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---छठवीं ढाल--- षट्काय जीव न हनन तैं, सब विधि दरब-हिंसा टरी। रागादि भाव निवारतैं, हिंसा न भावित अवतरी॥ जिनके न लेश मृषा न जल मृण हू बिना दीयो गहैं। अठदशसहस विधि शीलधर, चिद्ब्रह्म में नित रमि रहैं ॥(1) अन्तर चतुर्दश भेद बाहिर, संग दशधा तैं टलैं। परमाद तजि चउ कर मही लखि, समिति ईर्या तैं चलैं॥ जग सुहितकर सब अहितहर, श्रुतिसुखद सब संशय हरैं। भ्रम-रोग-हर जिनके वचन, मुखचन्द्र तैं अमृत झरैं॥(2) छ्यालीस दोष बिना सुकुल, श्रावक तनैं घर अशन को। लैं तप बढ़ावन हेतु, नहिं तन पोषते तजि रसन को। शुचि ज्ञान संयम उपकरण, लखिकैं गहैं लखिकैं धरैं। निर्जन्तु थान विलोक तन-मल, मूत्र श्लेषम परिहरैं ॥(3) सम्यक् प्रकार निरोध मन-वच-काय आतम ध्यावते। तिन सुथिर-मुद्रा देखि मृग-गण, उपल खाज खुजावते॥ रस रूप गन्ध तथा फरस, अरु शब्द शुभ असुहावने। तिनमें न राग विरोध, पंचेन्द्रिय-जयन पद पावने ॥(4) समता सम्हारैं थुति उचारैं, वन्दना जिनदेव को। नित करैं श्रुतरति करै प्रतिक्रम, तजैं तन अहमेव को॥ जिनके न न्हौंन न दन्त-धोवन, लेश अम्बर आवरन। भूमाहिं पिछली रयनि में कछु, शयन एकासन करन ॥(5) इक बार दिन में लैं अहार, खड़े अलप निज पान में। कचलोंच करत न डरत परीषह, सों लगे निज ध्यान में॥ अरि मित्र महल मसान कंचन-काँच निन्दन-थुति करन। अर्घावतारन असि-प्रहारन, में सदा समता धरन ॥(6) तप तपैं द्वादश धरैं वृष दश, रत्न-त्रय सेवैं सदा। मुनि-साथ में वा एक विचरैं चहैं नहिं भव-सुख कदा॥ यों है सकलसंयमचरित, सुनिये स्वरूपाचरन अब। जिस होत प्रगटै आपनी निधि, मिटै पर की प्रवृत्ति सब॥(7) जिन परमपैनी सुबुधि - छैनी, डारि अन्तर भेदिया। वरणादि अरु रागादि तैं, निज-भाव को न्यारा किया।। निजमाहिं निज के हेतु निज कर, आपको आपै गह्यो। गुण गुणी ज्ञाता ज्ञान ज्ञेय, मंझार कछु भेद न रह्यो॥(8) जहँ ध्यान ध्याता ध्येय को न, विकल्प वच भेद न जहाँ। चिद्भाव कर्म चिदेश कर्ता, चेतना किरिया तहाँ॥ तीनों अभिन्न अखिन्न शुध उपयोग की निश्चल दसा। प्रगटी जहाँ दृग-ज्ञान-व्रत ये तीनधा एकै लसा ॥(9) परमाण नय निक्षेप को न उद्योत अनुभव में दिखैं। दृग-ज्ञान-सुख-बलमय सदा, नहिं आन भाव जु मो विखैं। मैं साध्य साधक मैं अबाधक, कर्म अरु तसु फलनितैं। चित् पिण्ड चण्ड अखण्ड सुगुणकरण्ड च्युत पुनि कलनितैं॥(10) यों चिन्त्य निज में थिर भये, तिन अकथ जो आनन्द लह्यो। सो इन्द्र नाग नरेन्द्र वा, अहमिन्द्र के नाहीं कह्यो॥ तब ही शुकलध्यानाग्नि करि, चउ-घातिविधि कानन दह्यो। सब लख्यो केवलज्ञान करि, भविलोक को शिवमग कह्यो॥