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Mata Chanchal Naath – 𝘼𝙡𝙖𝙠𝙝 𝙉𝙞𝙧𝙖𝙣𝙟𝙖𝙣 | अलख निरंजन अलख निरंजन जय 🌺 ✨ नाथ संप्रदाय की दिव्य वाणी और ब्रह्म-स्मरण का अमृत ✨ “अलख निरंजन” — यह केवल दो शब्द नहीं हैं, यह संपूर्ण सनातन साधना का सार हैं। यह वह उद्घोष है, जो दृश्य से अदृश्य की ओर ले जाता है, सगुण से निर्गुण की ओर ले जाता है और देह से ब्रह्म की ओर यात्रा कराता है। “Mata Chanchal Naath – Alakh Niranjan Alakh Niranjan जय” एक ऐसा दिव्य भजन है, जो नाथ संप्रदाय की परंपरा, योग मार्ग, निर्गुण भक्ति और आत्म-साक्षात्कार की अनुभूति को अत्यंत सरल, मधुर और प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत करता है। 🔱 अलख निरंजन का अर्थ और रहस्य अलख का अर्थ है — 👉 जो देखा नहीं जा सकता 👉 जो आँखों से परे है 👉 जो इंद्रियों से अगम है निरंजन का अर्थ है — 👉 जो निर्मल है 👉 जो माया से रहित है 👉 जिस पर कोई दाग नहीं अर्थात् अलख निरंजन वह परम तत्व है — जो दिखाई नहीं देता, पर सबमें विद्यमान है। यह भजन उसी परम तत्व का स्मरण है। 🌼 नाथ संप्रदाय और माता चंचल नाथ नाथ संप्रदाय भारत की प्राचीनतम योग परंपराओं में से एक है। यह संप्रदाय बाहरी आडंबर से ऊपर उठकर आंतरिक साधना पर बल देता है। माता चंचल नाथ नाथ परंपरा की एक महान सिद्ध योगिनी मानी जाती हैं। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि: ईश्वर पुरुष या स्त्री नहीं है साधना में लिंग का कोई भेद नहीं जो आत्मा को जान ले, वही नाथ है यह भजन माता चंचल नाथ की उसी निर्गुण साधना और ब्रह्म-ज्ञान को नमन है। 🌿 भजन का भावार्थ इस भजन में बार-बार उच्चारण होता है — अलख निरंजन, अलख निरंजन, जय अलख निरंजन यह उद्घोष मन को संसार से हटाकर आत्मा की ओर मोड़ देता है। भजन का मूल भाव यही है कि: यह संसार नश्वर है देह मिटने वाली है नाम, रूप, धन, पद सब क्षणिक हैं केवल ब्रह्म सत्य है और उसी ब्रह्म का नाम है — अलख निरंजन 🕉️ निर्गुण भक्ति की शक्ति यह भजन सगुण उपासना से आगे बढ़कर निर्गुण भक्ति की ओर ले जाता है। निर्गुण भक्ति का अर्थ है — 👉 बिना रूप के भजन 👉 बिना मूर्ति के ध्यान 👉 बिना मांग के समर्पण नाथ संप्रदाय, कबीर साहब, गोरखनाथ, दादू दयाल — सभी ने इसी मार्ग को अपनाया। यह भजन उसी परंपरा की जीवंत झलक है। 🔥 योग, वैराग्य और आत्मबोध नाथ पंथ केवल भजन नहीं, योग और वैराग्य का मार्ग है। यह भजन हमें सिखाता है कि: इच्छाओं का अंत ही शांति है अहंकार का त्याग ही मुक्ति है भीतर की खोज ही सच्ची साधना है “अलख निरंजन” का जप करते-करते मन स्वयं शांत होने लगता है। 🎶 संगीत और स्वर की विशेषता इस भजन का संगीत: गहरा ध्यानमय रहस्यमय आत्मा को छूने वाला है। ढोलक, मंजीरा, एकतारा या साधारण तान — सब मिलकर ऐसा वातावरण बनाते हैं, जैसे कोई योगी धूनी रमाए बैठा हो। यह भजन सुनते समय: आँखें अपने-आप बंद होने लगती हैं श्वास-प्रश्वास स्थिर होने लगता है मन विचारों से मुक्त होने लगता है 🌸 माता चंचल नाथ का आध्यात्मिक संदेश माता चंचल नाथ का संदेश अत्यंत सरल है: “अपने भीतर देखो, वही अलख निरंजन है।” यह भजन हमें बार-बार यही स्मरण कराता है कि ईश्वर बाहर नहीं, भीतर है। 🌼 आज के युग में अलख निरंजन की प्रासंगिकता आज का मनुष्य: तनाव से घिरा है इच्छाओं में उलझा है तुलना और प्रतिस्पर्धा में जल रहा है ऐसे समय में अलख निरंजन का नाम एक औषधि की तरह काम करता है। यह भजन: ✨ मानसिक शांति देता है ✨ भय को समाप्त करता है ✨ आत्मबल बढ़ाता है ✨ वैराग्य और विवेक जगाता है 🌺 भजन सुनने के आध्यात्मिक लाभ इस भजन को नियमित सुनने या जपने से: मन निर्मल होता है साधना में स्थिरता आती है नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है आत्मिक आनंद की अनुभूति होती है नींद, चिंता और भय में कमी आती है यह भजन ध्यान, योग, प्रातःकाल और संध्या के लिए अत्यंत श्रेष्ठ है। 🔔 नाथ योगियों की पुकार “अलख निरंजन जय” कोई गीत नहीं, यह योगियों की पुकार है। यह पुकार हमें याद दिलाती है कि: तू देह नहीं, तू मन नहीं, तू वही है — जो अलख है, निरंजन है। 🌸 निष्कर्ष “Mata Chanchal Naath – Alakh Niranjan Alakh Niranjan जय” एक ऐसा भजन है जो: आत्मा को झकझोर देता है संसार से विरक्त करता है भीतर के ब्रह्म से जोड़ देता है यह भजन हर उस साधक के लिए है, जो सत्य, शांति और मोक्ष की खोज में है।