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🎵 D# तानपुरा और तबला के साथ राग बिलावल – विस्तृत विवेचन भारतीय शास्त्रीय संगीत में राग बिलावल का विशेष स्थान है। यह राग अपनी सरलता, मधुरता और शुद्ध स्वरों के कारण प्रारंभिक विद्यार्थियों से लेकर उच्च स्तर के कलाकारों तक सभी के लिए अत्यंत प्रिय है। जब D# (रे#) तानपुरा की झंकार और तबला की लय के साथ राग बिलावल का गायन या वादन किया जाता है, तब इसकी सौंदर्यात्मक अनुभूति और भी गहरी हो जाती है। 🎶 राग बिलावल का परिचय राग बिलावल ठाठ बिलावल से उत्पन्न राग है। इसमें सभी स्वर शुद्ध प्रयोग होते हैं। स्वर संरचना आरोह: सा रे ग म प ध नि सां अवरोह: सां नि ध प म ग रे सा वादी स्वर: ध संवादी स्वर: ग जाति: संपूर्ण–संपूर्ण गायन समय: प्रातःकाल (सूर्योदय के बाद) राग बिलावल का स्वभाव शांत, प्रसन्न, उज्ज्वल और सात्त्विक होता है। यह राग मन में आशा, शांति और स्थिरता का भाव उत्पन्न करता है। 🎵 D# तानपुरा का महत्व जब राग बिलावल को D# स्केल (रे# = सा) में गाया या बजाया जाता है, तो तानपुरा उसी स्केल में ट्यून किया जाता है। D# तानपुरा के सामान्य स्वर सा (D#) प (A#) सा (D#) म (G#) (कभी-कभी) D# स्केल का तानपुरा मध्यम ऊँचाई की पिच प्रदान करता है, जो कई गायकों के लिए बहुत संतुलित और आरामदायक होती है। इसकी ध्वनि न अधिक भारी होती है और न ही बहुत तीखी, जिससे स्वर साधना में स्थिरता बनी रहती है। तानपुरे की निरंतर झंकार राग के स्वरों को सहारा देती है और गायक या वादक को सही स्वर में टिके रहने में मदद करती है। 🎼 राग बिलावल का अभ्यास D# तानपुरा पर D# तानपुरा के साथ राग बिलावल का अभ्यास करते समय निम्न बातों पर ध्यान देना चाहिए: सा पर विशेष पकड़ – तानपुरे के सा के साथ स्वर का पूर्ण मेल रे और ग की स्पष्टता – क्योंकि सभी स्वर शुद्ध हैं मध्यम और धैवत का भावपूर्ण प्रयोग आलाप में धीरे-धीरे विस्तार आलाप उदाहरण (D# स्केल में) सा – रे – ग – म – ग – रे – सा सा – म – प – ध – प – म – ग – रे – सा इस प्रकार के सरल आलाप से राग का स्वरूप स्पष्ट होता है। 🥁 तबला और राग बिलावल राग बिलावल में तबला की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यह राग चूँकि शांत और सौम्य है, इसलिए इसमें तबले की लय भी संतुलित और मर्यादित रखी जाती है। प्रचलित तालें तीनताल (16 मात्रा) एकताल (12 मात्रा) केहरवा (8 मात्रा) – हल्के और भजनात्मक प्रयोग में तीनताल का ठेका धा धा | ता ता | किट धा | धा धा धा धा | ता ता | किट धा | धा ता जब D# तानपुरा की स्थिर ध्वनि के साथ तबला इस ठेके में चलता है, तब राग बिलावल की गरिमा और भी निखर कर सामने आती है। 🎤 बंदिश और विस्तार राग बिलावल में बंदिशें प्रायः विलंबित और मध्य लय में गाई जाती हैं। बंदिश के माध्यम से राग के प्रमुख स्वरों (ध और ग) को उभारना आवश्यक होता है। बिलावल की बंदिश में विशेष ध्यान: स्वर की शुद्धता लय के साथ संतुलन तानपुरा और तबले के साथ तालमेल बंदिश के बाद तानें सरल, सीधी और स्वरप्रधान होनी चाहिए। अत्यधिक चपल तानों से इस राग की शांति भंग हो सकती है। 🧘♂️ आध्यात्मिक और मानसिक प्रभाव D# तानपुरा पर राग बिलावल का अभ्यास मानसिक एकाग्रता को बढ़ाता है। सुबह के समय इस राग का अभ्यास: मन को शांत करता है स्वर को शुद्ध बनाता है श्वास-प्रश्वास को संतुलित करता है आत्मविश्वास बढ़ाता है इस कारण से राग बिलावल को साधना का राग भी कहा जाता है। 🎶 शिक्षण और प्रस्तुति में उपयोग राग बिलावल को अक्सर: संगीत शिक्षा की शुरुआत विद्यार्थियों के मंच प्रदर्शन भजन और देशभक्ति गीतों शास्त्रीय कार्यक्रमों के प्रारंभ में प्रयोग किया जाता है। D# स्केल में यह राग बहुत प्रभावी और श्रव्य लगता है। 📿 निष्कर्ष D# तानपुरा, तबला और राग बिलावल का संगम भारतीय शास्त्रीय संगीत की सरलता और गहराई दोनों को दर्शाता है। तानपुरा स्वर की नींव देता है, तबला लय का आधार बनता है और राग बिलावल इन दोनों के बीच मधुर संवाद स्थापित करता है। नियमित अभ्यास, सही स्केल का चयन और भावपूर्ण प्रस्तुति से राग बिलावल न केवल संगीत की समझ बढ़ाता है, बल्कि साधक के जीवन में भी संतुलन और शांति लाता है। #RagBilawal #DSharpTanpura #TanpuraPractice #TablaWithRaga #IndianClassicalMusic #ShastriyaSangeet #RagaPractice #MorningRaga #SurSadhna #MusicMeditation #ClassicalRiyaz #SwarAbhyas