У нас вы можете посмотреть бесплатно सलाद खाने से भी बढ़ सकता है वजन? जानिए अपनी प्रकृति (Ayurvedic Weight Loss Truth)अग्नि को समझे Part-1 или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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#AyurvedaScience #WeightLossJourney #BodyTypeDiet (Vata/Pitta/Kapha) #Metabolism #Medorog #AyurvedicLifestyle Note:- Watch bonus video after Watching This video 1. Part 1 :- ▶️ 2. Bonus Video ( Prakruti ) :- • Prakruti - Unique Body Type According to A... 3. Part 2 :- • Ayurvedic Herbs That Burn Fat Without Side... 4. Part 3 :- आयुर्वेद में मोटापे को 'स्थौल्य' या 'मेदोरोग' के रूप में जाना जाता है। यह केवल एक कॉस्मेटिक समस्या नहीं है, बल्कि एक गंभीर चयापचय (Metabolic) विकार है । यह video चरक, सुश्रुत और वाग्भट संहिताओं के साथ-साथ आधुनिक नैदानिक अनुसंधान पर आधारित है, जिसका उद्देश्य दोष, अग्नि और शारीरिक प्रकृति के संतुलन के माध्यम से वसा घटाने (Fat Loss) की प्रक्रिया को समझाना है । 1. स्थौल्य का मौलिक सिद्धांत और रोगजनन आयुर्वेद स्वास्थ्य को दोष, अग्नि, धातु और मल के संतुलन के रूप में परिभाषित करता है ('समदोषः समाग्निश्च...') । जब कफ दोष और मेद धातु (Fat tissue) में असंतुलन होता है, तो स्थौल्य उत्पन्न होता है । अग्नि की भूमिका (Metabolism): वजन घटाना पूरी तरह से 'अग्नि' पर निर्भर करता है । स्थौल्य के रोगियों में एक विरोधाभासी स्थिति होती है: तीव्र जठराग्नि (Digestive Fire): वायु पेट में जाकर अग्नि को भड़काती है, जिससे रोगी को अत्यधिक भूख (भस्मक रोग) लगती है और भोजन जल्दी पच जाता है । मंद मेदोधात्वाग्नि (Tissue Fire): पेट की अग्नि तेज होने के बावजूद, वसा ऊतकों की अग्नि (Medodhatvagni) मंद पड़ जाती है । पोषक तत्व मेद धातु पर ही रुक जाते हैं और अगली धातुओं (अस्थि, मज्जा) तक नहीं पहुँच पाते । परिणामस्वरूप, केवल चर्बी बनती है और शरीर ऊर्जाहीन महसूस करता है । आम और स्रोतों का अवरोध: अपूर्ण पाचन से बना विषाक्त पदार्थ 'आम' (Ama) कहलाता है । यह मेद धातु के चैनलों (Srotas) को बंद कर देता है । जब वायु का मार्ग अवरुद्ध होता है, तो वह पेट में घूमकर भूख को और बढ़ाती है, जिससे एक दुष्चक्र (Vicious Cycle) बन जाता है । इसलिए, उपचार का लक्ष्य केवल कैलोरी कम करना नहीं, बल्कि 'आम' को हटाना और मेदोधात्वाग्नि को तेज करना है । 2. प्रकृति अनुसार वजन घटाने की रणनीतियाँ वजन घटाने के लिए अपनी 'प्रकृति' (Body Constitution) को समझना अनिवार्य है । कफ प्रकृति (Kapha): इनका चयापचय धीमा होता है और वजन आसानी से बढ़ता है । उपचार के लिए 'विपरीत सामान्य' सिद्धांत अपनाएं—आहार गर्म, सूखा, हल्का और गतिशील होना चाहिए । आहार: कड़वा, तीखा और कसैला भोजन लें । मीठा, खट्टा और नमकीन त्यागें। जौ और बाजरा जैसे पुराने अनाज लें । काली मिर्च, अदरक और हल्दी जैसे गर्म मसालों का प्रयोग करें । पित्त प्रकृति (Pitta): इनकी अग्नि बहुत तेज होती है और भूख अधिक लगती है । इन्हें 'शीतल' लेकिन 'हल्के' भोजन की आवश्यकता होती है । आहार: मधुर, कड़वा और कसैला रस प्रधान भोजन लें । जौ, ओट्स और बासमती चावल अच्छे हैं । लौकी, खीरा और पत्तेदार सब्जियां खाएं, लेकिन टमाटर और कच्ची प्याज से बचें । नारियल पानी और सौंफ का पानी पिएं । वात प्रकृति (Vata): तनाव के कारण इनका वजन (Stress Belly) बढ़ सकता है और पाचन अनियमित होता है । आहार गर्म और स्निग्ध होना चाहिए, लेकिन भारी नहीं । आहार: कच्ची सब्जियां (Raw Salads) न खाएं, क्योंकि ये वात बढ़ाती हैं । सूप, खिचड़ी और पकी हुई सब्जियां लें । हींग, जीरा और अदरक जैसे मसाले पाचन सुधारते हैं continue...Next Video part 2 Timestamps (Hindi): [00:00] परिचय और मोटापे का आयुर्वेदिक दृष्टिकोण (Introduction) [01:29] पाचन अग्नि और आम (हीरो और विलेन) [02:37] तीन मुख्य बॉडी टाइप्स: कफ, पित्त, वात [02:59] कफ प्रकृति और वजन घटाने के उपाय [04:09] पित्त प्रकृति और पेट की चर्बी (Abdominal Obesity) [05:03] वात प्रकृति और स्ट्रेस बेली (Stress Belly) [06:02] डाइट चार्ट: तीनों प्रकृतियों के लिए क्या खाएं और क्या नहीं