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lyrics or composer = arvindsuthar #arvindsthr #babahansrajraghuvanshi राजस्थानी लोक परंपरा भक्ति, त्याग और धर्म की जीवंत मिसाल रही है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाता यह देसी मारवाड़ी भजन “चन्दन राजा मिलियागिरी राणी” एक ऐसी अमर कथा को संगीत के माध्यम से प्रस्तुत करता है, जिसमें राजपाट, वैभव और ऐश्वर्य से ऊपर भक्ति, सेवा और सत्य को स्थान दिया गया है। यह भजन केवल एक कथा नहीं, बल्कि जीवन जीने की सच्ची सीख है। राजा चन्दन और राणी मिलियागिरी की कथा राजस्थान की उस मिट्टी से जुड़ी है जहाँ राजा होना केवल सत्ता का प्रतीक नहीं, बल्कि धर्म और न्याय का भार उठाने का दायित्व माना जाता था। इस भजन में दिखाया गया है कि कैसे चन्दन राजा ने अपने जीवन में सत्य, दया और धर्म को सबसे ऊँचा स्थान दिया। वहीं मिलियागिरी राणी ने भी रानी होते हुए अहंकार नहीं अपनाया, बल्कि भक्ति और सेवा को अपना आभूषण बनाया। इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरलता है। न कोई कठिन शब्द, न भारी अलंकार—बस सीधी मारवाड़ी बोली, जो सीधे दिल में उतर जाती है। ढोलक, मंजीरा और हारमोनियम की राजस्थानी धुन पर यह भजन सुनते ही ऐसा महसूस होता है जैसे किसी गाँव की चौपाल या मंदिर के आंगन में सत्संग चल रहा हो। भजन में यह भाव प्रमुख रूप से उभरकर आता है कि सच्चा सुख महलों में नहीं, बल्कि हरि नाम और सेवा में है। राजा चन्दन और राणी मिलियागिरी ने यह साबित कर दिया कि जब मन में भक्ति बस जाती है, तब सोना-चाँदी, राजमहल और वैभव सब फीके लगने लगते हैं। उनका जीवन हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो आज के समय में भौतिक सुखों के पीछे भागते हुए आत्मिक शांति खो बैठा है। यह भजन बिना अंतरा के रचा गया है, जिससे इसे लगातार गाया जा सके। यही कारण है कि यह जागरण, सत्संग, भजन संध्या, मंदिर कार्यक्रम और लोक कथा मंचन के लिए एकदम उपयुक्त है। एक ही टेक को बार-बार दोहराने से श्रोता भी भक्ति में डूब जाता है और गायक को भी भाव में बहने का पूरा अवसर मिलता है। राजस्थानी संस्कृति में राजा-रानी की ऐसी कथाएँ केवल इतिहास नहीं होतीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली कहानियाँ होती हैं। चन्दन राजा और मिलियागिरी राणी की कथा हमें सिखाती है कि सत्ता का असली अर्थ सेवा है, और जीवन की सफलता धन में नहीं, बल्कि धर्म और भक्ति में है। आज के समय में जब युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से दूर होती जा रही है, ऐसे भजन उन्हें अपनी राजस्थानी पहचान से जोड़ने का काम करते हैं। मारवाड़ी भाषा की मिठास, देसी शब्दों की खुशबू और लोकधुन की सादगी—यह सब मिलकर इस भजन को खास बनाते हैं। इस भजन का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि संस्कारों का संचार करना है। यह हमें याद दिलाता है कि चाहे इंसान राजा हो या रंक, अंत में हर किसी को हरि के चरणों में ही शीश झुकाना है। चन्दन राजा और मिलियागिरी राणी ने यही मार्ग अपनाया और अपना नाम अमर कर लिया। यदि आप भक्ति संगीत प्रेमी हैं, राजस्थानी लोक भजनों से लगाव रखते हैं, या देसी मारवाड़ी संस्कृति को आगे बढ़ाना चाहते हैं, तो यह भजन आपके लिए ही है। इसे सुनिए, गुनगुनाइए और इस भक्ति रस को दूसरों तक भी पहुँचाइए। 👉 इस भजन को Like करें 👉 अपने दोस्तों और परिवार के साथ Share करें 👉 ऐसे ही और देसी मारवाड़ी भजनों के लिए Channel को Subscribe / Page को Follow करें आपका एक छोटा सा सहयोग हमारी लोक संस्कृति को जीवित रखने में बड़ा योगदान बन सकता है 🙏 #ChandanRajaBhajan #MiliyagiriRani #MarwadiBhajan #RajasthaniBhajan #DesiBhajan #LokBhakti #RajasthaniLokGeet #MarwadiSong #BhaktiSangeet #IndianFolkMusic #RajasthaniCulture #DesiSanskriti #VillageBhajan #SantVani #Haribhajan #BhajanSatsang #RajasthaniMusic #MarwarCulture #FolkBhajan #DesiVibes