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उत्तराखण्ड जल-संस्थान एवं पेयजल निगम में 15–30 वर्षों से आउटसोर्स ठेका प्रथा के तहत कार्यरत कर्मचारियों ने अपनी लंबित समस्याओं के समाधान के लिए सरकार से शीघ्र हस्तक्षेप की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि कोरोना काल सहित हर परिस्थिति में उन्होंने निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित की, लेकिन आज भी उन्हें मात्र 5 से 12 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिल रहा है, जो महंगाई के दौर में बेहद कम है। संगठन की प्रमुख मांगों में नियमितीकरण, ‘उपनल’ कर्मचारियों की तर्ज पर समान कार्य के लिए समान वेतनमान, तथा पौड़ी गढ़वाल शाखा से बिना नोटिस हटाए गए 38 कर्मचारियों की पुनः बहाली व बकाया वेतन भुगतान शामिल है। जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजते हुए संगठन पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि मांगों पर सकारात्मक निर्णय न होने की स्थिति में प्रदेशव्यापी आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। ज्ञापन देने वालों में जल संस्थान संविदा श्रमिक संघ के प्रांतीय महामंत्री मंगलेश लखेड़ा, गढ़वाल मंडल अध्यक्ष चंद्र मोहन खत्री, शाखा अध्यक्ष पौड़ी सुरजीत डोबरियाल, कोटद्वार शाखा सचिव यशवंत सिंह नेगी, मीडिया प्रभारी रुद्रप्रयाग अनुराग पंवार, कोषाध्यक्ष रुद्रप्रयाग शाखा संतोष भट्ट, पौड़ी का सचिव कुलदीप रावत, कोषाध्यक्ष पौड़ी पौड़ी शाखा शंभू प्रसाद पोखरियाल सहित बड़ी संख्या में अन्य आउट सोर्स कर्मी मौजूद रहे।