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G# स्केल पर तानपुरा और तबला के साथ अभ्यास (विस्तृत मार्गदर्शन) भारतीय शास्त्रीय संगीत में स्वर-साधना का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। किसी भी गायक या वादक के लिए नियमित रियाज़ ही उसकी आवाज़, सुर-शुद्धता और भावनात्मक अभिव्यक्ति को सुदृढ़ बनाता है। आज के समय में G# (जी शार्प) स्केल का प्रयोग विशेष रूप से पुरुष और महिला—दोनों ही गायकों द्वारा किया जाता है। इस स्केल पर तानपुरा और तबला के साथ अभ्यास करने से स्वर स्थिरता, लयबोध और आत्मविश्वास में अद्भुत वृद्धि होती है। 1. G# स्केल का परिचय G# स्केल आधुनिक संगीत पद्धति का एक महत्वपूर्ण स्केल है। यह उन गायकों के लिए उपयुक्त होता है जिनकी आवाज़ मध्यम से थोड़ी ऊँची पिच में सहज रहती है। G# स्केल में सा को G# पर स्थिर किया जाता है और उसी के अनुसार सभी स्वर साधे जाते हैं। स्वर क्रम (शुद्ध स्वर): सा – रे – ग – म – प – ध – नि – सा (G# – A# – C – C# – D# – F – G – G#) इस स्केल पर अभ्यास करने से आवाज़ में चमक, खुलापन और ताकत आती है। 2. तानपुरा का महत्व (G# पर) तानपुरा भारतीय संगीत की आत्मा है। यह केवल संगत वाद्य नहीं, बल्कि स्वर का मार्गदर्शक है। G# स्केल के लिए तानपुरा सेटिंग: सा – प – सा – प या सा – म – सा – म (यदि राग के अनुसार) तानपुरा की ध्वनि निरंतर चलती रहती है, जिससे गायक को हर क्षण यह एहसास बना रहता है कि स्वर कहाँ स्थित है। G# पर तानपुरा बजाने से स्वर ऊर्जावान रहते हैं और आलाप में स्पष्टता आती है। 3. तबला का महत्व जहाँ तानपुरा स्वर देता है, वहीं तबला लय देता है। G# स्केल पर तबला के साथ अभ्यास करने से: ताल में बैठने की क्षमता बढ़ती है बंदिशें और पलटे सटीक होते हैं गायक का आत्मविश्वास बढ़ता है शुरुआती ताल: तीनताल (16 मात्रा) केहरवा (8 मात्रा) दादरा (6 मात्रा) 4. अभ्यास की सही शुरुआत (क) ओंकार और श्वास अभ्यास G# पर अभ्यास शुरू करने से पहले 5–10 मिनट ओंकार करें। गहरी साँस लें “ॐ” को लंबे समय तक गाएँ इससे फेफड़े, गला और मन—तीनों शांत होते हैं। 5. स्वर साधना (तानपुरा के साथ) एक-एक स्वर का अभ्यास: सा ––– रे ––– ग ––– म ––– प ––– ध ––– नि ––– सा ––– हर स्वर को तानपुरा की ध्वनि में अच्छी तरह मिलाएँ। ध्यान रखें कि स्वर न ऊँचा जाए, न नीचा। 6. आरोह-अवरोह अभ्यास आरोह: सा रे ग म प ध नि सा अवरोह: सा नि ध प म ग रे सा पहले विलंबित, फिर मध्यम और अंत में द्रुत गति में अभ्यास करें। G# स्केल में यह अभ्यास आवाज़ को स्थिर और शक्तिशाली बनाता है। 7. पलटा और सरगम अभ्यास सरल पलटे: सा रे ग, रे ग म, ग म प सा रे ग म, म ग रे सा सरगम अभ्यास: सा रे ग म | प म ग रे | सा नि ध प | म ग रे सा || इन्हें पहले तानपुरा पर, फिर तबला जोड़कर गाएँ। 8. तबला के साथ अभ्यास विधि जब स्वर अभ्यास ठीक हो जाए, तब तबला शामिल करें। केहरवा ताल (8 मात्रा): धा गे ना ती | ना का धा गे | इस ताल में सरगम और बंदिशें गाने से लय और सुर का संतुलन बनता है। तीनताल में अभ्यास: धीरे-धीरे बंदिश को ताल में बैठाने की कोशिश करें। सम पर आना विशेष रूप से अभ्यास करें। 9. आलाप और राग अभ्यास G# स्केल पर राग अभ्यास करते समय: पहले आलाप फिर बोल आलाप फिर बंदिश इस क्रम से अभ्यास करने पर राग की आत्मा समझ में आती है। 10. मेडिटेशन और मानसिक लाभ G# पर तानपुरा के साथ रियाज़ केवल संगीत नहीं, बल्कि ध्यान साधना भी है। इसके लाभ: तनाव कम होता है मन एकाग्र होता है आत्मविश्वास बढ़ता है स्वर में मिठास आती है 11. नियमित अभ्यास का समय सुबह 4–7 बजे (अमृत वेला) सर्वोत्तम या रात में शांत वातावरण में रोज़ कम से कम 45–60 मिनट 12. सावधानियाँ जबरदस्ती ऊँचा न गाएँ गले में दर्द हो तो विश्राम लें तानपुरा बिना अभ्यास न करें मोबाइल स्केल बदल-बदलकर न गाएँ निष्कर्ष G# स्केल पर तानपुरा और तबला के साथ अभ्यास गायक को सुर, लय और भाव—तीनों में परिपूर्ण बनाता है। नियमित, धैर्यपूर्ण और सही विधि से किया गया रियाज़ न केवल आवाज़ को निखारता है, बल्कि संगीत को साधना बना देता है। जो साधक इस स्केल पर निरंतर अभ्यास करता है, उसकी आवाज़ में स्थायित्व, गहराई और आकर्षण अपने-आप आ जाता है। #GSharpScale #TanpuraRiyaz #TablaPractice #IndianClassicalMusic #SwarSadhana #VocalRiyaz #MusicMeditation #RaagAbhyas #DailyPractice #SangeetSadhna 🎶 #music #viral ##video