У нас вы можете посмотреть бесплатно ✨ श्रीमद्भागवत महापुराण: ध्रुव का ध्रुवलोक गमन || चतुर्थ स्कंध, बारहवाँ अध्याय || или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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ध्रुव जी ने छत्तीस हजार वर्षों तक न्यायपूर्वक और धर्म के साथ पृथ्वी पर शासन किया। उन्होंने अनेक यज्ञ किए और अपनी प्रजा को संतान की भांति पाला। अंत में, उन्होंने अपने पुत्र को राज-सिंहासन सौंप दिया और स्वयं बदरिकाश्रम (बद्रीनाथ) तपस्या के लिए चले गए। 🛸 दिव्य विमान का आगमन बदरिकाश्रम में तपस्या करते हुए एक दिन ध्रुव जी ने आकाश से एक अत्यंत तेजस्वी विमान को उतरते देखा। उस विमान से भगवान विष्णु के दो पार्षद, नन्द और सुनन्द, नीचे आए। उन्होंने ध्रुव जी से कहा—"हे महान भक्त! भगवान श्रीहरि आपसे अत्यंत प्रसन्न हैं। वे आपको अपने उस परम धाम (ध्रुवलोक) में बुला रहे हैं, जहाँ आज तक कोई अन्य नहीं पहुँच सका।" 🦶 मृत्यु के सिर पर पैर जब ध्रुव जी विमान पर चढ़ने लगे, तब साक्षात् 'मृत्यु' उनके सामने आकर खड़ी हो गई। ध्रुव जी तनिक भी विचलित नहीं हुए; उन्होंने मृत्यु के सिर पर अपना पैर रखा और उसी को सीढ़ी बनाकर विमान में सवार हो गए। यह दृश्य देवताओं के लिए भी दुर्लभ था। 🌌 ध्रुवलोक की प्राप्ति विमान में बैठते समय ध्रुव जी को अपनी माता सुनीति की याद आई। तब पार्षदों ने उन्हें दिखाया कि उनकी माता एक अन्य विमान में उनसे भी आगे जा रही हैं। ध्रुव जी उस 'अचल' पद पर प्रतिष्ठित हुए, जिसके चारों ओर सप्तर्षि और सभी नक्षत्र निरंतर परिक्रमा करते हैं। आज भी हम उन्हें ध्रुव तारे के रूप में आकाश में देख सकते हैं। #DhruvaTara #Moksha #BhaktiKiVijay #SrimadBhagavatam #DivyaKathavani" #shritaragirimaharaj #amitmaharaj #shivmandirnigana #nigana_dham #श्रीमद्भागवतगीता #भगवदगीता #GeetaKatha #कृष्णउपदेश #कर्मयोग, #जीवनदर्शन #spiritualmotivation #shritareshwarmahadevmandir #nigana_kalan #nigana_ashram #divyakatha #divya.kathavani #hinduscripture #divyakathavani #devotional #bhakti