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खरगोश और कछुआ Hindi Kahaniya | Rabbit and Tortoise 3D Hindi Stories for Kids #panchatantrastories #cartoon #hindistories #hindicartoonstory 0:00:07 : बहुत समय पहले एक हरेभरे जंगल में तरह-तरह के जानवर रहते थे। वहां एक खरगोश और एक 0:06:13 : कछुआ भी रहते थे। खरगोश अपनी तेज दौड़ने की क्षमता पर बहुत घमंड करता था। वो अक्सर 0:12:23 : बाकी जानवरों को चिढ़ाते हुए कहता मुझसे तेज तो कोई भाग ही नहीं सकता। मैं 0:18:08 : जंगल का सबसे फुर्तीला जानवर हूं। कछुआ शांत रहता और बस मुस्कुराकर सब सुन 0:24:27 : लेता। एक दिन जंगल में सभा लगी। सभी जानवर बातें कर रहे थे। तभी खरगोश ने फिर डेंगे 0:32:25 : मारना शुरू किया। कछुआ तुझे देखकर तो मुझे नींद आने लगती 0:37:22 : है। इतना धीरे-धीरे चलता है। क्या कभी कहीं पहुंच भी पाता है? 0:43:02 : कछुआ शांत स्वर में बोला। दोस्त धीरे चलने का भी अपना महत्व है। 0:48:11 : लगातार चलते रहना ही असली ताकत है। खरगोश ने मजाक उड़ाते हुए कहा। 0:54:06 : तो क्यों ना हम दोनों में दौड़ की प्रतियोगिता हो जाए। सबको पता चल जाएगा कि 0:59:05 : असली विजेता कौन है। सभी जानवर ताली बजाकर बोले 1:03:14 : हां हां यही सही रहेगा। अगले दिन सुबह जंगल के राजा शेर ने दौड़ बहुत समय पहले, एक हरे-भरे जंगल में तरह-तरह के जानवर रहते थे। वहाँ एक खरगोश और एक कछुआ भी रहते थे। खरगोश अपनी तेज़ दौड़ने की क्षमता पर बहुत घमंड करता था। वह अक्सर बाकी जानवरों को चिढ़ाते हुए कहता— खरगोश (हँसते हुए): "मुझसे तेज़ तो कोई भाग ही नहीं सकता। मैं जंगल का सबसे फुर्तीला जानवर हूँ।" कछुआ शांत रहता और बस मुस्कुराकर सब सुन लेता। ________________________________________ पहला दृश्य: खरगोश का घमंड (5 मिनट) एक दिन जंगल में सभा लगी। सभी जानवर बातें कर रहे थे। तभी खरगोश ने फिर डींगें मारना शुरू किया— खरगोश: "कछुआ! तुझे देख कर तो मुझे नींद आने लगती है। इतना धीरे-धीरे चलता है, क्या कभी कहीं पहुँच भी पाता है?" सभी जानवर हँस पड़े। कछुआ शांत स्वर में बोला— कछुआ: "दोस्त, धीरे चलने का भी अपना महत्व है। लगातार चलते रहना ही असली ताक़त है।" खरगोश ने मज़ाक उड़ाते हुए कहा— खरगोश: "तो क्यों न हम दोनों में दौड़ की प्रतियोगिता हो जाए? सबको पता चल जाएगा कि असली विजेता कौन है।" सभी जानवर ताली बजाकर बोले— "हाँ! हाँ! यही सही रहेगा।" ________________________________________ दूसरा दृश्य: दौड़ का ऐलान (5 मिनट) अगले दिन सुबह जंगल के राजा शेर ने दौड़ का आयोजन किया। शेर ने सीमा तय की— शेर: "इस बड़े पीपल के पेड़ से लेकर नदी किनारे वाले बरगद तक, जो पहले पहुँचेगा वही विजेता कहलाएगा।" सब जानवर इकट्ठे हुए। बंदर ढोल बजा रहा था, मोर