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जॉइंट दर्द और घिसाव की समस्या में अक्सर मरीजों के मन में यह सवाल आता है कि पार्शियल जॉइंट रिप्लेसमेंट बेहतर है या पूर्ण जॉइंट रिप्लेसमेंट। डॉ. अभिषेक कुमार दास बताते हैं कि दोनों ही सर्जरी के अपने-अपने फायदे हैं और सही विकल्प मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है। वे समझाते हैं कि पार्शियल जॉइंट रिप्लेसमेंट तब किया जाता है जब जोड़ का केवल एक हिस्सा ही खराब हुआ हो और बाकी जोड़ स्वस्थ हो। इस प्रक्रिया में जोड़ के केवल प्रभावित हिस्से को बदला जाता है, जिससे आसपास की हड्डी और टिश्यू को कम नुकसान होता है। इसके कारण रिकवरी अपेक्षाकृत तेज़ हो सकती है, दर्द कम रहता है और मरीज जल्दी सामान्य गतिविधियों में लौट सकता है। वहीं, पूर्ण जॉइंट रिप्लेसमेंट उन मामलों में ज़रूरी होता है जहां जोड़ पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका हो और आंशिक इलाज से आराम मिलना संभव न हो। डॉ. दास के अनुसार, हर मरीज के लिए एक ही समाधान सही नहीं होता। उम्र, गतिविधि स्तर, दर्द की तीव्रता और जॉइंट को हुए नुकसान की सीमा को ध्यान में रखकर ही सही सर्जरी का निर्णय लिया जाता है। विशेषज्ञ की सही सलाह और समय पर इलाज से दर्द से राहत मिलती है और जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनती है। डॉ. अभिषेक कुमार दास की प्रोफ़ाइल देखें – एसोसिएट डायरेक्टर, आर्थोपेडिक्स, मेदांता, पटना https://www.medanta.org/hospitals-nea... सहायता के लिए कॉल करें: 0612-6605050 आपात स्थिति में डायल करें: 1068 हमसे जुड़े रहें: Facebook: / medanta Twitter: / medanta Instagram: / medanta LinkedIn: / medanta #JointReplacement #OrthopaedicsCare #DrAbhishekKumarDas #MedantaPatna #KneeReplacement #BoneHealth #Medanta