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कोया मंतेर -1 प्रकृति का सूक्ष्म निरीक्षण करते हुए उसे अपने जीवन में उतारना ही सच्चा कोया पुनेम दर्शन है ! डॉ. सूरज धुर्वे कोया मंतेर -2 सत्य के रास्ते पर चल कर असफल हो जाना भी असत्य के रास्ते पर चल कर सफल होने से हजारों गुना बेहतर है !! डॉ. सूरज धुर्वे कोया मंतेर-3 प्रकृति में जो कुछ भी नष्ट होता है वह दूसरों को जीवन देने के लिए होता हैl हमारे जीवन का भी यही उद्देश्य होना चाहिए ! डॉ सूरज धुर्वे कोया मंतेर-4 प्रकृति के साथ कदम ताल करना ही कोया पुनेम हैं ! डॉ. सूरज धुर्वे कोया मंतेर-5 येर(पानी), तोड़ी(मिट्टी), अड्डी(आग), वड्डी(हवा) और पोकड़ी(आकाश) ही जीवन के आधार स्तंभ हैं । इनकी शुद्धता ही जीवन की शुद्धता है! डॉ.सूरज धुर्वे कोया मंतेर-6 हम सब फड़ापेन में और फड़ापेन हम सब में है यही कोया पुनेमी दर्शन है यानि कि हममें और प्रकृति शक्ति फड़ापेन में कोई अंतर नहीं है हम सब उस प्रकृति रूपी महासागर की एक बूंद हैं! डॉ. सूरज धुर्वे कोया मंतेर-7 मुंद शूल सर्री (त्रिशूल मार्ग) यानी शरीर, मस्तिष्क और विवेक तीनों से सगाओं की सेवा करना ही सबसे अच्छा कोयापुनेमी मार्ग है यह लोहे के त्रिशूल में नही बल्कि आप के अंदर समाहित होना चाहिए ! डॉ सूरज धुर्वे कोया मंतेर-8 दुनिया के सभी धर्म केवल उनके मानने वालों तक ही सीमित होते हैं लेकिन कोया पुनेम पूरी मानवता यहां तक कि अन्य जीवो पर भी शत प्रतिशत लागू होता है ! डॉ. सूरज धुर्वे कोया मंतेर-9 समस्त जीव हमेशा फड़ापेन यानि प्रकृति शक्ति से जुड़े होते हैं और जैसे ही यह जुड़ाव खत्म होता है वे मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं ! डॉ. सूरज धुर्वे कोया मंतेर-10 कोया के रूप में मानव अपूर्ण, अपरिपक्व और अज्ञानी होता है । जब प्रकृति का अनुसरण करते हुए मानव पूर्ण, परिपक्व और ज्ञानी हो जाता है तब वह पोया कहलाता है। अतः कोया को पोया बनाने का सदमार्ग ही कोयापुनेम है ! डॉ. सूरज धुर्वे