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https://amzn.in/d/03O7pfU काव्य-तीर्थ: 108 पवित्र स्थलों की आध्यात्मिक यात्रा "तीर्थ केवल स्थान नहीं होते, वे मन की यात्रा के पड़ाव होते हैं।" प्रस्तुत है ‘काव्य-तीर्थ’ — एक ऐसी साहित्यिक और आध्यात्मिक यात्रा जो आपको सनातन संस्कृति के 108 सबसे पावन तीर्थस्थलों के हृदय तक ले जाएगी। यह ग्रंथ केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि उन भावनाओं और विचारों का काव्यात्मक प्रवाह है, जो तीर्थों के स्मरण मात्र से प्राप्त होने वाली शांति, ऊर्जा और आत्मिक स्पर्श को शब्दबद्ध करता है। इस ग्रंथ की विशेषताएँ: 108 कविताओं का अनूठा संगम: यह 108 पावन स्थलों पर लिखी गई 108 कविताओं का एक साहित्यिक प्रयास है, जिसमें कविता के माध्यम से तीर्थों की भावना, आस्था और गौरवशाली इतिहास को जीवंत करने का संकल्प लिया गया है। पूज्य जगद्गुरु जी का आशीर्वाद: इस कृति को पद्मविभूषण जगद्गुरु स्वामी श्री रामभद्राचार्य जी महाराज की मंगलमय शुभाशंसा प्राप्त है, जो इसकी आध्यात्मिक गरिमा को और बढ़ा देती है। आस्था और तथ्य का संतुलन: हर कविता के साथ 'स्थान परिचय' भी दिया गया है, ताकि पाठक को उस स्थल का ऐतिहासिक और भौगोलिक तथ्य भी मिल सके और आस्था की नींव पुख्ता हो। सनातन की आत्मा का काव्यात्मक प्रवाह: यह काव्य-यात्रा किसी एक धर्म, पंथ या कालखंड तक सीमित नहीं है। यह राम की करुणा, शिव का सौम्य गर्जन, और माँ शक्ति के तेज को समाहित करती हुई सनातन संस्कृति की गूढ़ गाथा का सहज वर्णन है। यात्रा चार प्रमुख खंडों में विभाजित है: 1. चार धाम: (बद्रीनाथ, केदारनाथ, पुरी, रामेश्वरम, द्वारका) 2. द्वादश ज्योतिर्लिंग: (सोमनाथ से लेकर घुश्मेश्वर तक) 3. 51 शक्तिपीठ: (सभी प्रमुख शक्तिपीठों का वर्णन) 4. अन्य प्रमुख तीर्थ व दर्शनीय स्थल: (अयोध्या, मथुरा, चित्रकूट, काशी आदि) यह ग्रंथ न केवल एक साहित्य-प्रेमी के लिए, बल्कि प्रत्येक जिज्ञासु, आस्तिक और आध्यात्मिक पथ पर चलने वाले पाठक के लिए एक आवश्यक संग्रह है। ‘काव्य-तीर्थ’ के पन्नों को पलटिए, और स्वयं को समझने तथा ईश्वर के प्रति झुकने की इस पावन यात्रा का हिस्सा बनिए।