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1. प्रथम भाव (लग्न) यहाँ सूर्य व्यक्ति को तेजस्वी और स्वाभिमानी बनाता है। व्यक्ति में गजब की नेतृत्व क्षमता होती है, लेकिन स्वभाव में थोड़ा अहंकार या गुस्सा भी हो सकता है। शारीरिक रूप से पित्त की अधिकता रहती है। 2. द्वितीय भाव (धन भाव) दूसरे भाव में सूर्य होने से व्यक्ति अपनी स्पष्ट और अधिकारपूर्ण वाणी के लिए जाना जाता है। पैतृक संपत्ति का लाभ मिलता है, लेकिन परिवार के सदस्यों के साथ वैचारिक मतभेद भी रह सकते हैं। आँखों से जुड़ी समस्या हो सकती है। 3. तृतीय भाव (पराक्रम भाव) यहाँ सूर्य बहुत शुभ फल देता है। व्यक्ति अत्यंत साहसी और पराक्रमी होता है। समाज में उसकी धाक होती है। छोटे भाई-बहनों से थोड़े मतभेद हो सकते हैं, लेकिन करियर में अपने दम पर सफलता पाता है। 4. चतुर्थ भाव (सुख भाव) चौथे भाव में सूर्य व्यक्ति को आलीशान घर और वाहन का सुख तो देता है, लेकिन हृदय में अशांति बनी रह सकती है। माता के स्वास्थ्य को लेकर चिंता और घरेलू जीवन में थोड़ा तनाव रह सकता है। 5. पंचम भाव (संतान व विद्या भाव) व्यक्ति बहुत बुद्धिमान और विद्वान होता है। शिक्षा में सफलता मिलती है। हालांकि, संतान प्राप्ति में देरी या संतान के साथ वैचारिक मतभेद हो सकते हैं। प्रेम संबंधों में भी ईगो (अहंकार) आड़े आ सकता है। 6. षष्ठ भाव (रोग व शत्रु भाव) यहाँ सूर्य 'शत्रुहन्ता' योग बनाता है। व्यक्ति अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है। यह भाव कोर्ट-कचहरी और प्रतियोगिता में जीत दिलाता है। व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) अच्छी होती है। 7. सप्तम भाव (विवाह भाव) सातवें भाव का सूर्य वैवाहिक जीवन के लिए थोड़ा कठिन माना जाता है। जीवनसाथी के साथ तकरार या अहंकार का टकराव हो सकता है। साझेदारी (Partnership) के व्यवसाय में सावधानी बरतनी चाहिए। 8. अष्टम भाव (आयु व गुप्त भाव) यहाँ सूर्य होने से स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव बना रहता है। कार्यों में अचानक रुकावटें आती हैं, लेकिन व्यक्ति की रुचि गुप्त विद्याओं (ज्योतिष, तंत्र) में बहुत होती है। पैतृक धन मिलने की संभावना रहती है। 9. नवम भाव (भाग्य व धर्म भाव) यह बहुत ही शुभ स्थिति है। व्यक्ति धार्मिक, भाग्यशाली और परोपकारी होता है। पिता से बहुत सहयोग मिलता है और व्यक्ति उच्च शिक्षा प्राप्त कर समाज में सम्मानित होता है। 10. दशम भाव (कर्म व राज्य भाव) यहाँ सूर्य 'दिग्बली' (सबसे शक्तिशाली) होता है। व्यक्ति को सरकारी नौकरी, राजनीति या प्रशासनिक सेवाओं में उच्च पद मिलता है। करियर में बहुत मान-सम्मान और प्रसिद्धि प्राप्त होती है। 11. एकादश भाव (लाभ भाव) ग्यारहवें भाव का सूर्य धन और आय के लिए श्रेष्ठ है। व्यक्ति के संपर्क ऊंचे पदों पर बैठे लोगों से होते हैं। बड़े भाई-बहनों से लाभ मिलता है और सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। 12. द्वादश भाव (व्यय भाव) यहाँ सूर्य फिजूलखर्ची बढ़ाता है। व्यक्ति को जन्म स्थान से दूर या विदेश में सफलता मिलती है। आँखों में तकलीफ या नींद की कमी जैसी समस्या हो सकती है। कोर्ट-कचहरी के चक्कर लग सकते हैं।