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आज का व्लॉग कुछ अलग था यारों… आज मैंने बाहर की दुनिया को थोड़ा सा बंद करके, सिर्फ और सिर्फ देसी खाने की दुनिया में कदम रखा। वो भी पुराने जमाने वाले, गांव वाले, नानी-दादी के हाथों वाले अंदाज में। कोई फैंसी प्लेटिंग नहीं, कोई इंस्टाग्राम वाला सजावट नहीं – बस सच्चा, सादा, घी से चमकता हुआ, प्याज से महकता हुआ और रोटी से प्यार करने वाला खाना। सबसे पहले बात करते हैं उस दाल की। अरहर की दाल, थोड़ी सी मूंग मिलाकर पकाई हुई। पानी में उबाल आया तो बस हल्का नमक, हल्दी और एक हरी मिर्च डाली। धीमी आंच पर पकने दी जितनी देर में रोटी बेली जा रही थी। फिर आया असली जादू का वक्त – तड़का! कड़ाही में देसी गाय का घी गर्म किया, उसमें जीरा छोड़ा, थोड़ी सी हींग डाली, लहसुन के 4-5 कली चटकाईं, सूखी लाल मिर्च तोड़ी और आखिरी में वो सबसे प्यारा वाला काम – ढेर सारा घी ऊपर से डाल दिया। जैसे ही घी दाल में गिरा, पूरे घर में वो सुगंध फैल गई कि पड़ोसी भी पूछने लगे – "भाई आज क्या बनाया है?" अब आया सबसे देसी मोमेंट – प्याज़! हाँ यारों, कच्चा प्याज़। मैंने बाजार से एकदम ताजा, मोटा-मोटा, चमकदार प्याज़ लिया। उसे छीलते वक्त आंखों में आंसू आ गए, लेकिन वो आंसू खुशी के थे। फिर हाथ से ऐसे तोड़ा जैसे कोई पुराना दोस्त मिल गया हो। वो क्रंची आवाज, वो तीखी खुशबू… उफ्फ! एक टुकड़ा उठाया, दाल में डुबोया और मुंह में डाला। स्वाद ऐसा कि लगा जैसे बचपन वापस आ गया। दाल की गर्मी, घी की मलाई और प्याज़ की वो कड़वाहट – तीनों मिलकर एक ऐसा कॉम्बिनेशन बना दिया कि बस लगातार खाते रहने का मन कर रहा था। फिर आईं रोटियां। गेहूं का आटा, थोड़ा सा नमक, थोड़ा सा तेल और मेरे हाथों से बेली गईं – मोटी, मुलायम, घरेलू रोटियां। तवे पर रखीं, पलटा, फिर सीधे आंच पर डाला और फुलाया। जैसे ही रोटी फूली, मैंने तुरंत देसी घी लिया और… चिपड़ा! हाँ चिपड़ा! इतना घी लगाया कि रोटी चमकने लगी, जैसे कोई सोने की थाली हो। घी पिघला, रोटी में समा गया और हर तरफ फैल गया। फिर उस गर्म रोटी पर दाल डाली, प्याज़ का टुकड़ा रखा, थोड़ा सा नमक छिड़का और लपेट के पहला कौर लिया। पहला कौर मुंह में गया तो आंखें अपने आप बंद हो गईं। वो घी का स्वाद जीभ पर फैला, दाल की गहराई आई, प्याज़ ने थोड़ा झटका दिया और रोटी ने सबको गले लगा लिया। हर कौर के साथ एक अलग एहसास – कभी मां की याद, कभी गांव की शाम, कभी बचपन में छत पर बैठकर खाना, कभी दादी के साथ रसोई में बैठना। मैं धीरे-धीरे खा रहा था, कोई जल्दबाजी नहीं, कोई फोन नहीं, बस खाना और जीना। थाली खत्म होने तक मैंने 4 रोटियां खा लीं। हर रोटी पर घी चिपड़ा, हर कौर में प्याज़, हर चम्मच में दाल। आखिरी कौर लिया तो लगा कि आज मैंने सिर्फ खाना नहीं खाया, आज मैंने जिंदगी का एक छोटा सा टुकड़ा फिर से जी लिया। यारों, आज के इस व्लॉग में मैं बस यही कहना चाहता हूं – हम कितना भी भाग लें, कितना भी फैंसी हो जाएं, लेकिन असली सुकून तो इन छोटी-छोटी देसी चीजों में है। एक सादा सा खाना, घी से भरी रोटी, कच्चा प्याज़ तोड़कर खाना, दाल में घी डालकर उसकी खुशबू लेना… ये सब मिलकर हमें वो खुशी देते हैं जो महंगे रेस्टोरेंट में भी नहीं मिलती। तो अगली बार जब भी मन करे कि कुछ देसी चाहिए, कुछ पुराना चाहिए, कुछ सच्चा चाहिए – तो बस यही कर लेना: दाल पकाओ उसमें ढेर सारा घी डालो रोटी बेलो, फुलाओ, घी चिपड़ो प्याज़ हाथ से तोड़ो और खाओ… दिल से खाओ ऐसा खाने से न सिर्फ पेट भरता है, दिल भी भर जाता है। अगर आपको भी ऐसे देसी खाने का शौक है तो कमेंट में जरूर बताना – आपका सबसे फेवरेट देसी कॉम्बिनेशन क्या है? दाल-रोटी? रोटी-घी-प्याज़? या कुछ और स्पेशल? वीडियो पसंद आए तो लाइक ठोक दो, दोस्तों के साथ शेयर करो और चैनल को सब्सक्राइब करके बेल आइकन दबा दो ताकि अगला देसी व्लॉग सबसे पहले तुम तक पहुंचे। मिलते हैं अगले व्लॉग में… तब तक खाते रहो, हंसते रहो, देसी अंदाज में जिंदगी जीते रहो! #DesiKhana #GheeKaJadoo #PyazTodKe #RotiWithGhee #AsliDesiSwad #GharKaKhana #VillageVibes #DesiFood #PureDesi #GheeLover #IndianFoodLovers #DesiStyle #FoodVlog #SimpleFood #RealHappiness #DesiVlog #FoodieIndia #Gharkakhana #DesiSwag #DesiAandaz #PyazKiKhushboo #RotiLove #DalChawalVibes #DesiFoodVlog #VlogLife