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🎵 हिंदी रोमांटिक गीत 🎵 मुखड़ा: तुम आज चलो रमना झील के किनारे किसी और के संग, मैं अकेला ही चलता रहूँ, दो क़दमों की रेखाएँ खींचता रहूँ इस खुद से बने, दूर-दराज़ के बंग में… अंतरा 1: यहाँ उतरी है हेमंत की सुनहरी-सी एक सुबह, सुनहरी रोशनी में झरते पत्ते बुनते हैं बीते हुए दिन। कोहरे की नीली चादर ओढ़े, सब रंगीन है, और मैं— बेरंग इस फीकी सुबह में भी किसी रंग में डूबा हूँ कहीं… मुखड़ा (दोहराव): तुम आज चलो रमना झील के किनारे किसी और के संग, मैं अकेला ही चलता रहूँ, दो क़दमों की रेखाएँ खींचता रहूँ इस खुद से बने, दूर-दराज़ के बंग में… अंतरा 2: इस निर्दयी दुनिया की सड़क पर महाकाल चलता जाता है, ना चाहूँ फिर भी हर रोज़ उसके साथ अपने क़दमों की लय मिला लेता हूँ। न जाने ये रास्ता किस मोड़ तक ले जाएगा, फिर कभी मिलेंगे भी या नहीं— यह भी नहीं जानता… अंतरा 3: फिर भी सजा के बैठा हूँ रंगों से भरी एक टोकरी, जहाँ पीली सरसों की मिट्टी ने ज़िंदगी की रेखा खींची है। उसी रेखा के रंगों में रंगी जामदानी की वो साड़ी— क्या आज भी तुम्हारे बदन से लिपटी हुई है…? आउट्रो: तुम दूर कहीं, मैं यहीं ठहरा, दो क़दमों के बीच पूरा एक जीवन लिखता हुआ… #গান #music #বাংলাদেশ #song #india #hindisong