँढते हैं—लोगों में, परिस्थितियों में, साधनों में—पर असली सहारा हमारे भीतर ही होता है। जब तक व्यक्ति अपने अंदर के बल को नहीं पहचानता, तब तक वह परिस्थितियों का दास बना रहता है। बल क्या है? बल का अर्थ केवल शारीरिक ताकत नहीं है। वास्तविक बल तीन स्तरों पर होता है— शारीरिक बल मानसिक बल आध्यात्मिक बल शारीरिक बल सीमित है, उम्र के साथ घटता-बढ़ता है। मानसिक बल विचारों से बनता और बिगड़ता है। लेकिन आध्यात्मिक बल शाश्वत है, असीम है, और वही जीवन को दिशा देता है। जब व्यक्ति ईश्वर से, आत्मा से, सत्य से जुड़ता है, तब यह बल जागृत होता है। Premanand Ji Maharaj कहते हैं— “जब मन भगवान में टिक जाता है, तब भय स्वयं भाग जाता है।” कमजोरी कहाँ से आती है? कमजोरी बाहर से नहीं आती, कमजोरी हमारे विश्वासों से जन्म लेती है। “मैं यह नहीं कर सकता” “मेरे बस की बात नहीं” “मैं कमजोर हूँ” ये वाक्य हमारी आत्मा को जकड़ लेते हैं। समाज, परिस्थितियाँ और असफलताएँ इन विचारों को और मजबूत कर देती हैं। धीरे-धीरे मनुष्य स्वयं को छोटा मानने लगता है। यही सबसे बड़ा पतन है। Shri Hit Premanand Ji Maharaj हमें चेताते हैं कि अपने बारे में नकारात्मक धारणा रखना ईश्वर का अपमान है, क्योंकि ईश्वर ने हमें अपने अंश के रूप में बनाया है। बल को कैसे जागृत करें? 1. ईश्वर पर दृढ़ विश्वास जब व्यक्ति यह मान लेता है कि ईश्वर उसके साथ है, तब डर समाप्त हो जाता है। विश्वास वह नींव है जिस पर आत्मबल खड़ा होता है। 2. नाम-स्मरण और भक्ति नाम में अपार शक्ति है। राधा नाम, कृष्ण नाम या गुरु नाम का नियमित स्मरण मन को शुद्ध करता है और आत्मा को बल देता है। यह आंतरिक ऊर्जा को जागृत करता है। 3. धैर्य और सहनशीलता बलवान वही है जो हर परिस्थिति में शांत रहता है। क्रोध, घबराहट और हताशा कमजोरी के लक्षण हैं। धैर्य आत्मबल का सबसे बड़ा प्रमाण है। 4. सत्य और धर्म का पालन जो व्यक्ति सत्य के मार्ग पर चलता है, उसे कोई हिला नहीं सकता। अधर्म तात्कालिक लाभ देता है, लेकिन आत्मबल छीन लेता है। 5. संगति का प्रभाव जैसी संगति, वैसा मन। संतों की संगति, सत्संग और सकारात्मक विचार आत्मबल को जागृत करते हैं। आत्मबल जागृत होने पर क्या बदलता है? जब भीतर का बल जागता है— डर समाप्त हो जाता है परिस्थितियाँ छोटी लगने लगती हैं मन स्थिर हो जाता है निर्णय स्पष्ट हो जाते हैं जीवन में उद्देश्य दिखाई देने लगता है व्यक्ति फिर भाग्य को दोष नहीं देता, बल्कि कर्म को साधना बना लेता है। Premanand Ji Maharaj का यह भाव बहुत गहरा है कि परिस्थितियाँ हमें नहीं तोड़तीं, हमारी अंदर की कमजोरी हमें तोड़ती है। और वही कमजोरी बल में बदल सकती है, यदि हम जाग जाएँ। आज के समय में यह संदेश क्यों आवश्यक है? आज का मनुष्य सुविधाओं से घिरा है, फिर भी भीतर से खाली है। तनाव, अवसाद, भय, असुरक्षा—ये सब आत्मबल की कमी के लक्षण हैं। बाहर की सफलता अंदर की शांति नहीं दे सकती, जब तक भीतर का बल जागृत न हो। “अपने बल को जागृत करो” आज के युवा, गृहस्थ, साधक—सबके लिए समान रूप से आवश्यक है। यह संदेश हमें आत्मनिर्भर बनाता है, ईश्वर से जोड़ता है और जीवन को अर्थ देता है। निष्कर्ष अपने बल को जागृत करना कोई एक दिन की प्रक्रिया नहीं है। यह निरंतर अभ्यास, विश्वास और भक्ति का मार्ग है। जब व्यक्ति अपने भीतर झाँकता है, तब उसे पता चलता है कि वह जितना समझता था, उससे कहीं अधिक सक्षम है। कमजोरी एक भ्रम है। बल तुम्हारा स्वभाव है। बस उसे जागृत करना है। जय श्री राधे 🙏