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श्रीब्रह्मा जी कह रहे हैं कि मेरे द्वारा दिए अधिकारों से देवतागण विवेक रहित होकर भगवान के प्रति अपराध करते हैं। और सेवक के द्वारा किए गए अपराध स्वामी में संचारित होते हैं अतः ये सारे मेरे ही अपराध है। कथा ___ इन्द्रने गोवर्धन-यज्ञके समय मूसलाधार वर्षा की और प्रभुके साथ युद्ध किया। भगवान के पारिजात वृक्ष को पृथ्वी में ले जाने पर इंद्र ने उनसे युद्ध किया। वरुणने श्रीकृष्णके पिता गोपराज श्रीनन्द महाराजका अपहरण किया। बाणासुरने गायोंको नहीं लौटाया, यमराजने श्रीकृष्णके गुरु-पुत्रको अनुचितरूपसे संहार किया। कुबेरने अपने अनुचर शंखचूड़के द्वारा भगवान्के प्रति अपराध किया है। पातालके दानवगण भी स्वभावतः वैष्णव-द्रोही हैंउनके लोकके कालियके बन्धु-बान्धव सर्प भी महाक्रोधी और दुष्ट है। अभी कुछ ही दिन पहले मैंने स्वयं श्रीवृन्दावनमें जाकर श्रीकृष्णके वनभोजनके समयमें उनके द्वारा पालित बछड़े और सभी गोपबालकोंको अपनी माया द्वारा हरण कर लिया था। कथा___ ब्रह्म विमोहन कथा ब्रह्माजी कह रहे हैं कि __श्रीमहादेव ही भगवान् श्रीविष्णुके कृपापात्र हैं, क्योंकि वे भगवान्के सखाके रूपमें विख्यात हैं। अतएव इस ब्रह्माण्डमें उनके समान भगवान्का कृपापात्र और कोई भी नहीं देखा जाता है। #gaudiyavaishnav #harikatha #srilaprabhupada