У нас вы можете посмотреть бесплатно श्री श्यामा योगिनी स्तोत्रम् | अत्यंत प्रभावशाली स्तुति | Rudraksha Jap Special или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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भक्ति और साधना की दिव्य धारा में आपका स्वागत है। प्रस्तुत है अत्यंत प्रभावशाली श्री श्यामा योगिनी स्तोत्रम् — जो साधक के जीवन में ज्ञान, शक्ति, साधना सिद्धि और आध्यात्मिक जागरण का संचार करता है। इस स्तोत्र के नियमित पाठ से: 🔸 मानसिक शांति 🔸 साधना में प्रगति 🔸 नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा 🔸 आत्मबल एवं तेज में वृद्धि यह स्तोत्र विशेष रूप से ध्यान, जप एवं रुद्राक्ष माला के साथ किया जाए तो शीघ्र फलदायी माना गया है। 🙏 वीडियो को पूरा सुनें, लाइक करें और चैनल को सब्सक्राइब करें। जय माँ श्यामा योगिनी। 🔱 Hashtags #ShyamaYogini #ShyamaYoginiStotram #HinduDevotional #RudrakshaJapa #BhaktiSadhna #DeviStuti #TantraSadhna #SpiritualChanting #Lekhranjan #ShaktiUpasana #SanatanDharma #DailyStotra __ ॥ श्रीश्यामा-योगिनी-स्तोत्रम् ॥ मंगलाचरणम् ॐ नमः श्रीपरमात्मने। ॐ ऐं ह्रीं क्लीं श्रीश्यामायै योगिन्यै नमः॥ ध्यानम् नीलोत्पलदलश्यामां, त्रिनेत्रां चन्द्रशेखराम्। वीणापुस्तकधारिणीं, वराभयकरां शुभाम्॥ सिंहवाहनसंयुक्तां, रक्ताम्बरविभूषिताम्। स्मिताननाम् करुणामयीं, श्यामा योगिनिमाश्रये॥ विनियोगः अस्य श्रीश्यामा-योगिनी-स्तोत्रस्य लेखरंजन-ऋषिः। अनुष्टुप् छन्दः। श्रीश्यामा योगिनी देवता। ऐं बीजम्। ह्रीं शक्तिः। क्लीं कीलकम्। मम सर्वाभीष्ट-सिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः॥ करन्यासः ॐ ऐं अङ्गुष्ठाभ्यां नमः। ॐ ह्रीं तर्जनीभ्यां नमः। ॐ क्लीं मध्यमाभ्यां नमः। ॐ श्यामायै अनामिकाभ्यां नमः। ॐ योगिन्यै कनिष्ठिकाभ्यां नमः। ॐ नमः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः॥ अङ्गन्यासः ॐ ऐं हृदयाय नमः। ॐ ह्रीं शिरसे स्वाहा। ॐ क्लीं शिखायै वषट्। ॐ श्यामायै कवचाय हुं। ॐ योगिन्यै नेत्रत्रयाय वौषट्। ॐ नमः अस्त्राय फट्॥ स्तोत्रम् नमामि त्वां महाशक्तिं, श्यामां योगप्रदायिनीम्। भुक्तिमुक्तिप्रदां देवीं, भक्तानां हितकारिणीम्॥ कालरात्रिस्वरूपां त्वां, करुणारससागराम्। ज्ञानदीपप्रदीप्ताङ्गीं, मोहमाया-विनाशिनीम्॥ मन्त्ररूपां महामायां, सर्वतन्त्रस्वरूपिणीम्। चित्शक्तिं चिद्घनानन्दां, हृदि भावयाम्यहम्॥ रुधिरारक्तवस्त्राढ्यां, रत्नमालाविभूषिताम्। सिंहासने समासीनां, सर्वलोकैकनायिकाम्॥ त्रिशूलपाशधारिणीं, खड्गखेटकशोभिताम्। दुष्टसंहारकारिणीं, सज्जनानां सुखप्रदाम्॥ योगिनीं योगदां देवीं, योगमार्गप्रकाशिनीम्। कुण्डलिनीस्वरूपां त्वां, प्रबोधय मम चेतसि॥ लेखरंजन-वन्दितां, भक्तहृदयनिवासिनीम्। स्तोत्रेणानेन संतुष्टा, वरदा भव शाश्वती॥ या पठेत् श्रद्धया भक्त्या, नित्यं श्यामास्तवं शुभम्। तस्य सिद्धिर्भवेद् शीघ्रं, भयशोकविवर्जिता॥ फलश्रुतिः इदं स्तोत्रं पवित्रं हि, लेखरंजननिर्मितम्। यः पठेत् प्रातरुत्थाय, शृणुयाद्वा समाहितः॥ तस्य विद्या भवेत् स्थिरा, लक्ष्मीः सौभाग्यदायिनी। रोगशोकभयं नाशं, आयुः कीर्तिश्च वर्धते॥ सर्वसिद्धिप्रदं नित्यं, श्यामा-योगिनि-तोषणम्। अन्ते शिवपदं याति, नात्र कार्या विचारणा॥ ॥ इति श्रीलेखरंजन-विरचितं श्रीश्यामा-योगिनी-स्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥ __ 🌺 श्री श्यामा योगिनी स्तोत्रम् — पाठ विधि 🌺 यह विधि साधक को शुद्ध, एकाग्र और फलदायी जप में सहायक होती है। 🔱 1. पूर्व तैयारी (Preparation) प्रातः ब्रह्ममुहूर्त या संध्या समय सर्वोत्तम। स्नान कर स्वच्छ (विशेषतः पीले/गेरुए) वस्त्र धारण करें। पूजास्थल पर माता श्यामा योगिनी का चित्र/प्रतिमा स्थापित करें। दीपक (घी का), धूप, पुष्प एवं नैवेद्य अर्पित करें। रुद्राक्ष माला हो तो उत्तम। 🧘 2. आसन एवं संकल्प कुशासन/ऊनासन पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। दाहिने हाथ में जल लेकर संकल्प करें: “मम सर्वाभीष्ट सिद्ध्यर्थे श्री श्यामा योगिनी प्रसादसिद्ध्यर्थं स्तोत्रपाठं करिष्ये।” 🕉️ 3. प्रारम्भिक क्रम आचमन (3 बार) प्राणायाम (कम से कम 3 बार गहरी श्वास) ध्यान श्लोक का शांत भाव से पाठ विनियोग, करन्यास, अंगन्यास (यदि ज्ञात हो) 📿 4. मुख्य स्तोत्र पाठ श्रद्धा और स्पष्ट उच्चारण के साथ पाठ करें। कम से कम 1 बार, विशेष साधना में 11 या 21 बार। रुद्राक्ष माला से जप करते समय प्रत्येक मणि पर एक श्लोक या पूर्ण स्तोत्र। पाठ के समय मन में देवी का नीलवर्ण तेजस्वी स्वरूप ध्यान करें। 🌼 5. समापन विधि फलश्रुति का पाठ अवश्य करें। अंत में प्रार्थना करें: “माता श्यामा योगिनि, मम जीवनं साधनायै समर्पितम्। कृपां कुरु।” आरती करें। क्षमा प्रार्थना: “यदक्षरपदभ्रष्टं मात्राहीनं च यद्भवेत्। तत्सर्वं क्षम्यतां देवि प्रसन्ना भव सर्वदा॥” ⭐ विशेष निर्देश नवरात्रि, अमावस्या, पूर्णिमा और शुक्रवार को विशेष फलदायी। साधना काल में सात्त्विक आहार रखें। क्रोध, असत्य और नकारात्मक विचारों से बचें। नियमितता ही सिद्धि का मूल है।