(11) पुनि घाति शेष अघातिविधि, छिन माहिं अष्टम-भू बसैं। वसुकर्म विनसै सुगुण वसु, सम्यक्त्व आदिक सब लसैं॥ संसार खार अपार पारावार, तरि तीरहिं गये। अविकार अकल अरूप शुचि,चिद्रूप अविनाशी भये ॥(12) निजमाँहि लोक अलोक गुण, परजाय प्रतिबिम्बित भये। रहि हैं अनन्तानन्तकाल, यथा तथा शिव परिणये॥ धनि धन्य हैं जे जीव, नर-भव पाय, यह कारज किया। तिनही अनादि भ्रमण पञ्च प्रकार तजि वर सुख लिया॥(13) मुख्योपचार दुभेद यों बड़भागि रत्नत्रय धरैं। अरु धरैंगे ते शिव लहैं तिन, सुयश-जल-जग-मल हरैं॥ इमि जानि आलस हानि, साहस ठानि यह सिख आदरो। जबलौं न रोग जरा गहै तबलौं झटिति निज हित करो॥(14) यह राग आग दहै सदा, तातैं समामृत सेइये। चिर भजे विषय कषाय अब तो त्याग निजपद बेइये॥ कहा रच्यो पर-पद में न तेरो पद यहै क्यों दु:ख सहै। अब ‘दौल’ होउ सुखी स्व-पद रचि, दाव मत चूकौ यहै ।।(15) (दोहा) इक नव वसु इक वर्ष की, तीज शुकल वैशाख। कर्यो तत्त्व उपदेश यह, लखि ‘बुधजन’ की भाख॥(1) लघु-धी तथा प्रमादतैं, शब्द - अर्थ की भूल। सुधी सुधार पढ़ो सदा, जो पावो भव-कूल॥(2) #TARAN PANTH #TARAN PANTH BHAJAN #JAIN BHAJAN #TARAN BHAJAN # वंदे श्री गुरु तारणम् हमारे चैनल का उद्देश्य धर्म प्रभावना का हैं आप भी हम से जुड़े और धर्म प्रभावना में सहयोगी बने आचार्य भगवन तारण तरण देव की जय हो वन्दे श्री गुरु तारणम् Live TARAN PANTH DESHANA' चैनल पर प्रसारित प्रवचन ,भजन, फूलना ,जयमाल ,कविता , नाटक , आदि सुनने के लिए Playlist के मध्यम से जरूर सुने । • पावन वर्षायोग 2021 बा ब्र आत्मानंद जी पावन वर्षायोग 2021 बा ब्र आत्मानंद जी महाराज • श्री चौदह ग्रंथादिराज जी बंचन बा ब्र आत्मा... चौदह ग्रंथादिराज वांचन बा ब्र आत्मानंद जी महाराज • मुंगवानी प्रवचन बा ब्र वैराग्य भैया जी मुंगवानी प्रवचन बा ब्र वैराग्य भैया • श्री चौबीस ढाणा जी बा ब्र प्रियंका श्री चौबीस ढाणा जी बा ब्र डॉ प्रियंका बहन जी • केवल मत बा ब्र सुषमा बहन जी केवल मत के ग्रंथो पर चर्चा बा ब्र सुषमा बहन जी • बड़गांव छद्मस्तवाणी जी वैराग्य भैया जी छद्मस्त वाणी जी बा ब्र वैराग्य भैया जी बड़गांव • बड़गांव श्रावकाचार जी वैराग्य भैया जी बड़गांव प्रवचन 2021 बा ब्र वैराग्य भैया श्रावकाचार से • चौरई प्रवचन ४९ दिवसीय पाठ तारण तरण श्री संघ 49 दिवसीय पाठ चौरई गोहिल्य परिवार • शुध्दात्म भवन सिलवानी बा ब्र धर्मेन्द्र भै... शुद्धात्म भवन सिलवानी बा ब्र धर्मेन्द्र भैया • फूलना बांचन फूलना जरूर सुनें • भजन संध्या 2021 भजन संध्या • श्री तारण तरण अध्यात्म ज्ञान गोष्ठी 2021 श्री तारण तरण अध्यात्म ज्ञान गोष्ठी सभी लिंक एक साथ