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**देहरा मिनी सचिवालय की पार्किंग बनी ‘कमाई का अड्डा’! सरकारी आदेश 5–10 रुपये, वसूली 10–20 रुपये — ठेकेदार की मनमानी या प्रशासन की अनदेखी?** देहरा स्थित मिनी सचिवालय की पार्किंग अब आम लोगों की जेब पर भारी पड़ने लगी है। मंगलवार से पार्किंग में वाहन खड़े करते ही शुल्क की पर्ची काटी जा रही है, जिससे जनता में रोष और चर्चाओं का माहौल गर्म हो गया है। जानकारी के अनुसार मिनी सचिवालय परिसर की पार्किंग का ठेका जे.के. एंटरप्राइजेज को दिया गया है। पार्किंग पर्ची पर दोपहिया वाहन के लिए 10 रुपये प्रति घंटा और चारपहिया वाहन के लिए 20 रुपये प्रति घंटा शुल्क अंकित किया गया है। पर्ची पर वाहन नंबर, तारीख और समय भी दर्ज किया जा रहा है। मामला उस समय और गंभीर हो गया जब एसडीएम देहरा कुलवंत सिंह पोटन ने स्पष्ट किया कि प्रशासन की ओर से पार्किंग शुल्क वास्तव में दोपहिया के लिए 5 रुपये और चारपहिया के लिए 10 रुपये ही निर्धारित किया गया है। इसके विपरीत ठेकेदार द्वारा कथित तौर पर पूरे दिन के नाम पर 10 और 20 रुपये की वसूली की जा रही है। इससे प्रशासनिक आदेशों की खुलेआम अनदेखी होने के आरोप लगने लगे हैं। जब पत्रकारों ने इस विषय पर एसडीएम से सवाल किए तो उन्होंने कहा कि यदि ठेकेदार द्वारा मनमानी वसूली की जा रही है तो मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। उधर, पार्किंग स्थलों की संख्या भी सवालों के घेरे में आ गई है। एसडीएम के अनुसार देहरा में केवल तीन स्थानों—मिनी सचिवालय परिसर, शहीद भुवनेश स्टेडियम के पीछे और स्कूल की रेवेन्यू विभाग की भूमि—को ही पार्किंग के लिए अधिकृत किया गया है। जबकि चर्चा है कि ठेकेदार द्वारा देहरा अस्पताल के पास भी पार्किंग चलाई जा रही है, जो जांच का विषय बन गया है। एसडीएम का कहना है कि मिनी सचिवालय परिसर में गलत पार्किंग के कारण लोगों को परेशानी होती थी और परिसर को सेल्फ डिपेंडेंट बनाने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले सरकारी काम से थोड़ी देर के लिए आने वालों को नि:शुल्क पार्किंग की सुविधा मिलती थी, लेकिन अब अचानक शुल्क लगाए जाने से आम आदमी को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सचिवालय के केवल एक गेट से प्रवेश-निकासी की व्यवस्था और दूसरे गेट के बंद रहने से भी लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। हालांकि कुछ लोगों ने इस व्यवस्था का समर्थन करते हुए कहा कि शुल्क लगने से अव्यवस्थित पार्किंग पर रोक लगेगी और यातायात व्यवस्था सुधरेगी। साथ ही उन्होंने मांग की कि पार्किंग शुल्क, ठेके की शर्तें और समय-सीमा से जुड़ी पूरी जानकारी सूचना बोर्ड पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जाए।