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षष्ठ भाव स्थित युक्तिविजयी बुध व्यक्ति को तर्कशक्ति, विवाद-विजय, शत्रुनाश, रोग-निवारण तथा ऋणमोचन की अद्भुत क्षमता प्रदान करता है। इसमें ध्यान, विनियोग, न्यास तथा फलश्रुति सहित षष्ठ भावस्थ बुधदेव की उपासना विधि वर्णित है। नियमित श्रद्धा से पाठ करने पर शत्रु शमन, न्यायालय या वाद-विवाद में विजय, मानसिक स्पष्टता, वाणी में प्रभाव तथा बुद्धिबल की वृद्धि होती है। यह स्तोत्र विशेष रूप से उन साधकों के लिए उपयोगी है जिनकी कुंडली में बुध षष्ठ भाव में स्थित हो या जो तर्क-वितर्क, प्रतियोगिता, सेवा-क्षेत्र, न्यायिक कार्य अथवा शत्रु-संबंधी बाधाओं से ग्रस्त हों। 🔱 #युक्तिविजयीबुध #षष्ठभावबुध #बुधस्तोत्र #शत्रुनाश #ऋणमोचन #रोगनिवारण #विवादविजय #ज्योतिषउपाय #लेखरंजन __ षष्ठभावस्थित युक्तिविजयी बुध स्तोत्रम् ॥ ध्यानम् ॥ हरिताम्बरधरं देवं चन्द्रबिम्बसमप्रभम्। शशाङ्कसुतमद्वैतं बुद्धितेजोविभूषितम्॥ षष्ठभावस्थितं सौम्यं शत्रुव्याधिविनाशनम्। युक्तिविजयदातारं तं बुधं प्रणमाम्यहम्॥ ॥ विनियोगः ॥ अस्य श्री-षष्ठभावस्थित-युक्तिविजयी-बुध-स्तोत्रस्य ऋषिः – लेखरंजनः। छन्दः – अनुष्टुप्। देवता – षष्ठभावस्थितः युक्तिविजयी बुधदेवः। बीजम् – "बुं"। शक्तिः – बुद्धिशक्ति:। कीलकम् – शत्रुनाशन-सिद्धिः। मम सर्वशत्रु-विनाश, ऋणमोचन, रोगनिवारण, तर्कविजय-प्राप्त्यर्थे जपे विनियोगः। करन्यासः ॐ बुं बुधाय अङ्गुष्ठाभ्यां नमः। ॐ बुद्धिदाय तर्जनीभ्यां नमः। ॐ युक्तिविजयाय मध्यमाभ्यां नमः। ॐ शत्रुनाशनाय अनामिकाभ्यां नमः। ॐ ऋणमोचकाय कनिष्ठिकाभ्यां नमः। ॐ सौम्याय करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः। अङ्गन्यासः ॐ बुं बुधाय हृदयाय नमः। ॐ युक्तिविजयाय शिरसे स्वाहा। ॐ शत्रुहन्त्रे शिखायै वषट्। ॐ रोगनाशाय कवचाय हुं। ॐ ऋणमोचकाय नेत्रत्रयाय वौषट्। ॐ सौम्यदेवाय अस्त्राय फट्। ॥ स्तोत्रम् ॥ १ जय बुध देव सौम्यरूप, ज्ञानदीप प्रकाशित। षष्ठभावस्थितो नित्यं शत्रुदर्प विनाशकृत्॥ २ तर्कशास्त्रविशारद त्वं वाग्वैभवप्रदायकः। युक्तियुद्धे विजयं दत्त्वा मानसं च प्रकाशय॥ ३ ऋणरोगभयार्तानां त्वमेव शरणं विभो। षष्ठस्थानाधिपो देवा क्लेशनाशं कुरुष्व मे॥ ४ शब्दार्थतत्त्वविदुषां त्वं प्रेरकः सदा बुधः। विवेकदीपं प्रज्वाल्य मोहान्धकार नाशय॥ ५ लेखरंजनऋषिप्रोक्तं स्तोत्रमेतत् शुभप्रदम्। यः पठेत् श्रद्धया नित्यं तस्य सिद्धिर्न संशयः॥ ६ शत्रवो नम्रतां यान्ति विवादे जयमश्नुते। रोगपीडा क्षयं याति ऋणभारो विनश्यति॥ ७ युक्त्या युक्तं मनो यस्य बुद्धिबलसमन्वितम्। षष्ठभावस्थितो बुधः तस्य सौख्यं प्रयच्छति॥ ८ वाक्सिद्धिं बुद्धिसंपत्तिं कीर्तिं सौभाग्यमेव च। ददाति सौम्यदेवोऽयं प्रसन्नो युक्तिविजयी बुधः॥ ॥ फलश्रुतिः ॥ इदं स्तोत्रं षष्ठभावे स्थितं बुधं यः समर्चयेत्। तस्य शत्रुविनाशः स्यात् रोगऋणक्षयो ध्रुवम्॥ विवादे विजयः स्यात्, बुद्धिवृद्धिर्भवेद् ध्रुवम्। सर्वक्लेशक्षयो नित्यं सौख्यसम्पद् प्रजायते॥ __ 🌿 षष्ठभावस्थित युक्तिविजयी बुध स्तोत्र — पाठ विधि 🌿 🕰 पाठ का श्रेष्ठ समय बुधवार प्रातः ब्रह्ममुहूर्त (4–6 बजे) अथवा बुध होरा में शुक्ल पक्ष में आरम्भ विशेष फलदायी 🪔 प्रारम्भिक तैयारी हरे वस्त्र धारण करें। पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन ग्रहण करें। पूजा स्थान पर हरे वस्त्र पर बुध यंत्र या बुधदेव का चित्र स्थापित करें। दूर्वा, मूंग, हरे फल या तुलसी पत्र अर्पित करें। दीपक (घी या तिल तेल) प्रज्वलित करें। 📿 संकल्प दाहिने हाथ में जल लेकर संकल्प करें — “मम सर्वशत्रु-ऋण-रोग-निवारण, विवाद-विजय, बुद्धिवृद्धि तथा युक्तिसिद्ध्यर्थं षष्ठभावस्थित-युक्तिविजयी-बुध-स्तोत्रपाठं करिष्ये।” 🔱 जप एवं स्तोत्र पाठ क्रम ध्यानम् का पाठ विनियोग न्यास (करन्यास एवं अङ्गन्यास) सम्पूर्ण स्तोत्र का एकाग्र भाव से पाठ अंत में फलश्रुति 🔢 पाठ संख्या सामान्य शांति हेतु — प्रतिदिन 1 पाठ (कम से कम 21 दिन) विशेष शत्रु/विवाद निवारण हेतु — 11 पाठ प्रतिदिन (21 या 40 दिन) अत्यंत बाधा होने पर — 108 जप “ॐ बुं बुधाय नमः” के साथ स्तोत्र 🌼 विशेष उपाय 7 बुधवार तक हरी मूंग का दान करें। गौ को हरा चारा अर्पित करें। विद्यार्थियों को पुस्तक दान विशेष फलदायी। 🌟 पूर्णाहुति अंत में प्रार्थना करें — “हे युक्तिविजयी बुधदेव! मम शत्रून् शमय, ऋणं नाशय, रोगान् हर, बुद्धिं प्रकाशय।”