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योगसूत्र समाधि पाद – सूत्र 1.19 और 1.20** महर्षि पतंजलि बताते हैं— कुछ योगियों में असम्प्रज्ञात समाधि पूर्वजन्मीय संस्कारों से स्वतः प्रकट होती है — “भवप्रत्ययो विदेहप्रकृतिलयानाम्” 🔹 और सामान्य साधकों के लिए मार्ग है — श्रद्धा, वीर्य, स्मृति, समाधि और प्रज्ञा — “श्रद्धावीर्यस्मृतिसमाधिप्रज्ञापूर्वक इतरेषाम्” इस गहन ध्यान और हीलिंग सत्र में आप अनुभव करेंगे— ✨ अपने संस्कारों की आंतरिक स्वीकृति ✨ पुरुषार्थ की जागृति ✨ श्रद्धा की स्थापना ✨ साधना की तीव्रता ✨ साक्षीभाव की स्पष्टता यह ध्यान विशेष रूप से उन साधकों के लिए है जो यह जानना चाहते हैं— क्या मैं भी समाधि की दिशा में बढ़ सकता/सकती हूँ? योग का उत्तर स्पष्ट है — यदि पूर्व संस्कार नहीं, तो वर्तमान पुरुषार्थ पर्याप्त है। 🌿 संदेश-समाधि समय की नहीं, साधना की तीव्रता की देन है। मार्ग सबके लिए खुला है —बस श्रद्धा और निरंतरता चाहिए। 🔔 यदि यह साधना आपको भीतर से प्रेरित करे, तो अपनी अनुभूति कमेंट में साझा करें। चैनल को सब्सक्राइब करें। Tags #योगसूत्र 1.19, #योगसूत्र 1.20, #समाधि पाद, #भवप्रत्यय, #उपायप्रत्यय, #श्रद्धा वीर्य स्मृति, #गहन ध्यान, #ट्रान्स ध्यान, #पतंजलि योगदर्शन, #आध्यात्मिक साधना, #Sudhi Gyan Sadhana -