У нас вы можете посмотреть бесплатно कन्हैयालाल सेठिया द्वारा रचित प्रसिद्ध राजस्थानी कविता "पातळ और पीथळ" (अरे घास री रोटी ही) или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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अरे घास री रोटी ही , जद बन बिलावडो ले भाग्यो नान्हो सो अमरियो चीख पड्यो,राणा रो सोयो दुख जाग्यो जब जंगल से बिलाव उसे उठा ले गया। छोटा-सा अमरियो रो पड़ा, और राणा का सोया हुआ दुख जाग उठा। हुँ लड्यो घणो , हुँ सहयो घणो, मेवाडी मान बचावण न हुँ पाछ नहि राखी रण म , बैरयां रो खून बहावण म मैंने बहुत युद्ध लड़े, मैंने बहुत कष्ट सहे, मेवाड़ का मान बचाने के लिए। मैं रणभूमि में कभी पीछे नहीं हटा, दुश्मनों का रक्त बहाने में। जद याद करुं हल्दीघाटी , नैणां म रक्त उतर आवै सुख: दुख रो साथी चेतकडो , सुती सी हूंक जगा जावै जब हल्दीघाटी का स्मरण करता हूँ, तो आँखों में खून उतर आता है। सुख-दुख का साथी चेतक, सोई हुई हूक को जगा देता है। पण आज बिलखतो देखुं हूं , जद राज कंवर न रोटी न हुँ क्षात्र धरम न भूलूँ हूँ , भूलूँ हिन्दवाणी चोटी न पर आज मैं यह देखकर बिलखता हूँ, कि राजकुमार के पास रोटी तक नहीं है। मैं क्षत्रिय धर्म नहीं भूल सकता, न ही अपनी हिंदवी जूड़ी (चोटी)। महलां म छप्पन भोग झका , मनवार बीना करता कोनी सोना री थालयां ,नीलम रा बजोट बीना धरता कोनी महलों में छप्पन भोग सजे हैं, बिना आग्रह के कोई खाता नहीं। सोने की थालियाँ हैं, नीलम जड़े पाट हैं, फिर भी बिना विधि के भोजन नहीं होता। ऐ हा झका धरता पगल्या , फूलां री कव्ठी सेजां पर बै आज रूठ भुख़ा तिसयां , हिन्दवाण सुरज रा टाबर अरे! वे ऐश्वर्य में डूबे हुए लोग, फूलों की कोमल सेजों पर पैर रखते हैं, और आज वही भूखे होकर रूठा बैठा है हिंदवाणी का सूरज-सा पुत्र। आ सोच हुई दो टूट तडक , राणा री भीम बजर छाती आँख़्यां म आंसु भर बोल्या , म लीख़स्युं अकबर न पाती यह सोचकर राणा की भीमकाय वज्र जैसी छाती टूटने लगी। आँखों में आँसू भरकर बोले— मैं अकबर को पत्र लिखूँ। पण लिख़ूं कियां जद देखूँ हूं , आ रावल कुतो हियो लियां चितौड ख़ड्यो ह मगरानँ म ,विकराल भूत सी लियां छियां अरे घास री रोटी ही , जद बन बिलावडो ले भाग्यो पर लिखूँ कैसे, जब देखता हूँ कि चितौड़ मगरों से घिरा खड़ा है, और भीतर भयावह भूतों-सी आत्माएँ बस गई हैं। #पातळ_और_पीथळ #अरे_घास_री_रोटी_ही #कन्हैयालाल_सेठिया #कन्हैयालाल सेठिया #राजस्थानी_कविता #राजस्थानी_साहित्य #राजस्थानी_भाषा #RajasthaniPoetry #RajasthaniLiterature #RajasthaniCulture #DesiPoetry #IndianPoetry #लोक_साहित्य #लोक_संस्कृति #मरुभूमि_की_आवाज़ #माटी_की_खुशबू #राजस्थान #RajasthanCulture #PoetryLovers #HindiLiterature #BhartiyaSahitya