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खून से लथपथ बेटे को देख माँ का कलेजा फटा, फिर ICU में अनु की दीवानगी देख गायत्री देवी ने लिया ऐसा फैसला कि हिल गई दुनिया! गायत्री देवी का कलेजा उस वक्त मुंह को आ गया और उनकी रूह कांप उठी जब उन्होंने अस्पताल के उस ठंडे और सुनसान आईसीयू रूम में अपने जिगर के टुकड़े आर्य को मौत और जिंदगी की जंग लड़ते हुए देखा जहां हर तरफ सिर्फ मशीनों की डरावनी आवाजें थीं और उनका हट्टा कट्टा जवान बेटा सफेद पट्टियों में लिपटा हुआ खून से लथपथ बेहोश पड़ा था और यह मंजर किसी भी मां के लिए बर्दाश्त के बाहर था क्योंकि उन्हें पता था कि उनके बेटे की यह हालत किसी साधारण सड़क हादसे से नहीं बल्कि उसके नाजुक दिल के बुरी तरह टूटने से हुई है जो अनु की सगाई मोहित से तय होने की खबर सुनकर पूरी तरह बिखर गया था और आर्य जो अनु से बेइंतहा और पागलों वाला प्यार करता था वह यह गहरा सदमा सह नहीं पाया कि उसकी जान अब किसी और की होने जा रही है और इसी गम और लाचारी में उसने अपने असहनीय दर्द को भुलाने के लिए शराब का सहारा लिया और नशे में इतना चूर हो गया कि उसे यह भी होश नहीं रहा कि वह बीच सड़क पर कहां जा रहा है और इसी बेहोशी और दीवानगी में वह बस अनु की यादों में खोया हुआ रो रहा था कि तभी एक तेज रफ्तार गाड़ी ने उसे जोरदार टक्कर मार दी और वह हवा में उछलकर सड़क पर जा गिरा जहां उसका शरीर छलनी हो गया और खून पानी की तरह बहने लगा मगर जब यह मनहूस खबर अनु तक पहुंची जो अपने घर में शादी की तैयारियों और मेहंदी की रस्मों के बीच घुट रही थी तो उसने एक पल भी नहीं सोचा कि लोग क्या कहेंगे या मोहित का क्या होगा और न ही उसे अपने पिता के गुस्से का खौफ रहा बस उसे दिखा तो सिर्फ अपने आर्य का चेहरा और वह सब कुछ छोड़कर नंगे पैर ही अपने घर से पागलों की तरह भागी जैसे कोई अपनी सांसों को बचाने के लिए भाग रहा हो और जब वह बदहवास हालत में अस्पताल पहुंची तो आर्य की हालत देखकर उसकी दुनिया ही उजड़ गई और वह दौड़कर आर्य के बिस्तर के पास गई और बिना किसी की परवाह किए उसने आर्य के खून से सने शरीर को अपनी बाहों में कसकर भर लिया और जोर जोर से दहाड़ें मारकर रोने लगी और चीख चीख कर माफी मांगने लगी कि मुझे माफ कर दो आर्य मैं समाज से डर गई थी मगर अब नहीं डरूंगी बस तुम लौट आओ आंखें खोलो क्योंकि मैं तुम्हारे बिना एक पल भी जिंदा नहीं रह सकती और अनु ने आर्य के माथे को चूम लिया और उसे अपने आंसुओं से भिगो दिया वह पूरी तरह भूल गई थी कि वहां डॉक्टर हैं नर्स हैं या आर्य की मां खड़ी हैं उसे बस आर्य की धड़कनों की फिक्र थी और यह सब कुछ गायत्री देवी दूर खड़ी होकर अपनी नम आंखों से देख रही थीं कि कैसे एक लड़की उनके बेटे की जिंदगी के लिए तड़प रही है और उन्होंने उस पल महसूस किया कि यह सिर्फ कोई कच्ची उम्र का आकर्षण नहीं है बल्कि यह तो जन्मों का सच्चा प्यार है जो मौत को भी हराने की ताकत रखता है और अनु की आंखों में आर्य के लिए वह दर्द और समर्पण देखकर गायत्री देवी का ममता भरा दिल मोम की तरह पिघल गया और उन्होंने समाज की सारी बंदिशें और जाति पाति की दीवारों को मन ही मन तोड़ दिया और आगे बढ़कर फफक कर रोती हुई अनु के सिर पर अपना ममता भरा हाथ रख दिया और उसे उठाकर अपने गले से लगा लिया और उसकी पीठ सहलाते हुए कहा कि बस कर पगली मेरा आर्य तुझे छोड़कर कहीं नहीं जाएगा और आज मैं तुझे वचन देती हूं कि अगर मेरा बेटा मौत के मुंह से वापस आएगा तो उसकी दुल्हन कोई और नहीं बल्कि तू ही बनेगी और आज से तू मेरी बहू है चाहे दुनिया इधर की उधर हो जाए और गायत्री देवी ने वहीं खड़े होकर अनु और आर्य के पवित्र रिश्ते को अपना आशीर्वाद दे दिया और मन ही मन ठान लिया कि अब वह खुद जमाने से लड़कर इन दोनों को एक करेंगी