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बन्ना थे मत झगड़ो बन्ना तोरण आइ थे मत झगड़ो बन्ना तोरण आइ थे मत झगड़ो तोरण रो झगड़ो मायां में तोरण रो झगड़ो मायां में बन्ना मायां में आइ थे मत झगड़ो बन्ना मायां में आइ थे मत झगड़ो बन्ना मायां में आइ थे मत झगड़ो मायां रो झगड़ो चंवर्यां में मायां रो झगड़ो चंवर्यां में बन्ना चंवर्यां में आइ थे मत झगड़ो बन्ना चंवर्यां में आइ थे मत झगड़ो बन्ना चंवर्यां में आइ थे मत झगड़ो चंवर्यां रो झगड़ो डेरां में चंवर्यां रो झगड़ो डेरां में बन्ना डेरा में आइ थे मत झगड़ो बन्ना डेरां में आइ थे मत झगड़ो बन्ना डेरां में आइ थे मत झगड़ो डेरां रो झगड़ो मैलां में डेरां रो झगड़ो मैलां में बन्ना मैलां में आइ थे मत झगड़ो बन्ना मैलां में आइ थे मत झगड़ो बन्ना मैलां में आइ थे मत झगड़ो मैलां रो झगड़ो डोड्यां में मैलां रो झगड़ो डोड्यां में बन्ना डोड्यां में आइ थे मत झगड़ो बन्ना डोड्यां में आइ थे मत झगड़ो बन्ना डोड्यां में आइ थे मत झगड़ो डोड्यां रो झगड़ो तोरण में डोड्यां रो झगड़ो तोरण में बन्ना तोरण आइ थे मत झगड़ो बन्ना तोरण आइ थे मत झगड़ो बन्ना तोरण आइ थे मत झगड़ो तोरण रो झगड़ो मायां में तोरण रो झगड़ो मायां में बन्ना मायां में आइ थे मत झगड़ो यह राजस्थानी लोकगीत “बन्ना थे मत झगड़ो” विवाह परंपरा में गाए जाने वाले हल्के-फुल्के हास-परिहास और स्नेहपूर्ण माहौल को दर्शाता है। इसमें बार-बार दोहराए जाने वाले पंक्ति-पैटर्न के माध्यम से एक चक्र बनाया गया है—तोरण से मायां, मायां से चंवर्या, चंवर्या से डेरा, डेरे से मैलां, मैलां से डोड्यां और फिर वापस तोरण तक। यह चक्राकार संरचना दर्शाती है कि पूरा विवाह-संस्कार एक निरंतर जुड़ी हुई प्रक्रिया है, जहाँ हर स्थान, हर रस्म का महत्व है। गीत में ‘झगड़ो मत’ कहना वास्तव में झगड़े की मनाही नहीं, बल्कि प्रेम-स्नेह में कही गई छेड़छाड़ है, जिससे माहौल आनंदमय बनता है। यह गीत समुदाय की सहभागिता, रिवाजों की निरंतरता और पारिवारिक बंधन को मजबूत करता है। इसमें हास्य, अपनापन और पारंपरिक रस्मों का आदर एक साथ समाहित है। इस प्रकार, यह गीत सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और विवाह की सांस्कृतिक गहराई को व्यक्त करता है।