У нас вы можете посмотреть бесплатно पंचमस्थ प्रज्ञावर्धक बुध स्तोत्रम् | मेधा-वृद्धि, संतानसौभाग्य एवं मंत्रसिद्धि हेतु प्रभावी पाठ или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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यह दिव्य स्तोत्र पंचम भाव में स्थित बुध की कृपा प्राप्ति हेतु रचित है। पंचम भाव प्रज्ञा, मेधा, स्मरणशक्ति, संतान, मंत्रसिद्धि और पूर्व पुण्य का कारक माना जाता है। इस स्तोत्र के नियमित पाठ से — ✨ बुद्धि तीव्र होती है ✨ स्मरणशक्ति बढ़ती है ✨ संतान-सौभाग्य की प्राप्ति होती है ✨ शिक्षा एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता मिलती है ✨ मंत्र-साधना में सिद्धि प्राप्त होती है 🔔 विशेष लाभ: विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, ज्योतिष साधकों और मंत्रोपासकों के लिए अत्यंत फलदायी। 📿 पाठकाल: बुधवार प्रातःकाल या पंचमी तिथि विशेष शुभ। 📖 कम से कम ११, २१ या १०८ पाठ करें। 🔷 🔖 #बुधस्तोत्र #प्रज्ञावर्धकबुध #पंचमभाव #बुधग्रह #मेधावृद्धि #विद्यासिद्धि #ज्योतिषउपाय #BudhStotra #MercuryRemedy __ पंचमस्थ प्रज्ञावर्धक बुध स्तोत्रम् ध्यानम् पीताम्बरं हरितवर्णं चन्द्रात्मजं सौम्यरूपिणम्। सिंहारूढं करकमले पुस्तकाक्षमालाधरम्॥ कृपादृष्ट्या प्रसन्नं तं पंचमस्थं प्रज्ञवर्धनम्। ध्यायामि बुधदेवं तं मेधासिद्धिप्रदायकम्॥ विनियोगः अस्य श्री पंचमस्थ-प्रज्ञावर्धक-बुध-स्तोत्रस्य ऋषिः — लेखरंजनः। छन्दः — अनुष्टुप्। देवता — पंचमभावस्थितः बुधदेवः। बीजम् — “ब्रां”। शक्तिः — “ब्रीं”। कीलकम् — “ब्रूं”। पाठे विनियोगः — प्रज्ञा, मेधा, स्मरणशक्ति, संतानसौभाग्य तथा मंत्रसिद्धि प्राप्त्यर्थम्। करन्यासः ब्रां अङ्गुष्ठाभ्यां नमः। ब्रीं तर्जनीभ्यां नमः। ब्रूं मध्यमाभ्यां नमः। ब्रैं अनामिकाभ्यां नमः। ब्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः। ब्रः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः। अङ्गन्यासः ब्रां हृदयाय नमः। ब्रीं शिरसे स्वाहा। ब्रूं शिखायै वषट्। ब्रैं कवचाय हुं। ब्रौं नेत्रत्रयाय वौषट्। ब्रः अस्त्राय फट्। स्तोत्रम् १ पंचमस्थो बुधः सौम्यः प्रज्ञां मे वर्धय प्रभो। स्मृतिं मेधां च विज्ञानं देहि देव नमोऽस्तु ते॥ २ मंत्रबीजप्रदातारं शास्त्रार्थप्रकाशकम्। संतानबुद्धिदातारं वन्दे प्रज्ञाविवर्धनम्॥ ३ पूर्वपुण्यप्रभावेन यः सदा शुभदायकः। विद्याविनयसम्पन्नं कुरु मां बुधसत्तम॥ ४ वाक्सिद्धिं कीर्तिमैश्वर्यं बुद्धिशक्तिं च देहि मे। पंचमस्थ महाप्राज्ञ सर्वज्ञत्वं प्रयच्छ मे॥ ५ संशयच्छेदनं कुरु चिन्तासागरनाशनम्। गूढार्थबोधदातारं नमामि त्वां दिनेशज॥ ६ बालबुद्धिं विवेकं च तीक्ष्णग्राह्यं मनो मम। कुरु देव प्रज्ञावृद्धिं भवबन्धविमोचनम्॥ फलश्रुतिः यः पठेत् श्रद्धया नित्यं पंचमस्थं बुधं स्मरन्। तस्य मेधा प्रज्ञा वृद्धिः संततिः सौख्यमेव च॥ विद्यायाः सिद्धिमाप्नोति मंत्राणां च विशेषतः। सर्वत्र जयमाप्नोति बुधकृपाप्रसादतः॥ __ 📿 पंचमस्थ प्रज्ञावर्धक बुध स्तोत्र — पाठ विधि संबंधित देवता — Budha 🔶 १️⃣ पाठ का श्रेष्ठ समय बुधवार प्रातः ब्रह्ममुहूर्त या सूर्योदय के बाद पंचमी तिथि विशेष शुभ बुध होरा में पाठ अत्यंत फलदायी परीक्षा/महत्वपूर्ण कार्य से पूर्व ११ पाठ करें 🔶 २️⃣ पूर्व तैयारी स्नान कर हरे या हल्के पीत वस्त्र धारण करें पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें आसन — कुश, ऊन या हरे वस्त्र का सामने बुधदेव का चित्र/यंत्र रखें हरे फल (अमरूद/द्राक्ष) या मूंग अर्पित करें 🔶 ३️⃣ संकल्प दाहिने हाथ में जल लेकर संकल्प करें — “अहं प्रज्ञा-मेधा-स्मरणशक्ति-संतानसौभाग्य-सिद्ध्यर्थं पंचमस्थ प्रज्ञावर्धक बुध स्तोत्रपाठं करिष्ये।” 🔶 ४️⃣ न्यास एवं ध्यान करन्यास एवं अङ्गन्यास करें (ब्रां, ब्रीं, ब्रूं आदि बीज से) तत्पश्चात ध्यान श्लोक का शांत मन से जप करें बुधदेव को हरित आभा में पंचम भाव में स्थित ध्यान करें 🔶 ५️⃣ मुख्य पाठ स्तोत्र का १, ११, २१ या १०८ बार पाठ करें विद्यार्थी कम से कम ११ पाठ प्रतिदिन करें ४० दिन निरंतर करने से विशेष सिद्धि 🔶 ६️⃣ जप संख्या (विशेष साधना) “ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः” मंत्र का ९००० जप प्रत्येक बुधवार १०८ आहुतियाँ (यदि संभव हो) 🔶 ७️⃣ समापन फलश्रुति पाठ बुधदेव से प्रार्थना “ॐ शांति शांति शांति:” अंत में प्रसाद वितरण 🌿 विशेष सावधानियाँ ✔ असत्य भाषण न करें ✔ गुरु एवं माता का सम्मान करें ✔ हरे मूंग का दान करें ✔ विद्यार्थियों को लेखनी दान शुभ।