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अखेर एकदाचे अण्णा हजारे बोलले !! #Viral, #Trending, #TrendingNow, #PVI, #anna hajare, #Ahilyanagarnews तब्बल चौदा वर्षांनंतर हजेरी लावत ते बोलले आणि त्यांनी फडणवीसांना " मी ह्रदयविकाराने मरण्या ऐवजी देशसेवा करत मरणे पसंत करेल ' असे म्हणत शिळाच लोकपाल जर पुढील दोन महिन्यात निवडला नाही तर, राळेगणसिद्धीत पुन्हा उपोषणाला बसण्यासाठी धमकावले. पीपल्स व्हाँईस इंडिया - पीव्हीआय आपले स्वागत करतो. मी पुन्हा येईन, पुन्हा येईन हे ब्रिदवाक्य शपथेवर सांगणाऱ्या फडणवीसांना मी पुन्हा उपोषणाला बसेल... असे वृतपत्रात जाहीर सांगत अण्णा हजारेंनी उपोषणाची युक्ती पुन्हा एकदा वापरण्याची त्यांची तयारी जाहीर केली. अगदी थोड्या वरून महात्मा बनता बनता राहिलेल्या अण्णा हजारेंनी २०११ साली मनमोहन सिंग सरकार विरोधात दिल्लीत जंतरमंतर वर भरवलेल्या उपोषणाला " मी " पाठिंबा देऊन व त्या उपोषणाला उपस्थित राहून चुक केल्याची कबुली सर्वोच्च न्यायालयातील प्रसिद्ध वकील प्रशांत भुषण यांनी देशाची जाहीर माफी प्रसार माध्यमावर मागत अण्णा हजारेंचे ते आंदोलन कशासाठी होते यावर शिक्कामोर्तब केले. PVI के आलोचनात्मक दृष्टिकोण के साथ इंडिया अगेंस्ट करप्शन: जनआंदोलन से अनुत्तरित सवालों तक | PVI विश्लेषण यह वीडियो इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन (2010–2011) की ऐतिहासिक यात्रा को दोबारा सामने लाता है, जिसने करोड़ों भारतीयों को भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुट किया और जन लोकपाल विधेयक की मांग को राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनाया। इस आंदोलन का नेतृत्व अण्णा हज़ारे ने किया। 2010 में जंतर-मंतर पर हुए विरोध, रामलीला मैदान की ऐतिहासिक सभा, और 5 अप्रैल 2011 को अण्णा हज़ारे के अनशन तक—यह आंदोलन नागरिक शक्ति और लोकतांत्रिक प्रतिरोध का प्रतीक बन गया। लेकिन People’s Voice India (PVI) का मानना है कि इतिहास को याद करने के साथ-साथ कठिन सवाल पूछना भी उतना ही ज़रूरी है। यह वीडियो किन सवालों को उठाता है: · 2014 से 2026 के बीच अण्णा हज़ारे की लगातार चुप्पी क्यों? · बैंकिंग घोटालों और कॉरपोरेट-राजनीतिक गठजोड़ पर मौन क्यों? · चुनावी प्रक्रिया के कथित हाइजैक पर कोई सार्वजनिक हस्तक्षेप क्यों नहीं? · चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठते सवाल क्यों? · मतदाता सूची से नाम हटाए जाने (वोटर डिलीशन) की गंभीर शिकायतें मौन क्यो? · उन्हीं संस्थाओं का कमजोर होना, जिनसे 2011 में जवाबदेही की मांग की गई थी PVI, अण्णा हज़ारे के 2011 में नागरिकों को जागरूक करने वाले योगदान का सम्मान करता है। लेकिन PVI का स्पष्ट मत है कि नैतिक नेतृत्व की विश्वसनीयता सत्ता परिवर्तन के साथ बदलनी नहीं चाहिए। लोकतंत्र में मौन भी एक राजनीतिक विकल्प होता है — और उस पर सवाल उठना चाहिए। यह वीडियो किसी व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि नैतिक स्थिरता, संस्थागत स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों के पक्ष में एक नागरिक अपील है। आपकी राय महत्वपूर्ण है। क्या जनआंदोलनों के नेताओं से उनकी चुप्पी पर सवाल पूछा जाना चाहिए? कमेंट में अपनी बात रखें। PVI को सब्सक्राइब करें — स्वतंत्र, जनपक्षीय और निर्भीक राजनीतिक विश्लेषण के लिए। NOTE- WE ARE VERY THANKFUL TO PIXABAY FOR SUBSCRIBE BUTTON USED IN THIS VIDEO. (Free for use under the Pixabay Content License) डिस्क्लेमर (Hindi) यह वीडियो People’s Voice India (PVI) के शोध, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तथ्यों, समाचार रिपोर्टों और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित विश्लेषणात्मक एवं जनहित दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। इसमें व्यक्त विचार किसी व्यक्ति, संस्था या संवैधानिक पद के प्रति व्यक्तिगत द्वेष, मानहानि या दुर्भावना से प्रेरित नहीं हैं। यह सामग्री अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, लोकतांत्रिक विमर्श और संवैधानिक अधिकारों के अंतर्गत प्रस्तुत की गई है। दर्शकों से अपेक्षा है कि वे इसे सूचनात्मक और विचारात्मक संदर्भ में लें तथा स्वयं स्वतंत्र रूप से तथ्यों का मूल्यांकन करें। PVI किसी भी प्रकार की हिंसा, घृणा या अवैधानिक गतिविधियों का समर्थन नहीं करता। यह वीडियो PVI का स्वतंत्र विश्लेषण है, जो सार्वजनिक तथ्यों और लोकतांत्रिक अधिकारों के दायरे में प्रस्तुत किया गया है। इसका उद्देश्य किसी की मानहानि नहीं, बल्कि जनहित में प्रश्न उठाना है। Legal Disclaimer: This video is produced strictly for the purpose of fact-checking and public awareness. The content presented herein is based on information available in the public domain and is intended solely to address, examine, and respond to criticisms related to the subject matter. This video does not intend to defame, harm, or make personal allegations against any individual, organization, institution, or group. All views expressed are within the framework of ethical criticism, journalistic responsibility, and fair comment. Any references made are purely informational and should not be construed as personal attacks, malicious intent, or legal claims. Viewers are advised to interpret the content in the context of facts, research, and public interest. anna hazare silence, india against corruption, jan lokpal movement, pvi analysis, people’s voice india, democracy under threat india political accountability, independent media india, indian democracy crisis, anna hazare, jan lokpal bill, arvind kejriwal anna hazare election commission bias, bank frauds india, crony capitalism india, black money india, civil society movement india, indian democracy, political awareness india, politics of india, current affairs india • अखेर एकदाचे.. अण्णा हजारे बोलले. #news #PV... • Peoples Voice India PVI News !! #Viral, ... https://www.oneindia.com/2011/10/03/a...