У нас вы можете посмотреть бесплатно #hindi или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
Если кнопки скачивания не
загрузились
НАЖМИТЕ ЗДЕСЬ или обновите страницу
Если возникают проблемы со скачиванием видео, пожалуйста напишите в поддержку по адресу внизу
страницы.
Спасибо за использование сервиса ClipSaver.ru
लालपान की बेगम’ 1957 में भावात्मक शैली में लिखी गई एक आँचलिक कहानी है। ठुमरी संग्रह में संकलित लालपान की बेगम 1956 की कहानी है। यह इलाहाबाद से प्रकाशित ‘कहानी’ पत्रिका के जनवरी 1957 के अंक में प्रकाशित हुई थी। पुंज प्रकाश ने इस कहानी का नाट्य रूपान्तरण भी किया है, जिसे सन् 1907 में शारदा सिंह के निर्देशन में पटना के कालिदास रंगालय में मंचित किया गया। लाल पान की बेगम नारी केन्द्रित कहानी है। यह कहानी नारी सशक्तिकरण को केंद्र में रखकर लिखा गया है। गाँव में महिलाओं के बीच होने वाले माहौल का जीवंत वर्णन कहानी में किया गया है। फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ का जन्म 4 मार्च 1921 को बिहार के अररिया जिले में फारबिसगंज के पास औराही हिंगना गाँव में हुआ था। इन्होंने 1942 के स्वतंत्रता संग्राम तथा नेपाल-राजनीति में सक्रिय भाग लिया था। उस समय यह पूर्णिया जिले में पड़ता था। उनकी शिक्षा नेपाल में हुई थी। उन्होंने ही आंचलिक कथा की नींव रखी। सच्चिदानंद हीरानन्द वात्स्यायन अज्ञेय उनके परम मित्र थे। उनकी रचनाओं में कटिहार के रेलवे स्टेशन का उल्लेख मिलता है। ‘रेणु’ की पहली कहानी ‘नटबावा’ 1936 ई० के साप्ताहिक पत्रिका ‘विश्वामित्र’ में छपी थी। ‘मैला आँचल’ का प्रकाशन 1954 ई० में हुआ था। उसी की भूमिका में ‘रणु’ ने ‘अंचल’ और ‘आंचलिक’ शब्द का प्रयोग किया था। तब से आंचलिक को एक कथा-प्रकार के रूप में स्वीकार कर उसकी प्रभूत चर्चा हुई। #kissakahani #hindistorytelling #hindi #bihar #Renukikahaniyan #kosiriver #purnea #rurallife #story #maithili #HindikkiKahani #love #story #storytime #storytelling #hindistorytelling #manjitthakur #village #hindikikahaniya #mithila #ruralstories #indianfarmer