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#biharbudget #administration #Samrat Chaudhary #BPSC #SSC #railway #banking #lokprahari1 बिहार बजट विश्लेषण 2025-26: मुख्य बिंदु और अंतर्दृष्टि बिहार के वित्त मंत्री श्री सम्राट चौधरी ने 3 मार्च, 2025 को वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए राज्य का बजट पेश किया। यह दस्तावेज़ बजट के प्रमुख आंकड़ों, नीतिगत घोषणाओं और आर्थिक रुझानों का संक्षिप्त विश्लेषण प्रदान करता है। बजट की मुख्य झलकियाँ (2025-26) सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP): 2025-26 के लिए बिहार का GSDP (वर्तमान कीमतों पर) 10.97 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो 2024-25 की तुलना में 22% की वृद्धि दर्शाता है। कुल व्यय (ऋण पुनर्भुगतान को छोड़कर): 2,94,075 करोड़ रुपये अनुमानित है, जो 2024-25 के संशोधित अनुमानों (RE) से 10% कम है। इसके अतिरिक्त, राज्य द्वारा 22,820 करोड़ रुपये का ऋण चुकाया जाएगा। कुल प्राप्तियां (उधार को छोड़कर): 2,61,357 करोड़ रुपये अनुमानित हैं, जो 2024-25 के संशोधित अनुमान से 7% अधिक है। राजस्व अधिशेष (Revenue Surplus): GSDP का 0.8% (8,831 करोड़ रुपये) होने का अनुमान है। यह 2024-25 में 4.1% के राजस्व घाटे की तुलना में एक महत्वपूर्ण सुधार है। राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit): GSDP के 3% (32,718 करोड़ रुपये) पर लक्षित है। 2024-25 (RE) में यह 9.2% रहने का अनुमान था। प्रमुख नीतिगत घोषणाएं और बुनियादी ढांचा बजट में महिला कल्याण और बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष जोर दिया गया है: महिला कल्याण: पटना में एक 'महिला हाट' की स्थापना। सभी जिलों में 'पिंक टॉयलेट्स' का निर्माण। प्रमुख शहरी क्षेत्रों में 'पिंक बसें' शुरू की जाएंगी, जिनमें महिला ड्राइवर और कंडक्टर तैनात होंगी। बुनियादी ढांचा: सुलतानगंज (भागलपुर) और रक्सौल (पूर्वी चंपारण) में नए 'ग्रीनफील्ड हवाई अड्डों' के निर्माण की घोषणा। कृषि: राज्य के सभी अनुमंडलों (sub-divisions) और प्रखंडों (blocks) में चरणबद्ध तरीके से कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं की स्थापना। आर्थिक स्थिति और क्षेत्रीय प्रदर्शन विकास दर: 2023-24 में बिहार की GSDP (स्थिर कीमतों पर) 9.2% की दर से बढ़ने का अनुमान है, जो भारत की राष्ट्रीय GDP वृद्धि के बराबर है। क्षेत्रवार योगदान (2023-24): सेवा क्षेत्र: 58% (वृद्धि: 10.8%) कृषि: 24% (वृद्धि: 5.7%) विनिर्माण (Manufacturing): 18% (वृद्धि: 8.2%) प्रति व्यक्ति GSDP: 2023-24 में बिहार की प्रति व्यक्ति GSDP 66,828 रुपये अनुमानित है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 13% अधिक है। व्यय और प्राप्तियों का विश्लेषण प्रतिबद्ध व्यय (Committed Expenditure) राज्य के बजट का एक बड़ा हिस्सा वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान पर खर्च होता है: वेतन: 51,690 करोड़ रुपये (राजस्व प्राप्तियों का 20%) पेंशन: 33,389 करोड़ रुपये (राजस्व प्राप्तियों का 13%) ब्याज भुगतान: 23,014 करोड़ रुपये (राजस्व प्राप्तियों का 9%) राजस्व के स्रोत (2025-26) राज्य की कुल राजस्व प्राप्तियों (2,60,831 करोड़ रुपये) में केंद्र का हिस्सा 74% है। केंद्रीय करों में हिस्सा: 1,38,516 करोड़ रुपये (कुल राजस्व का 53%) केंद्र से सहायता अनुदान: 54,575 करोड़ रुपये (कुल राजस्व का 21%) राज्य का अपना कर राजस्व: 59,520 करोड़ रुपये (कुल राजस्व का 23%) राज्य के स्वयं के कर के प्रमुख स्रोत अनुमानित राशि (करोड़ रुपये) 2024-25 (RE) से वृद्धि स्टेट GST (SGST) 34,009 8% बिक्री कर/वैट (VAT) 11,200 12% स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण शुल्क 8,250 10% वाहनों पर कर 4,070 10% क्षेत्र-वार आवंटन (Sector-wise Allocation) बिहार ने कुछ प्रमुख क्षेत्रों में अन्य राज्यों के औसत की तुलना में अधिक आवंटन किया है: क्षेत्र 2025-26 आवंटन (करोड़ रु.) कुल व्यय का % अन्य राज्यों का औसत (2024-25) शिक्षा, खेल, कला और संस्कृति 63,335 21.7% 15.0% ग्रामीण विकास 30,150 10.3% 5.1% स्वास्थ्य और परिवार कल्याण 19,184 6.6% 6.2% पुलिस 14,653 4% - ऊर्जा (बिजली सब्सिडी सहित) 13,401 36% (कमी)* - सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण 9,238 36% (वृद्धि)* 3.4% *संशोधित अनुमान 2024-25 की तुलना में परिवर्तन ऋण और राजकोषीय उत्तरदायित्व बकाया ऋण (Outstanding Debt): 2025-26 के अंत तक बकाया ऋण GSDP का 37% होने का अनुमान है। सरकारी गारंटी: 31 मार्च, 2024 तक राज्य की बकाया गारंटी 26,715 करोड़ रुपये (GSDP का 3.1%) थी, जिसका 63% बिजली क्षेत्र से संबंधित है। संशोधित अनुमानों की विश्वसनीयता: विश्लेषण नोट करता है कि बिहार में संशोधित अनुमान अक्सर अवास्तविक होते हैं, जिससे राजकोषीय घाटा बजट सीमा (3%) से काफी ऊपर (जैसे 2024-25 में 9.2%) चला जाता है। राज्य सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (SPSEs) की स्थिति 31 मार्च, 2023 तक बिहार में 76 SPSEs थे। 59 उद्यमों ने समय पर वित्तीय विवरण जमा नहीं किए, जिसके परिणामस्वरूप 1,133 खाते लंबित हैं। 15 कार्यरत उद्यमों को 2,848 करोड़ रुपये का कुल घाटा हुआ, जिसमें से 98% घाटा केवल पांच उद्यमों के कारण है।