झूम रहा था, तोते चिल्ला रहे थे— "दौड़ शुरू होने वाली है…!" ________________________________________ तीसरा दृश्य: दौड़ की शुरुआत (5 मिनट) शेर ने हाथ उठाकर संकेत दिया और दौड़ शुरू हुई। खरगोश पलक झपकते ही बहुत आगे निकल गया। खरगोश (दूर से आवाज़ देते हुए): "कछुए! तू तो बस यहाँ ही रह जाएगा।" सभी जानवरों ने देखा कि खरगोश कितनी तेजी से भाग रहा है, और कछुआ बहुत धीरे-धीरे अपने छोटे-छोटे कदमों से चल रहा है। ________________________________________ चौथा दृश्य: खरगोश का आलस्य (6 मिनट) थोड़ी देर बाद खरगोश ने पीछे मुड़कर देखा। कछुआ बहुत दूर था। खरगोश (सोचते हुए): "अरे, ये कछुआ तो अभी तक आधी दूरी भी नहीं तय कर पाया होगा। क्यों न थोड़ी देर आराम कर लूँ?" वह रास्ते में हरी-हरी घास देखकर लेट गया। खरगोश: "मैं तो अभी सो भी जाऊँ, तब भी कछुआ मुझे नहीं हरा सकता।" धीरे-धीरे खरगोश गहरी नींद में सो गया। ________________________________________ पाँचवाँ दृश्य: कछुए की लगन (6 मिनट) उधर कछुआ बिना रुके चलता रहा। उसके मन में बस एक ही विचार था— कछुआ (धीरे-धीरे कदम रखते हुए): "अगर मैं लगातार चलता रहूँ, तो अंत तक ज़रूर पहुँच जाऊँगा। रुकने से हार होती है, चलते रहने से जीत।" कछुए ने थकान को नजरअंदाज किया और धीरे-धीरे मंज़िल की ओर बढ़ता रहा। ________________________________________ छठा दृश्य: खरगोश की नींद और कछुए का आगे निकलना (5 मिनट) घंटों बीत गए। खरगोश अब भी गहरी नींद में था। कछुआ धीरे-धीरे चलता हुआ उसे पार कर गया। वहाँ खड़े पक्षी फुसफुसाए— "देखो! कछुआ खरगोश को पार कर गया। क्या खरगोश हार जाएगा?" ________________________________________ सातवाँ दृश्य: मंज़िल के पास (4 मिनट) जब खरगोश की आँख खुली तो उसने देखा—सूरज डूबने वाला है और कछुआ मंज़िल के काफी करीब पहुँच चुका है। खरगोश (घबराकर): "अरे! ये कैसे हो गया? मुझे तुरंत दौड़ना होगा!" वह पूरी ताकत से भागा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। ________________________________________ आठवाँ दृश्य: कछुए की जीत (4 मिनट) कछुआ धीरे-धीरे लेकिन लगातार चलते हुए सबसे पहले मंज़िल तक पहुँच गया। सभी जानवर खुशी से चिल्लाए— "वाह! वाह! कछुआ जीत गया…!" खरगोश (नम्रता से): "कछुआ भाई, मुझे माफ कर दो। मैंने घमंड किया और उसका नतीजा देख लिया।" कछुआ मुस्कुराकर बोला— कछुआ: "मित्र, जीतने के लिए सिर्फ तेज़ होना ज़रूरी नहीं। निरंतरता और धैर्य ही असली ताक़त है।" ________________________________________ उपसंहार (3 मिनट) उस दिन से खरगोश ने घमंड करना छोड़ दिया और मेहनत व लगन की अहमियत समझी। जंगल के सभी जानवरों ने यह सबक सीखा कि— "धीरे-धीरे ही सही, पर निरंतर प्रयास करने वाला ही सच्चा विजेता होता है।"