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Samragi ka Naivaidya Daan By Ageya The Best Explanation 'सम्राज्ञी का नैवेद्य-दान' - अज्ञेय BHavpaksh aur Kala Paksh Ke Saath https://avinashsolutions.com/hindi-sa... 'सम्राज्ञी का नैवेद्य-दान' हे महाबुद्ध! मैं मंदिर में आयी हूँ रीते हाथ : फूल मैं ला न सकी। औरों का संग्रह तेरे योग्य न होता। और जो मुझे सुनाती जीवन के विह्वल सुख-क्षण का गीत खोलती रूप जगत के द्वार जहाँ तेरी करुणा बुनती रहती है भव के सपनों, क्षण के आनंदों के रह : सूत्र अविराम- उस भोली मुग्धा को कँपती डाली से विलग न सकी। जो कली खिलेगी जहाँ, खिली जो फूल जहाँ है, जो भी सुख जिस भी डाली पर हुआ पल्लवित, पुलकित, मैं उसे वहीं पर अक्षत, अनाघात, अस्पृश्य, अनाविल हे महाबुद्ध? अर्पित करती हूँ तुझे। वहीं-वहीं प्रत्येक प्याला जीवन का, वहीं-वहीं नैवेद्य चढ़ा अपने सुंदर आनंद-निमिष का, तेरा हो, हे विगतागत के, वर्तमान के पद्मकोश ! हे महाबुद्ध !