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( part -5 ) स्थितिज ऊर्जा class 9th science chapter-10 ( कार्य तथा ऊर्जा ) स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy) किसी वस्तु में उसकी स्थिति (Position) या उसके आकार (Shape) में परिवर्तन के कारण जो ऊर्जा संचित होती है, उसे स्थितिज ऊर्जा कहते हैं। उदाहरण: किसी ऊँचाई पर रखा पत्थर, धनुष की खिंची हुई डोरी, या घड़ी की लपेटी हुई स्प्रिंग। स्थितिज ऊर्जा के प्रकार 1. गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा (Gravitational Potential Energy) जब किसी वस्तु को पृथ्वी की सतह से ऊपर उठाया जाता है, तो गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध कार्य करना पड़ता है। यह कार्य उस वस्तु में 'गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा' के रूप में जमा हो जाता है। 2. प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा (Elastic Potential Energy) जब किसी वस्तु (जैसे स्प्रिंग या रबड़) को खींचा या दबाया जाता है, तो उसके आकार में बदलाव आता है। इस खिंचाव या दबाव के कारण संचित ऊर्जा को 'प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा' कहते हैं। गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा के सूत्र का निगमन (Derivation) मान लीजिए: वस्तु का द्रव्यमान = m वस्तु को उठाई गई ऊँचाई = h गुरुत्वीय त्वरण = g व्युत्पत्ति के चरण: वस्तु को ऊपर उठाने के लिए आवश्यक न्यूनतम बल, वस्तु के भार के बराबर होता है: बल (F) = m \times g किया गया कार्य (W) का सूत्र होता है: यहाँ विस्थापन, ऊँचाई (h) के बराबर है। इसलिए: W = (m \times g) \times h W = mgh