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#education #class10science #class10 #reetlevel2 #reetmains #3rdgradescience #3rdgradeteacher #railwayexam मानव नेत्र (Human Eye) कक्षा 10 विज्ञान (NCERT) के अध्याय "मानव नेत्र तथा रंग-बिरंगा संसार" में वर्णित एक महत्वपूर्ण विषय है। यह एक प्राकृतिक प्रकाशीय यंत्र है जो प्रकाश के अपवर्तन के सिद्धांत पर कार्य करता है और हमें रंग-बिरंगे संसार को देखने में सक्षम बनाता है। मानव नेत्र लगभग गोलाकार होता है, इसका व्यास लगभग 2.3 सेमी होता है। यह एक कैमरे की तरह काम करता है। मानव नेत्र की संरचना (Structure of Human Eye) मानव नेत्र की मुख्य संरचना निम्नलिखित भागों से मिलकर बनी होती है: कॉर्निया (Cornea): नेत्र की सबसे बाहरी पारदर्शी परत या खिड़की। प्रकाश इसी से होकर नेत्र में प्रवेश करता है और यहाँ सबसे अधिक अपवर्तन होता है। कंजंक्टिवा (Conjunctiva): आँख के सफेद भाग (स्क्लेरा) को ढकने वाली पतली झिल्ली, जो नेत्र की रक्षा करती है। परितारिका (Iris): नेत्र का रंगीन भाग (काला, भूरा, नीला आदि)। यह पेशीय डायफ्राम है जो पुतली के आकार को नियंत्रित करता है। पुतली (Pupil): परितारिका के बीच का काला गोल छिद्र। यह प्रकाश के मात्रा को नियंत्रित करता है – उजाले में छोटा और अंधेरे में बड़ा हो जाता है। क्रिस्टलीय लेंस (Crystalline Lens): पारदर्शी, उत्तल लेंस जो आकार बदलकर फोकस समायोजित करता है। यह दृष्टि की समंजन क्षमता (Power of Accommodation) प्रदान करता है। काचाभ द्रव (Aqueous Humour): कॉर्निया और लेंस के बीच का पारदर्शी तरल जो नेत्र के आकार को बनाए रखता है। काच द्रव (Vitreous Humour): लेंस और रेटिना के बीच का जेल जैसा तरल जो नेत्र को आकार देता है। दृष्टिपटल या रेटिना (Retina): नेत्र का सबसे पीछे का भाग जहाँ प्रकाश का प्रतिबिंब बनता है। यह प्रकाश संवेदी कोशिकाओं (रोड्स और कोन्स) से बना होता है। रेटिना पर उल्टा और वास्तविक प्रतिबिंब बनता है, जिसे मस्तिष्क सीधा समझता है। दृष्टि तंत्रिका (Optic Nerve): रेटिना से मस्तिष्क तक संकेत पहुँचाने वाली नाड़ी। पीला बिंदु (Yellow Spot / Fovea): रेटिना का सबसे संवेदनशील भाग जहाँ स्पष्ट दृष्टि होती है। अंध बिंदु (Blind Spot): दृष्टि तंत्रिका के निकलने का स्थान जहाँ कोई प्रकाश संवेदी कोशिका नहीं होती, इसलिए यहाँ दृष्टि नहीं होती। कार्यप्रणाली (Working) प्रकाश वस्तु से परावर्तित होकर कॉर्निया से होकर नेत्र में प्रवेश करता है। परितारिका पुतली के आकार को समायोजित करती है। क्रिस्टलीय लेंस प्रकाश को अपवर्तित करके रेटिना पर फोकस करता है। समंजन क्षमता से लेंस मोटा या पतला होकर पास या दूर की वस्तुओं पर फोकस करता है। रेटिना पर बने प्रतिबिंब को दृष्टि तंत्रिका मस्तिष्क तक ले जाती है, जहाँ हम वस्तु को सीधा और स्पष्ट देखते हैं। 1. निकट-दृष्टि दोष (Myopia या Near-sightedness) परिभाषा: व्यक्ति दूर की वस्तुओं को धुंधला देखता है, लेकिन पास की वस्तुएँ स्पष्ट दिखाई देती हैं। कारण: नेत्रगोलक (Eyeball) सामान्य से अधिक लंबा होना। क्रिस्टलीय लेंस या कॉर्निया की वक्रता (curvature) अधिक होना। परिणामस्वरूप, प्रकाश की किरणें रेटिना के सामने फोकस हो जाती हैं। लक्षण: दूर की वस्तुएँ (जैसे ब्लैकबोर्ड, दूर का साइन बोर्ड) धुंधली दिखना; आँखों पर जोर पड़ना, सिरदर्द होना। सुधार: अवतल लेंस (Concave lens) या नकारात्मक शक्ति (-ve power) वाले चश्मे/कॉन्टैक्ट लेंस का उपयोग। यह किरणों को फैलाकर रेटिना पर फोकस करता है। दूर बिंदु (Far Point): सामान्य नेत्र में अनंत, लेकिन मायोपिया में नेत्र के सामने कुछ दूरी पर (जैसे 80 cm या कम)।2. दीर्घ-दृष्टि दोष (Hypermetropia या Far-sightedness) परिभाषा: व्यक्ति पास की वस्तुओं को धुंधला देखता है, लेकिन दूर की वस्तुएँ स्पष्ट दिखाई देती हैं (क्योंकि नेत्र समंजन द्वारा प्रयास करता है)। कारण: नेत्रगोलक सामान्य से छोटा होना। क्रिस्टलीय लेंस या कॉर्निया की वक्रता कम होना। प्रकाश की किरणें रेटिना के पीछे फोकस हो जाती हैं। लक्षण: पास की वस्तुएँ (पढ़ाई, मोबाइल) धुंधली दिखना; आँखों में थकान, सिरदर्द, आँखें मिचमिचाना। सुधार: उत्तल लेंस (Convex lens) या धनात्मक शक्ति (+ve power) वाले चश्मे/कॉन्टैक्ट लेंस। यह किरणों को पहले अपवर्तित करके रेटिना पर फोकस करता है। निकट बिंदु (Near Point): सामान्य नेत्र में 25 cm, लेकिन हाइपरमेट्रोपिया में 25 cm से अधिक दूरी पर।3. जरा-दूरदृष्टिता (Presbyopia या Old age farsightedness) परिभाषा: उम्र बढ़ने (आमतौर पर 40-45 वर्ष के बाद) के कारण निकट की वस्तुओं पर फोकस करने में कठिनाई। कारण: क्रिस्टलीय लेंस की लचीलापन (elasticity) कम होना और ciliary muscles की कमजोरी। समंजन क्षमता घट जाती है। लक्षण: पढ़ते समय किताब को दूर रखना पड़ना, पास की चीजें धुंधली दिखना, आँखों में थकान। सुधार: द्विफोकस लेंस (Bifocal lens) – ऊपरी भाग दूर दृष्टि के लिए (कभी-कभी कोई नहीं) और निचला भाग निकट दृष्टि के लिए उत्तल लेंस। आजकल प्रोग्रेसिव लेंस या अलग-अलग चश्मे भी इस्तेमाल होते हैं।