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यह वीडियो "Garbh Sanskar" (गर्भ संस्कार) विषय पर आधारित है, जिसे 'आओ गढ़ें संस्कारवान पीढ़ी (बिहार)' चैनल द्वारा प्रस्तुत किया गया है। इस वीडियो में बताया गया है कि कैसे गर्भावस्था के दौरान दिए गए संस्कार आने वाली पीढ़ी और समाज की नींव रखते हैं। वीडियो का संक्षिप्त विवरण : संस्कारों की नींव: वीडियो में बताया गया है कि बच्चे के व्यक्तित्व और संस्कारों की नींव गर्भ में ही पड़ जाती है। शिशु के मस्तिष्क का लगभग 80% विकास गर्भ के दौरान ही होता है, जबकि जन्म के बाद केवल 20% सुधार ही संभव है [00:32]। प्राचीन और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण: वक्ता उल्लेख करती हैं कि अथर्ववेद के अनुसार 'गर्भ' ही संस्कारों का पहला विद्यालय है [01:06]। आधुनिक विज्ञान और WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि माँ का आहार, व्यवहार और विचार बच्चे के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास के लिए जिम्मेदार होते हैं [02:04]। रानी मदालसा का उदाहरण: वीडियो में मार्कंडेय पुराण की रानी मदालसा का उदाहरण दिया गया है, जिन्होंने अपनी जीवनशैली और विचारों को बदलकर अपने बच्चों को ब्रह्मज्ञानी और प्रतापी राजा बनाया [01:32]। गर्भवती माँ की दिनचर्या: गर्भावस्था के 9 महीनों को 'नवरात्रि' की तरह पवित्र माना गया है। इस दौरान माँ को निम्नलिखित का पालन करना चाहिए [03:15]: योग और प्राणायाम: शारीरिक स्वास्थ्य के लिए [03:25]। जप, ध्यान और यज्ञ: मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए। स्वाध्याय: प्रेरणादायक पुस्तकों का अध्ययन और सत्संग सुनना, क्योंकि शिशु का अवचेतन मन (Subconscious Mind) माँ से जुड़ा होता है [03:45]। परिवार और पिता की भूमिका: केवल माँ ही नहीं, बल्कि पिता और परिवार का भी यह कर्तव्य है कि वे घर का माहौल सकारात्मक, शालीन और आध्यात्मिक बनाए रखें ताकि शिशु का श्रेष्ठ निर्माण हो सके [02:50]। निष्कर्ष: यह वीडियो संदेश देता है कि यदि हर घर में गर्भ संस्कार के नियमों का पालन किया जाए, तो एक नैतिक, संवेदनशील और जागरूक पीढ़ी का निर्माण संभव है [04:30]।