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#tohananews #shivatemple #local18 परमजीत सिंह/टोहाना: हरियाणा का इतिहास विश्व भर में विख्यात है और इस इतिहास का एक महत्वपूर्ण अंग यहां के मंदिर भी हैं, जो अपनी अनोखी मान्यताओं के लिए पूरे देश में जाने जाते हैं. इसी कड़ी में आपको टोहाना के श्री प्राचीन पंचमुखी शिव मंदिर जोहड़ वाला के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां सावन महीने के सोमवार को हजारों की संख्या में श्रद्धालु माथा टेकने आते हैं. प्राचीन पंचमुखी शिव मंदिर जोहड़ वाला से श्रद्धालुओं की अपार आस्था जुड़ी है. माना जाता है कि श्रद्धालु सच्चे मन से जो भी मन्नत मांगते हैं, वह पूरी होती है. सावन महीने के सोमवार को हजारों की संख्या में श्रद्धालु इस मंदिर में माथा टेकने आते हैं और शिवलिंग पर भांग, धतूरा, बेलपत्र के अलावा दूध दही और जल भी चढ़ाते हैं. जानकारी के अनुसार, टोहाना का यह मंदिर लगभग 400 साल पुराना है. यहां पर एक विशाल पानी का जोहड़ हुआ करता था, जिसके किनारे शिव जी का मंदिर है. धीरे-धीरे जोहड़ में मिट्टी डालकर मंदिर को विशाल रूप दिया गया. इस कारण जोहड़ लुप्त हो गया, लेकिन जोहड़ किनारे विशाल बरगद व पीपल के पेड़ आज भी मंदिर प्रांगण में हैं. मिलता है मनोवांछित फल मंदिर के मुख्य पुजारी दिलीप कुमार शास्त्री ने बताया कि यह मंदिर लगभग 400 वर्ष पुराना है. यह सिद्ध स्थान है. श्री पंचमुखी महादेव की आराधना और जलाभिषेक करने से भगवान भक्तों को मनोवांछित फल देते हैं. शहर के लोगों की इस मंदिर से गहरी आस्था जुड़ी हुई है .ये टोहाना का सिद्ध मंदिर है, जहां जो व्यक्ति शुद्ध मन से महादेव के समक्ष प्रार्थना करता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है. पेड़ों से जोहड़ की पहचान आगे बताया कि 60 वर्ष पहले यहां पर एक पानी का जोहड़ हुआ करता था. जिसके किनारे पर साधु-संत कुटिया बनाकर रहते थे. धीरे-धीरे महादेव के मंदिर का विस्तार होता गया, जिस कारण जोहड़ समाप्त हो गया. फिर भी उससे जुड़े कुछ पुराने बरगद, पीपल के पेड़ आज भी मंदिर में मौजूद हैं. बताया जाता है कि ये पेड़ लगभग 400 वर्ष पुराने हैं, जो कि जोहड़ की पहचान हैं.