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चूंदड़ी गीत रातां फूलां रंग घणो जी रातां फूलां रंग घणो जी धोळा ए चम्पेली रा फूल रातड़ल्या रंग चूंदड़ल्यां धोळा ए चम्पेली रा फूल रातड़ल्या रंग चूंदड़ल्यां घर आया सूरज जी पूछे घर आया चांदा जी पूछे गौरी ये थाने बालो कूण रातड़ल्या रंग चूंदड़ल्यां सूवागण थाने प्यारो कूण रातड़ल्या रंग चूंदड़ल्यां बालपणा म्हारी मायड़ प्यारी बालपणा म्हारी मायड़ प्यारी पाछे ये मारो जणिहर बाप रातड़ल्या रंग चूंदड़ल्यां पाछे ये मारो जणिहर बाप रातड़ल्या रंग चूंदड़ल्यां आणे-टाणे मारो बीरो प्यारो आणे-टाणे मारा बीरोसा प्यारा भावज ये मारे लागे पांव रातड़ल्या रंग चूंदड़ल्यां भावज ये मारे लागे पांव रातड़ल्या रंग चूंदड़ल्यां या बातां सूं गौरी खारा लागो या बातां सूं गौरी खारा लागो देस्याँ ये थानै पियर पुंचाय रातड़ल्या रंग चूंदड़ल्यां देस्याँ ये थानै पियर पुंचाय रातड़ल्या रंग चूंदड़ल्यां पैला प्यारा म्हारा सुसराजी लागे पैला प्यारा म्हारा सुसराजी लागे दूजो तो सासूजी रा राज रातड़ल्या रंग चूंदड़ल्यां दूजो तो सासूजी रा राज रातड़ल्या रंग चूंदड़ल्यां भर जोबन केसरिया प्यारा भर जोबन केसरिया प्यारा पाछे जी जणियोड़ो पूत रातड़ल्या रंग चूंदड़ल्यां पाछे जी जणियोड़ो पूत रातड़ल्या रंग चूंदड़ल्यां या बातां सू गौरी प्यारा लागो या बातां सू गौरी बाला लागो राखां ये थानै हिवड़े लगाय रातड़ल्या रंग चूंदड़ल्यां राखां ये थानै हिवड़े लगाय रातड़ल्या रंग चूंदड़ल्यां राजस्थानी संस्कृति में विवाह के अवसर पर प्रातःकाल गाया जाने वाला "चूंदड़ी गीत" स्त्री की पारंपरिक भावना, सौंदर्य और उसके रिश्तों की आत्मीयता को दर्शाता है। गीत में “रातड़ल्या रंग चूंदड़ल्यां” एक प्रतीक बनकर उभरता है, जो स्त्री की लाल चूंदड़ी (ओढ़नी) के रंग के साथ उसके भावनात्मक संसार को जोड़ता है। गीत की पंक्तियाँ चम्पा जैसे फूलों की उपमा से नायिका की सुंदरता को निखारती हैं। यह गीत स्त्री के जीवन के विभिन्न संबंधों – माँ, पिता, भाई, भाभी, पिया, सास और पुत्र – के साथ उसके स्नेह और सम्मान को उजागर करता है। भावज (भाभी) को प्रणाम करना, भाई का प्यार, ससुराल का सम्मान और पिया के प्रति आकर्षण गीत को भावपूर्ण बनाता है। यह गीत केवल सौंदर्य का नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव, रिश्तों की गहराई और महिला जीवन की संवेदनाओं का लोक अभिव्यक्तिकरण है।